नई दिल्ली/शिमला। देश की राजधानी नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल की हाई-प्रोफाइल बैठक में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने प्रदेश के हकों के लिए जोरदार पैरवी की। बैठक में मुख्यमंत्री सुक्खू ने प्रदेश के आर्थिक हितों और वित्तीय चुनौतियों को मजबूती से उठाया। सीएम सुक्खू ने प्रधानमंत्री के सामने देवभूमि की लगातार खराब हो रही माली हालत (आर्थिक स्थिति) का पूरा लेखा-जोखा रखा और दोटूक शब्दों में कहा कि केंद्र से हिमाचल को उसके वाजिब अधिकार मिलने बेहद जरूरी हैं।
हिमाचल की आर्थिक चुनौतियों से कराया अवगत
मुख्यमंत्री ने नीति आयोग की बैठक में बताया कि पिछले कुछ वर्षों में हिमाचल की आर्थिक स्थिति पर कई कारणों से दबाव बढ़ा है। राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद होने, जीएसटी व्यवस्था के कारण राजस्व में कमी, प्राकृतिक आपदाओं से हुए भारी नुकसान और विभिन्न वित्तीय चुनौतियों ने राज्य की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि हिमाचल जैसे विशेष श्रेणी के पर्वतीय राज्य को सामान्य राज्यों के समान नहीं देखा जा सकता और इसकी भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अलग वित्तीय व्यवस्था की आवश्यकता है।
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केंद्र से मांगा हिमाचल का हक
मुख्यमंत्री सुक्खू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष हिमाचल के विभिन्न लंबित वित्तीय मामलों को भी प्रमुखता से रखा। उन्होंने प्रदेश के हितों से जुड़े मुद्दों पर केंद्र से सकारात्मक हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि हिमाचल को उसके वैधानिक और आर्थिक अधिकार समय पर मिलने चाहिए। उन्होंने यह भी आग्रह किया कि प्रदेश की वास्तविक वित्तीय स्थिति का आकलन करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित की जाए, ताकि हिमाचल की जरूरतों के अनुरूप सहायता का खाका तैयार किया जा सके।
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बीबीएमबी के बकाये का मामला फिर उठा
बैठक में मुख्यमंत्री ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) से हिमाचल को मिलने वाली हजारों करोड़ रुपये की बकाया राशि का मुद्दा भी प्रधानमंत्री के समक्ष उठाया। उन्होंने कहा कि यह राशि लंबे समय से लंबित है और प्रदेश को इसका लाभ मिलना चाहिए। राज्य सरकार का मानना है कि इस राशि के मिलने से विकास कार्यों को गति देने और वित्तीय दबाव कम करने में मदद मिलेगी।
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ग्रीन बोनस की मांग
सीएम ने कहा कि हिमाचल अपनी हरी-भरी वादियों और जंगलों के जरिए पूरे देश को हर साल करीब 90 हजार करोड़ रुपए मूल्य की पारिस्थितिकीय (Eco-system) सेवाएं मुफ्त में प्रदान करता है। इतने बड़े योगदान के बावजूद हिमाचल को बदले में कोई विशेष आर्थिक मदद नहीं मिलती। सीएम सुक्खू ने मांग की कि इस योगदान के एवज में केंद्र सरकार तुरंत हिमाचल प्रदेश के लिए ग्रीन बोनस का ऐलान करे।
1500 करोड़ के आपदा पैकेज सहित यह मुद्दे भी उठाए
मुख्यमंत्री सुक्खू ने प्रदेश में प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान और पीएम मोदी द्वारा घोषित 1500 करोड़ के राहत पैकेज से जुड़े मामलों को भी बैठक में उठाया। सीएम सुक्खू ने प्रधानमंत्री को याद दिलाया कि पिछले साल मॉनसून की भीषण तबाही के बाद जब पीएम मोदी ने हिमाचल प्रदेश का दौरा किया था, तब उन्होंने 1500 करोड़ रुपए के विशेष आपदा राहत पैकेज की घोषणा की थी। जो प्रदेश को अभी तक नहीं मिला। उन्होंने कहा कि लगातार आपदाओं से प्रदेश को भारी आर्थिक क्षति हुई है, जिसके लिए विशेष सहायता की आवश्यकता है। इसके अलावा जलविद्युत परियोजनाओं, हवाई अड्डा विस्तार, हरित ऊर्जा और अन्य विकास योजनाओं में हिमाचल के हितों को प्राथमिकता देने का आग्रह भी किया गया।
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हिमाचल के लिए मजबूत पैरवी
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस बैठक को हिमाचल के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान प्रदेश की आर्थिक चुनौतियों, विकास संबंधी जरूरतों और वित्तीय अधिकारों को राष्ट्रीय मंच पर प्रमुखता से रखा। अब प्रदेश की नजर केंद्र सरकार की आगामी प्रतिक्रिया और उन फैसलों पर टिकी है, जो हिमाचल की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने और विकास योजनाओं को गति देने में मददगार साबित हो सकते हैं।
