स्पीति। हिमाचल के जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति में मौसम ने एक बार फिर पहाड़ों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। जहां एक तरफ बारिश और बादल फटने की घटनाएं लोगों के लिए लगातार खतरा बनी हुई हैं।

बादल फटने से तबाही

वहीं मुंची नाला और चपॉर नाला क्षेत्र में कुदरत के कहर ने ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। कुछ ही देर में तेज बहाव ने रास्ते, पानी की व्यवस्था और खेतों को नुकसान पहुंचाया, जबकि अब सबसे बड़ी चिंता उन ग्रामीणों की है जिनका पशुधन नाले के दूसरी ओर फंस गया है।

यह भी पढ़ें- सुक्खू सरकार का मानसून सत्र से पहले झटका : पेट्रोल-डीजल किया महंगा, जानें कितने बढ़े दाम

बह गया नाले पर बना पुल

बादल फटने के बाद मुंची नाले में अचानक पानी का बहाव काफी तेज हो गया। तेज बहाव की चपेट में आने से नाले पर बना पुल पूरी तरह बह गया। पुल के बह जाने से नाले के दूसरी ओर जाने वाला संपर्क मार्ग भी बंद हो गया है। इससे ग्रामीणों की आवाजाही प्रभावित हुई है।

रास्ता भी हुआ बंद

तेज पानी ने सिंचाई कूहल, पेयजल पाइपलाइन, पानी की टंकी और सड़क को भी काफी नुकसान पहुंचाया है। कई जगह पानी का बहाव इतना तेज रहा कि ग्रामीणों के लिए प्रभावित क्षेत्र तक पहुंचना भी मुश्किल हो गया।

यह भी पढ़ें- हिमाचल : नहीं मिला 6 साल का मासूम, कल से तलाश में जुटी पुलिस- रावी का तेज बहाव बना बाधा

खेतों में घुसा नाले का पानी

नाले का पानी अपना रास्ता बदलकर खेतों की ओर चला गया, जिससे बड़ी मात्रा में कृषि भूमि और खड़ी फसलें तबाह हो गई हैं। किसानों के लिए यह नुकसान इसलिए भी बड़ा है क्योंकि नाले के दूसरी ओर उनका काफी कृषि क्षेत्र मौजूद है। पुल और रास्ता बह जाने के बाद किसान अपनी फसल तक भी आसानी से नहीं पहुंच पा रहे हैं। ऐसे में खेतों में तैयार फसल को निकालना भी चुनौती बन गया है।

नाले के पार फंसा पशुधन

पुल बहने का असर सिर्फ लोगों की आवाजाही तक सीमित नहीं है। नाले के दूसरी ओर ग्रामीणों की गायें और अन्य पशुधन भी फंस गए हैं। तेज बहाव के कारण उन्हें सुरक्षित वापस लाना ग्रामीणों के लिए मुश्किल बना हुआ है। ग्रामीणों की चिंता है कि अगर नाले का बहाव दोबारा बढ़ा तो पशुधन को सुरक्षित निकालना और भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

यह भी पढ़ें- हिमाचल में नहीं थम रही बारिश : एक हफ्ते तक जमकर बरसेंगे बादल, कई जिलों में अलर्ट

प्रशासन से तत्काल बहाली की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से मुंची नाला और चपॉर नाला क्षेत्र का तत्काल निरीक्षण करवाने और नुकसान का आकलन करने की मांग की है। लोगों ने पुल और सड़क के साथ-साथ सिंचाई कूहल और पेयजल व्यवस्था को भी प्राथमिकता के आधार पर बहाल करने की मांग उठाई है।

राहत और मुआवजा देने की मांग

इसके अलावा प्रभावित किसानों और पशुपालकों को उचित राहत और मुआवजा देने की मांग भी की गई है। विधायक अनुराधा राणा ने कहा कि वह जल्द ही प्रभावित क्षेत्र का दौरा करेंगी और प्रभावित लोगों की हर संभव मदद का प्रयास किया जाएगा।

यह भी पढ़ें : हिमाचल: जज के सामने युवक को बुलेट बाइक से पटाखे करना पड़ा भारी, अब कोर्ट में होना होगा पेश

ग्रामीणों के सामने कई चुनौतियां

फिलहाल बादल फटने के बाद हुए नुकसान ने ग्रामीणों के सामने एक साथ कई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। संपर्क मार्ग टूटने, खेतों में पानी घुसने और पशुधन के फंसने से प्रभावित परिवारों को तत्काल प्रशासनिक मदद की जरूरत है।

नोट : ऐसी ही तेज़, सटीक और ज़मीनी खबरों से जुड़े रहने के लिए इस लिंक पर क्लिक कर हमारे फेसबुक पेज को फॉलो करें