शिमला। हिमाचल प्रदेश के शिमला और सिरमौर जिले की सीमा पर स्थित प्रसिद्ध चूड़धार मंदिर की यात्रा पर निकले पांच श्रद्धालुओं में से दो के जंगल में लापता होने का मामला सामने आया है। दोनों श्रद्धालु रास्ता भटकने के बाद घने जंगल में कहीं चले गए।
पांच श्रद्धालु हुए लापता
रविवार देर रात तक भी पांचों लापता श्रद्धालुओं का कोई पता नहीं चल सका। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने स्थानीय लोगों के सहयोग से दोनों की तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया।
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चूड़धार मंदिर के लिए पैदल यात्रा
जानकारी के मुताबिक, चंडीगढ़ क्षेत्र से आए पांच श्रद्धालु रविवार शाम करीब चार बजे सराह से चूड़धार मंदिर की ओर पैदल रवाना हुए थे। सभी श्रद्धालु एक साथ ट्रैकिंग कर रहे थे। बताया जा रहा है कि चूड़धार की ओर बढ़ते समय वे देवदार के घने जंगल के बीच मुख्य ट्रैक से भटक गए। जंगल का इलाका काफी घना और पहाड़ी होने के कारण सभी को सही रास्ता तलाशने में परेशानी हुई।
युवकों साथी कहीं नहीं दिखे
इसी दौरान दुष्यंत निवासी लालड़ू, जागरीत निवासी पंचकूला और जसप्रीत किसी तरह करीब दो घंटे बाद वापस ट्रैक तक पहुंच गए। तीनों ने जब अपने दो साथियों को आसपास नहीं देखा तो उनकी चिंता बढ़ गई। उन्होंने आसपास तलाश करने का प्रयास किया। मगर साकेत निवासी मोहाली और राहुल निवासी बतराना का कोई पता नहीं चला। इसके बाद उन्होंने पुलिस को मामले की जानकारी दी।
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दो श्रद्धालुओं से नहीं हो पाया संपर्क
पुलिस के अनुसार, लापता दोनों श्रद्धालुओं की पहचान साकेत निवासी मोहाली और राहुल निवासी बतराना के रूप में हुई है। दोनों के मोबाइल फोन से भी देर रात तक संपर्क नहीं हो सका। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि दोनों रास्ता भटककर जंगल के किसी दूसरे हिस्से में चले गए होंगे।
रास्तों पर खोजबीन शुरू की
मामले की सूचना मिलते ही पुलिस ने स्थानीय लोगों के साथ मिलकर उनकी तलाश शुरू कर दी। सराह क्षेत्र से टीम चूड़धार के जंगल की ओर रवाना हुई और संभावित रास्तों पर खोजबीन की गई। टीम ने उन स्थानों को भी खंगालना शुरू किया, जहां रास्ता मुख्य ट्रैक से अलग होता है।
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अंधेरा और दुर्गम इलाका बना चुनौती
रविवार शाम के बाद अंधेरा बढ़ने के कारण सर्च ऑपरेशन में काफी मुश्किलें सामने आईं। चूड़धार का जंगल घना होने के साथ-साथ पहाड़ी और दुर्गम है। कई स्थानों पर पगडंडियां आपस में मिलती-जुलती हैं, जिससे बाहर से आने वाले लोगों के लिए सही रास्ते की पहचान करना मुश्किल हो जाता है।
सर्च ऑपरेशन में आई दिक्कतें
रात के समय जंगल में विजिबिलिटी कम होने के कारण सर्च टीम को भी बेहद सावधानी के साथ आगे बढ़ना पड़ रहा है। संभावित स्थानों पर आवाज लगाकर और अलग-अलग दिशाओं में तलाश कर दोनों श्रद्धालुओं का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस और स्थानीय लोगों की टीमें जंगल के रास्तों तथा आसपास के क्षेत्रों को जांच रही हैं।
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चूड़धार यात्रा में कई घंटे की करनी पड़ती है ट्रैकिंग
चूड़धार क्षेत्र धार्मिक और प्राकृतिक दृष्टि से काफी प्रसिद्ध है। यहां स्थित चूड़धार मंदिर में हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर तक पहुंचने के लिए यात्रियों को लंबे पैदल ट्रैक से होकर गुजरना पड़ता है। रास्ते में घना देवदार का जंगल, ऊंचाई और कठिन चढ़ाई यात्रियों की परीक्षा लेती है।
रास्ता भटकने का खतरा
चूड़धार जाने वाले कई रास्तों पर कुछ हिस्सों में स्पष्ट ट्रैक नहीं होने के कारण नए यात्रियों के लिए दिशा पहचानना मुश्किल हो सकता है। खासकर शाम के समय या मौसम खराब होने पर रास्ता भटकने का खतरा और बढ़ जाता है।
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प्रशासन की यात्रियों से सावधानी बरतने की अपील
चूड़धार ट्रैक पर जाने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों से लगातार सावधानी बरतने की अपील की जाती रही है। स्थानीय क्षेत्र से पूरी तरह परिचित व्यक्ति या गाइड के साथ यात्रा करने से रास्ता भटकने की संभावना कम हो जाती है। यात्रियों को शाम होने से पहले सुरक्षित स्थान तक पहुंचने की योजना बनानी चाहिए और अकेले जंगल की ओर जाने से बचना चाहिए।
देर रात कर टीमों के हाथ खाली
फिलहाल पुलिस और स्थानीय लोगों की टीम लापता साकेत और राहुल की तलाश में जुटी हुई है। दोनों श्रद्धालु जंगल में किस दिशा में गए, इसका पता लगाने के लिए उनके साथ लौटे तीनों साथियों से भी जानकारी ली जा रही है। देर रात तक दोनों का पता नहीं चल पाने के कारण सर्च ऑपरेशन को और व्यापक किए जाने की जरूरत महसूस हो रही है।
