रामपुर बुशहर: हिमाचल प्रदेश की सियासत में दशकों तक अपनी अलग पहचान बनाने वाले, विकास कार्यों और जनता से गहरे जुड़ाव के लिए पहचाने जाने वाले दिवंगत राजा वीरभद्र सिंह की स्मृतियां अब उनकी जन्मभूमि सराहन बुशहर में भी प्रतिमा के रूप में साकार होने जा रही हैं।

 

राजधानी शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान पर प्रतिमा स्थापित होने के बाद अब उनकी अपनी रियासत बुशहर के सराहन में भी उनकी प्रतिमा स्थापित की गई है। इसका अनावरण 18 अक्टूबर को किया जाएगा। यह आयोजन न केवल उनके समर्थकों के लिए भावनात्मक महत्व रखता है, बल्कि बुशहर क्षेत्र के इतिहास और वीरभद्र सिंह के साथ लोगों के जुड़ाव को भी नई पहचान देगा।

 

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बुशहर स्पोर्ट्स, कल्चरल एंड एनवायरनमेंट एसोसिएशन (बीएससीईए) की ओर से आयोजित इस समारोह में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की उम्मीद है। आयोजकों के अनुमान के अनुसार, कार्यक्रम में करीब 10 से 12 हजार लोग शामिल हो सकते हैं। समारोह को लेकर आयोजन समिति और प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। प्रतिमा अनावरण के साथ जनसभा भी होगी, जिसमें दिवंगत नेता के राजनीतिक सफर, जनसेवा और हिमाचल के विकास में उनके योगदान को याद किया जाएगा।

सराहन की धरती पर लौटेंगी राजा साहब की यादें

वीरभद्र सिंह का सराहन से रिश्ता केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि उनकी जन्मभूमि और बुशहर रियासत की विरासत से जुड़ा रहा है। 23 जून 1934 को सराहन में जन्मे वीरभद्र सिंह ने हिमाचल प्रदेश की राजनीति में लंबी पारी खेली। वह छह बार प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे और कई दशकों तक राज्य की राजनीति के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे। उनके समर्थक उन्हें विकास कार्यों, दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंच और आम लोगों के साथ सीधे संवाद के लिए याद करते हैं।

 

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अब सराहन में उनकी प्रतिमा का अनावरण उनके जीवन और विरासत से जुड़े इस ऐतिहासिक क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है। शिमला के रिज मैदान के बाद अपनी जन्मभूमि में प्रतिमा स्थापित होना उनके राजनीतिक और व्यक्तिगत सफर से जुड़ी स्मृतियों को संजोने की दिशा में अहम कदम है। बुशहर क्षेत्र के लोगों के लिए यह समारोह अपने उस नेता को श्रद्धांजलि देने का अवसर होगा, जिसने प्रदेश की राजनीति में लंबे समय तक प्रभावशाली भूमिका निभाई।

अष्टमी पर होगा प्रतिमा अनावरण

आयोजकों की ओर से जारी निमंत्रण के मुताबिक, 18 अक्टूबर को अष्टमी के अवसर पर सुबह 11:30 बजे प्रतिमा का अनावरण किया जाएगा। इसके बाद दोपहर 12 बजे जनसभा आयोजित होगी। दोपहर एक बजे समारोह में आने वाले लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था रखी गई है।

 

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बीएससीईए के अध्यक्ष राहुल सोनी ने लोगों से कार्यक्रम में शामिल होकर दिवंगत राजा वीरभद्र सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित करने की अपील की है। आयोजन में प्रदेश के कई राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों से जुड़े लोगों के पहुंचने की संभावना है। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, वह 18 अक्टूबर को सुबह 10 बजे रामपुर से रवाना होकर 11:30 बजे सराहन पहुंचेंगे और प्रतिमा अनावरण समारोह में भाग लेंगे। इसके बाद वह बिलासपुर के लिए रवाना होंगे। लोक निर्माण मंत्री सहित अन्य विशिष्ट अतिथियों के भी समारोह में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।

10 से 12 हजार लोगों के पहुंचने का अनुमान

समारोह में बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा, यातायात, पार्किंग और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं को लेकर तैयारियां की जा रही हैं। आयोजन स्थल पर व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन और आयोजकों के लिए अहम रहेगा, ताकि दूर-दराज से आने वाले लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो।

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इसी सिलसिले में एसडीएम रामपुर बुशहर हर्ष अमरेंद्र सिंह ने एसोसिएशन के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, एसडीएम 16 अक्टूबर को सराहन पहुंचकर आयोजन स्थल और संबंधित व्यवस्थाओं का निरीक्षण करेंगे। इस दौरान कार्यक्रम के संचालन और लोगों की सुविधा से जुड़े जरूरी इंतजामों का जायजा लिया जाएगा।

छह बार मुख्यमंत्री रहे, हिमाचल की राजनीति पर छोड़ी अमिट छाप

राजा वीरभद्र सिंह हिमाचल प्रदेश के उन नेताओं में गिने जाते हैं, जिनका राजनीतिक प्रभाव लंबे समय तक राज्य की राजनीति में बना रहा। छह बार मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने प्रदेश का नेतृत्व किया। उनके समर्थक उन्हें हिमाचल के विकास में योगदान देने वाले जननेता के तौर पर याद करते हैं। आम लोगों के बीच उनकी पहचान और बुशहर रियासत से उनका ऐतिहासिक जुड़ाव आज भी क्षेत्रीय राजनीति और जनभावनाओं में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

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8 जुलाई 2021 को उनके निधन के बाद भी उनकी राजनीतिक विरासत और उनसे जुड़ी यादें प्रदेश में चर्चा का विषय बनी रहती हैं। शिमला के रिज मैदान पर उनकी प्रतिमा स्थापित होने के बाद अब सराहन में प्रतिमा का अनावरण उनकी स्मृतियों को उनकी जन्मभूमि से जोड़ने वाला अवसर होगा।


18 अक्टूबर को होने वाला यह समारोह सिर्फ एक प्रतिमा के अनावरण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उस नेता को याद करने का मौका भी बनेगा, जिसने हिमाचल की राजनीति में कई दशकों तक अपनी भूमिका निभाई। सराहन में जुटने वाले लोग राजा वीरभद्र सिंह के जीवन, जनसेवा और बुशहर की विरासत से जुड़े उनके रिश्ते को श्रद्धांजलि के रूप में याद करेंगे।

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