सिरमौर। देवभूमि हिमाचल के सिरमौर जिले में आस्था, परंपरा और सामूहिक श्रद्धा का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। द्राबिल से पश्मी तक बोठा महासू महाराज की ऐतिहासिक यात्रा पूरे वैभव के साथ संपन्न हुई। यह यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि लोक परंपराओं और भावनाओं का जीवंत प्रतीक बनकर उभरी।

18 किलोमीटर की यात्रा

द्राबिल से पश्मी तक लगभग 18 किलोमीटर लंबे इस मार्ग को श्रद्धालुओं ने भक्ति के रंग में रंग दिया। खास बात यह रही कि अपने छोटे भाई चालदा महाराज से मिलने की प्रतीकात्मक भावना के चलते बोठा महाराज की यात्रा अपेक्षाकृत तेज गति से पूरी की गई। इसने पूरे माहौल में उत्सुकता और जोश को और बढ़ा दिया।

यह भी पढ़ें : हिमाचल : बाइक पर घर जा रहे थे पति-पत्नी, तेज रफ्तार टैंकर ने कुचला- टायर के नीचे आने से मौ*त

नंगे पांव यात्रा में शामिल हुए हजारों लोग

करीब 5000 श्रद्धालु नंगे पांव इस यात्रा में शामिल हुए, जो उनकी गहरी आस्था और समर्पण को दर्शाता है। वहीं, बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए वाहनों की भी विशेष व्यवस्था की गई थी, ताकि कोई भी इस पावन यात्रा से वंचित न रहे।

हर पड़ाव पर सेवा और व्यवस्था

पूरे यात्रा मार्ग में जगह-जगह जलपान, विश्राम और प्राथमिक सुविधाओं की व्यवस्था की गई थी। स्थानीय लोगों और समितियों ने मिलकर सेवा भाव से श्रद्धालुओं की देखभाल की। इससे यात्रा न केवल व्यवस्थित रही, बल्कि श्रद्धालुओं के लिए सुखद अनुभव भी बनी।

यह भी पढ़ें : बैसाखी पर सुक्खू सरकार का बड़ा तोहफा : राशन डिपुओं पर दालों के रेट घटाए, सरसों तेल भी सस्ता

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

उप मंडल अधिकारी शिलाई और पुलिस प्रशासन यात्रा के दौरान लगातार मुस्तैद रहे। सुरक्षा व्यवस्था इतनी सुदृढ़ रही कि 18 किलोमीटर लंबी इस भीड़भाड़ वाली यात्रा के बावजूद कहीं भी कोई अप्रिय घटना सामने नहीं आई। यह प्रशासन और स्थानीय सहयोग का बेहतरीन उदाहरण रहा।

लोक संस्कृति की गूंज

यात्रा के दौरान “जय महाराज” के उद्घोष और पारंपरिक लिंबर गान की मधुर ध्वनि पूरे वातावरण में गूंजती रही। यह दृश्य हिमाचल की समृद्ध लोक संस्कृति और धार्मिक परंपराओं की झलक पेश करता रहा।

यह भी पढ़ें : हिमाचल में नहीं थमेगी बारिश-बर्फबारी, 3 दिन बाद से फिर बदलेगा मौसम- आंधी का अलर्ट जारी

पश्मी में भव्य स्वागत और दर्शन

जैसे ही यात्रा पश्मी पहुंची, वहां महाराज का भव्य स्वागत किया गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर लगभग 15 हजार श्रद्धालुओं ने दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। स्थानीय लोगों के अनुसार, चालदा महाराज की प्रवास यात्रा के बाद यह सबसे बड़ी और ऐतिहासिक यात्रा मानी जा रही है।

आधी हनोल की परंपरा और बिशू मेला

द्राबिल के बोठा महाराज को ‘आधी हनोल’ के नाम से भी जाना जाता है, जो इस क्षेत्र की धार्मिक मान्यताओं में विशेष स्थान रखता है। महासू मंदिर समिति पश्मी के अनुसार, द्राबिल में 22 वर्षों बाद बिशू मेले का आयोजन होने जा रहा है। यह मेला 28 अप्रैल (15 गते बैशाख) को बागड़ी (NH-707) में आयोजित किया जाएगा, जिसकी तिथि चालदा महाराज द्वारा निर्धारित मानी जाती है।

यह भी पढ़ें : सलमान करता था हिमाचल में चिट्टा सप्लाई : मैकेनिक का काम कर बनाया था नेटवर्क- पकड़ा गया

सोशल मीडिया पर छाई आस्था की झलक

इस पूरी यात्रा के दृश्य सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हुए, जहां लोगों ने इसे आस्था और परंपरा का अनूठा संगम बताया। दूर-दराज के लोग भी इस आयोजन से जुड़ते नजर आए।

श्रद्धालुओं से विशेष अपील

मंदिर समिति ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में महाराज के दरबार में पहुंचकर आशीर्वाद लें और इस पावन आयोजन को जन-जन तक पहुंचाएं।

नोट : ऐसी ही तेज़, सटीक और ज़मीनी खबरों से जुड़े रहने के लिए इस लिंक पर क्लिक कर हमारे फेसबुक पेज को फॉलो करें