धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश की राजनीति में सत्ता की चाबी माने जाने वाले कांगड़ा जिला में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने गुरुवार को एक साथ कई राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की। पंचायत प्रधानों और उपप्रधानों के शपथ ग्रहण समारोह के बहाने मुख्यमंत्री ने जहां विपक्षी दल भाजपा पर तीखे राजनीतिक वार किए, वहीं ग्रामीण विकास और पंचायतों को मजबूत करने के लिए बड़े आश्वासन देकर जनप्रतिनिधियों को अपने साथ जोड़ने का प्रयास भी किया।

 

धर्मशाला के दाड़ी में आयोजित समारोह केवल शपथ ग्रहण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सरकार की आगामी राजनीतिक और विकासात्मक रणनीति का मंच भी बन गया। मुख्यमंत्री ने साफ संकेत दिए कि सरकार की नजरें कांगड़ा पर केंद्रित हैं और आने वाले समय में इस जिले को विकास की नई पहचान देने की दिशा में बड़े कदम उठाए जाएंगे।

पंचायत प्रतिनिधियों को दिया बड़ा भरोसा

नवनिर्वाचित प्रधानों और उपप्रधानों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पंचायतों के विकास कार्यों और प्रशासनिक गतिविधियों के लिए धन की कमी नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने हमेशा जमीनी स्तर के जनप्रतिनिधियों को मजबूत करने का प्रयास किया है और आगे भी पंचायतों को अधिक संसाधन उपलब्ध करवाए जाएंगे। मुख्यमंत्री का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पंचायतें सीधे तौर पर ग्रामीण जनता से जुड़ी होती हैं। यदि पंचायतों के पास पर्याप्त संसाधन होंगे तो इसका सीधा लाभ गांवों में रहने वाले लोगों तक पहुंचेगा।

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विपक्ष को दिया जवाब

मुख्यमंत्री ने पंचायत चुनावों को लेकर विपक्ष द्वारा की जा रही आलोचना का भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि कुछ राजनीतिक दल चुनाव प्रक्रिया को लेकर अनावश्यक बयानबाजी कर रहे थे, जबकि सरकार ने विद्यार्थियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए चुनाव कार्यक्रम तय किया था। उन्होंने कहा कि बच्चों की वार्षिक परीक्षाओं को प्रभावित न होने देने के उद्देश्य से चुनावों को निर्धारित समय सीमा के भीतर संपन्न करवाने का फैसला लिया गया था।

नशे के खिलाफ प्रधानों को बनाया सरकार का साझेदार

मुख्यमंत्री ने प्रदेश में बढ़ती नशे की समस्या को गंभीर चुनौती बताते हुए पंचायत प्रतिनिधियों से चिट्टा मुक्त हिमाचल अभियान में अग्रणी भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सरकार अकेले इस लड़ाई को नहीं जीत सकती और इसके लिए गांव स्तर तक जनजागरण जरूरी है। उन्होंने प्रधानों से अपील की कि वे युवाओं को नशे से दूर रखने और समाज में जागरूकता फैलाने के लिए सक्रिय भूमिका निभाएं।

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कांगड़ा को पर्यटन राजधानी बनाने की तैयारी

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कांगड़ा जिले के विकास को लेकर सरकार की प्राथमिकताओं को भी स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि कांगड़ा को हिमाचल प्रदेश की पर्यटन राजधानी के रूप में विकसित करने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। गगल हवाई अड्डे के विस्तार का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इसके लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और प्रभावित परिवारों को मुआवजा भी दिया जा चुका है। उनका कहना था कि इस परियोजना के पूरा होने से पर्यटन, रोजगार और निवेश के नए अवसर पैदा होंगे।

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धर्मशाला को बनाया जा रहा विकास का नया केंद्र

अपने धर्मशाला दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने शहर को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने वाली दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं का लोकार्पण भी किया। उन्होंने पुनर्विकसित फव्वारा चौक और ई-बस चार्जिंग डिपो जनता को समर्पित किया। सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं से धर्मशाला में यातायात, पर्यटन और शहरी सुविधाओं को नई मजबूती मिलेगी। राजनीतिक जानकार इसे धर्मशाला को प्रदेश की शीतकालीन राजधानी के रूप में और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं।

केंद्र सरकार पर भी साधा निशाना

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन के दौरान केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश को मिलने वाली आरडीजी ग्रांट बंद होने और सेना में नियमित भर्ती प्रक्रिया प्रभावित होने से हिमाचल को नुकसान हुआ है। उन्होंने दावा किया कि यदि केंद्र द्वारा वित्तीय सहायता में कटौती नहीं की गई होती तो हिमाचल प्रदेश आत्मनिर्भरता की दिशा में और तेजी से आगे बढ़ चुका होता।

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राजनीतिक और विकासात्मक संदेशों से भरा रहा कार्यक्रम

धर्मशाला का यह कार्यक्रम केवल औपचारिक शपथ ग्रहण समारोह नहीं रहा, बल्कि इसके जरिए मुख्यमंत्री ने एक साथ कई राजनीतिक और प्रशासनिक संदेश देने का प्रयास किया। पंचायत प्रतिनिधियों को विकास का भरोसा, नशे के खिलाफ अभियान में साझेदारी, कांगड़ा को पर्यटन राजधानी बनाने का विजन और विपक्ष पर राजनीतिक हमले—इन सभी के माध्यम से सुक्खू सरकार ने यह संकेत दिया कि प्रदेश की राजनीति में कांगड़ा जिला अभी भी उसकी प्राथमिकताओं के केंद्र में है।

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