हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने अभिभावकों और बच्चों के बीच संवाद की अहमियत को फिर से उजागर कर दिया है। बड़सर क्षेत्र में मोबाइल फोन पर रील देखने को लेकर परिजनों की डांट से नाराज एक नाबालिग लड़की घर छोड़कर चली गई।

रील देखने पर डांट पड़ी

परिवार के लिए यह घटना किसी बड़े सदमे से कम नहीं थी, लेकिन बड़सर पुलिस की त्वरित कार्रवाई और लगातार प्रयासों के चलते महज 48 घंटे के भीतर नाबालिग को राजस्थान से सकुशल बरामद कर लिया गया।

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घर से भाग गई नाबालिग लड़की

जानकारी के अनुसार, नाबालिग मूल रूप से राजस्थान की रहने वाली है, लेकिन अपने माता-पिता के साथ बड़सर क्षेत्र में निवास कर रही थी। बताया जा रहा है कि किसी बात को लेकर परिजनों ने उसे मोबाइल फोन पर अधिक समय तक रील देखने के कारण समझाया और डांट लगाई थी। इस बात से नाराज होकर वह बिना किसी को बताए घर से निकल गई।

तलाश में भटकते रहे परिजन

जब काफी समय तक नाबालिग घर वापस नहीं लौटी तो परिवार के सदस्यों ने आसपास के इलाकों में उसकी तलाश शुरू की। रिश्तेदारों, परिचितों और संभावित स्थानों पर खोजबीन की गई, लेकिन उसका कोई पता नहीं चल सका। आखिरकार परिजनों ने बड़सर पुलिस थाना पहुंचकर गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई।

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CCTV फुटेज की जांच पड़ताल

शिकायत मिलते ही पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत जांच शुरू कर दी। टीम ने इलाके में लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली और नाबालिग की गतिविधियों का पता लगाने का प्रयास किया। इसके साथ ही बस अड्डों, बाजारों और संभावित मार्गों पर भी जानकारी जुटाई गई। तकनीकी साक्ष्यों और स्थानीय स्तर पर जुटाई गई सूचनाओं के आधार पर पुलिस को अहम सुराग मिले, जिनसे पता चला कि नाबालिग राजस्थान पहुंच चुकी है।

राजस्थान पहुंची हिमाचल पुलिस

इसके बाद बड़सर पुलिस की एक टीम ने राजस्थान पुलिस से संपर्क किया और उनके सहयोग से संयुक्त कार्रवाई करते हुए नाबालिग को सुरक्षित ढूंढ़ निकाला। सभी आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उसे सकुशल परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया।

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पुलिस को लड़की ने बताया....

प्रारंभिक पूछताछ के दौरान नाबालिग ने बताया कि वह परिजनों की डांट से आहत होकर बिना सोचे-समझे घर छोड़कर चली गई थी। उसका किसी आपराधिक गतिविधि या अन्य संदिग्ध मामले से कोई संबंध सामने नहीं आया है।

पुलिस को किस हाल में मिली लड़की?

मामले की पुष्टि पुलिस उपाधीक्षक लालमन शर्मा ने करते हुए बताया कि शिकायत मिलते ही पुलिस ने तेजी से कार्रवाई की और विभिन्न माध्यमों से जांच को आगे बढ़ाया। समय पर की गई कार्रवाई और राजस्थान पुलिस के सहयोग से नाबालिग को सुरक्षित बरामद कर लिया गया।

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डिजिटल दौर का बच्चों पर असर

यह घटना अभिभावकों और बच्चों दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण सीख है। आज के डिजिटल दौर में मोबाइल फोन और सोशल मीडिया का उपयोग बच्चों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। ऐसे में छोटी-छोटी बातों पर नाराज होकर घर छोड़ने जैसे कदम गंभीर परिणाम पैदा कर सकते हैं।

 

विशेषज्ञों का भी मानना है कि परिवारों को बच्चों के साथ खुलकर संवाद करना चाहिए, ताकि किसी भी समस्या का समाधान बातचीत के माध्यम से निकाला जा सके और ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।

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