चंबा। हिमाचल प्रदेश में मानसून की बारिश के बीच पहाड़ी जिलों में मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। चंबा में लगातार दूसरे दिन भारी बारिश के कारण भूस्खलन और चट्टानें गिरने की घटनाएं सामने आई हैं। पहले ही जिले में 100 से अधिक घरों को नुकसान पहुंच चुका है, वहीं अब सरोल क्षेत्र में देर रात पहाड़ी से गिरे मलबे और भारी चट्टानों की चपेट में आने से एक मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।
आधी रात को पहाड़ी से बरसी आफत
गनीमत यह रही कि जिस वक्त यह हादसा हुआ, मकान में परिवार का कोई सदस्य मौजूद नहीं था। खतरे को भांपकर परिवार पहले ही घर छोड़कर रिश्तेदार के यहां चला गया था। इस वजह से एक बड़ा हादसा टल गया। मंगलवार रात करीब 12 बजे सरोल क्षेत्र में अचानक पहाड़ी से भूस्खलन हुआ।
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देखते ही देखते भारी मलबे के साथ बड़ी-बड़ी चट्टानें नीचे की तरफ आने लगीं। इसी दौरान एक चट्टान मकान के लेंटल पर जा गिरी और मकान को भारी नुकसान पहुंचा। मकान सरोल निवासी प्रविंद्र कुमार का बताया जा रहा है। चट्टानों की जोरदार टक्कर से घर का ढांचा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और अंदर रखा घरेलू सामान भी टूट-फूट गया। हादसे में परिवार को लाखों रुपये के नुकसान का अनुमान है।
पहले ही खाली कर दिया था घर
परिवार के सदस्य जर्म सिंह के अनुसार, सोमवार रात से ही इलाके में हालात चिंताजनक बने हुए थे। लगातार बारिश के बीच पहाड़ी की तरफ से पत्थर और मलबा नीचे आने लगा था। खतरे को देखते हुए परिवार पूरी रात जागता रहा। हालात बिगड़ते देख परिवार ने मकान को बंद किया और सुरक्षित स्थान पर रिश्तेदार के घर चला गया। इसके बाद मंगलवार रात चट्टानों ने मकान को अपनी चपेट में ले लिया। अगर परिवार उस समय घर के अंदर होता तो हादसा बेहद गंभीर हो सकता था।
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रात के सन्नाटे में पहाड़ी से चट्टानें गिरने की जोरदार आवाज ने आसपास के लोगों को भी डरा दिया। ग्रामीण पहले से ही पिछले दिन की तबाही से सहमे हुए थे। सोमवार की मूसलाधार बारिश के दौरान कई घरों में पानी और मलबा घुस गया था, जबकि कई वाहन भी मलबे में दब गए थे। सड़कों और संपर्क मार्गों के बाधित होने के कारण ग्रामीणों को पहले ही भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। ऐसे में रात के समय दोबारा पहाड़ी दरकने की घटना ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी।
सड़क निर्माण से खतरे का आरोप
सरोल पंचायत के प्रधान विजय कुमार सहित स्थानीय ग्रामीणों ने क्षेत्र में भूस्खलन के बढ़ते खतरे को लेकर चिंता जताई है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव के ऊपरी हिस्से में हुए सड़क निर्माण कार्य के बाद पहाड़ी से मलबा और चट्टानें नीचे आने का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे क्षेत्र का तकनीकी निरीक्षण करवाने और संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग की है, ताकि आने वाले दिनों में बारिश के दौरान किसी बड़े हादसे को रोका जा सके।
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एसडीएम चंबा चिराग शर्मा ने बताया कि सरोल गांव में भूस्खलन और चट्टानें गिरने से एक मकान क्षतिग्रस्त हुआ है। राहत की बात यह है कि घटना के समय घर में कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था। प्रशासन की ओर से संबंधित पटवारी को मौके पर भेजकर नुकसान का आकलन करवाया गया है और रिपोर्ट तैयार कर ली गई है। प्रभावित परिवार को तत्काल राहत के तौर पर 25 हजार रुपये की सहायता राशि भी प्रदान की गई है।
100 से ज्यादा घर पहले ही प्रभावित
चंबा में यह घटना ऐसे समय हुई है जब जिले में भारी बारिश के कारण पहले से ही बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। एक दिन पहले ही 100 से अधिक घरों के प्रभावित होने की सूचना सामने आई थी। कई जगह मलबा घरों और सड़कों तक पहुंच गया, जिससे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए मजबूर होना पड़ा।
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लगातार बारिश के बीच अब सरोल में हुई नई घटना ने यह चिंता बढ़ा दी है कि आने वाले दिनों में पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा और गंभीर हो सकता है। प्रशासन और स्थानीय लोगों के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती संवेदनशील इलाकों में रह रहे परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
