शिमला। हिमाचल प्रदेश में तेजी से बढ़ रहे चिट्टा और ड्रग्स नेटवर्क को रोकने के लिए सुक्खू सरकार ने अब तक का सबसे सख्त कदम उठाया है। प्रदेश में लगातार सरकारी कर्मचारियों और युवाओं के नशा तस्करी में पकड़े जाने के बाद अब राज्य सरकार ने साफ कर दिया है कि सरकारी नौकरी पाने का सपना देखने वाले युवाओं को पहले चिट्टा टेस्ट से गुजरना होगा। इतना ही नहीं, सरकारी संस्थानों में डॉक्टर, इंजीनियरिंग और अन्य प्रोफेशनल कोर्स करने वाले छात्रों की भी हर साल ड्रग जांच करवाई जाएगी।

 

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शिमला में यह बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि सरकार प्रदेश की युवा पीढ़ी को नशे की गिरफ्त में नहीं जाने देगी और चिट्टा माफिया के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति पर काम किया जा रहा है।

सरकारी नौकरी से पहले अनिवार्य होगा ड्रग टेस्ट

मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य में सरकारी सेवाओं में भर्ती होने वाले युवाओं के लिए ड्रग टेस्ट अनिवार्य किया जाएगा। यदि कोई अभ्यर्थी चिट्टा या अन्य नशीले पदार्थों का सेवन करता पाया गया, तो उसे नौकरी के लिए अयोग्य माना जा सकता है। सरकार का मानना है कि युवाओं को शुरुआत में ही नशे से दूर रखना जरूरी है, ताकि सरकारी तंत्र को भी नशा मुक्त बनाया जा सके। हाल के वर्षों में कई सरकारी कर्मचारियों के चिट्टा तस्करी में शामिल पाए जाने के बाद सरकार ने यह कड़ा कदम उठाया है।

 

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इन छात्रों की भी हर साल होगी जांच

सुक्खू सरकार ने केवल नौकरी तक ही यह सख्ती सीमित नहीं रखी है। अब सरकारी संस्थानों में मेडिकल, इंजीनियरिंग और अन्य प्रोफेशनल कोर्स कर रहे छात्रों का भी हर साल चिट्टा टेस्ट कराया जाएगा।

 

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मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि किसी छात्र की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आती है तो उसे सीधे रिहैबिलिटेशन सेंटर भेजा जाएगा, ताकि समय रहते उसे नशे की लत से बाहर निकाला जा सके। सरकार का उद्देश्य छात्रों को सजा देना नहीं, बल्कि उन्हें नशे से बचाना और सही रास्ते पर लाना है।

 

जल्द शुरू होगा दूसरे चरण का अभियान

सीएम सुक्खू ने कहा कि प्रदेश को चिट्टा मुक्त करने और लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए सरकार प्रदेश में जल्द ही दूसरे चरण के अभियान की शुरुआत होने जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 1 जून से 20 अगस्त तक पंचायतों और स्कूलों में व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाएगा] जिसमें DC, ADC, SP, ASP, DSP सहित क्लास वन अधिकारी लोगों को नशे के खिलाफ जागरूक करेंगे। 

 

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123 सरकारी कर्मचारी निकले चिट्टा तस्कर

सरकार द्वारा जारी आंकड़ों ने भी चिंता बढ़ा दी है। मुख्यमंत्री के अनुसार प्रदेश में अब तक 123 सरकारी कर्मचारी चिट्टा तस्करी या ड्रग नेटवर्क से जुड़े पाए गए हैं। इनमें पुलिस विभाग के 21 कर्मचारी भी शामिल हैं, जिन्हें सेवा से हटाया जा चुका है।

 

इसके अलावा बिजली बोर्ड, शिक्षा विभाग, बैंकिंग, आईपीएच, एचआरटीसी, फॉरेस्ट, पीडब्ल्यूडी और अन्य विभागों के कर्मचारी भी जांच के दायरे में आए हैं। सरकार ने कई कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया है, जबकि अन्य के खिलाफ कार्रवाई जारी है।

 

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224 पंचायतें बनीं रेड जोन, पुलिस की विशेष निगरानी

प्रदेश में बढ़ते नशा कारोबार को देखते हुए सरकार ने पंचायत स्तर पर भी निगरानी तेज कर दी है। अब तक करीब 12 हजार संदिग्ध तस्करों और नशा कारोबार से जुड़े लोगों की पहचान की जा चुकी है। इनमें 224 पंचायतों को “रेड जोन” घोषित किया गया है, जहां पुलिस और सीआईडी की विशेष नजर बनी हुई है। सरकार का दावा है कि नशा माफिया की अवैध संपत्तियों पर भी कार्रवाई तेज कर दी गई है और कई अवैध निर्माण ध्वस्त किए जा चुके हैं।

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