शिमला। हिमाचल प्रदेश में इंसानियत, सेवा और जागरूकता की एक बेहद प्रेरणादायक मिसाल सामने आई है। जिसने समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि जीवन के बाद भी इंसान किस तरह दूसरों के काम आ सकता है।

बुजुर्ग ने किया देहदान

74 वर्षीय मदन गौतम ने अपने जीवन के अंतिम पड़ाव पर ऐसा निर्णय लिया- जो न केवल सराहनीय है बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक मजबूत संदेश छोड़ गया है।

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समाज के काम आएगा शरीर

उन्होंने अपने निधन के बाद अपनी देह IGMC को दान कर दी, ताकि मेडिकल के छात्र मानव शरीर की संरचना को गहराई से समझ सकें और बेहतर डॉक्टर बन सकें। उनके इस फैसले से यह साबित होता है कि सच्ची सेवा केवल जीवन तक सीमित नहीं होती, बल्कि मृत्यु के बाद भी समाज के हित में जारी रह सकती है।

परिवार ने IGMC को सौंपी देह

जानकारी के अनुसार, मदन गौतम ने यह फैसला कोई अचानक नहीं लिया था। उन्होंने वर्ष 2013 में ही देहदान के लिए अपना पंजीकरण करवा दिया था। जैसे ही उनका निधन हुआ, परिवार ने उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए उनके शरीर को आईजीएमसी को सौंप दिया।

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समाज सेवा के लिए रहते थे आगे

परिजनों के अनुसार, मदन गौतम हमेशा से ही समाज सेवा के कार्यों में आगे रहते थे। जरूरतमंदों की मदद करना उनकी आदत में शामिल था। वे मानते थे कि मृत्यु के बाद शरीर को पारंपरिक तरीके से समाप्त करने के बजाय अगर उसे चिकित्सा शिक्षा के लिए उपयोग में लाया जाए- तो यह समाज के लिए कहीं अधिक उपयोगी साबित हो सकता है।

सबके लिए प्रेरणा बने मदन गौतम

उनका यह विचार आज एक प्रेरणा बनकर सामने आया है। IGMC प्रशासन ने भी इस मानवीय कदम के लिए गौतम परिवार का आभार व्यक्त किया है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि ऐसे निर्णय मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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मरीजों को मिलता है लाभ

मेडिकल के ट्रेनी डॉक्टरों को वास्तविक मानव शरीर पर अध्ययन करने का मौका मिलता है, जिससे उनकी समझ और कौशल दोनों में सुधार होता है। इसका सीधा लाभ भविष्य में मरीजों को मिलता है।

11 लोग कर चुके हैं देहदान

अस्पताल के आंकड़ों के मुताबिक, अब तक IGMC में 11 लोग देहदान कर चुके हैं, जबकि 452 लोगों ने इसके लिए पंजीकरण कराया हुआ है। इसके लिए अस्पताल में एक विशेष देहदान समिति भी गठित की गई है, जहां कोई भी व्यक्ति स्वेच्छा से पंजीकरण करवा सकता है।

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हिमाचल में इंसानियत की मिसाल

मदन गौतम का यह कदम समाज में जागरूकता फैलाने का काम करेगा। यह उन लोगों के लिए एक संदेश है, जो जीवन के बाद भी कुछ सार्थक करना चाहते हैं। देहदान न केवल चिकित्सा क्षेत्र को मजबूती देता है, बल्कि यह मानवता की सबसे बड़ी सेवा के रूप में भी देखा जाता है।

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