नाहन। हिमाचल प्रदेश में ऑनलाइन शॉपिंग करना एक युवती को इतना भारी पड़ गया कि सामान खरीदने के लिए शुरू हुई बातचीत साइबर ठगी के बड़े मामले में बदल गई। इंस्टाग्राम पर शॉपिंग पेज देखकर सामान मंगवाने की कोशिश कर रही युवती को क्या पता था कि कुछ ही दिनों बाद उसे कस्टम विभाग, पुलिस और सीबीआई के नाम पर डराकर लाखों रुपये ऐंठ लिए जाएंगे।
शातिरों ने कभी खुद को पुलिस अधिकारी बताया तो कभी सीबीआई का अफसर बनकर कार्रवाई और गिरफ्तारी की धमकी दी। लगातार फोन कॉल और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर आरोपियों ने युवती के बैंक खाते से कुल 5 लाख 64 हजार रुपये की कथित ठगी कर ली। मामला सिरमौर जिले के पच्छाद क्षेत्र का है, जहां पुलिस ने शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
इंस्टाग्राम पर शॉपिंग पेज देखकर किया संपर्क
मामले में शिकायतकर्ता भावना शर्मा पुत्री देवेंद्र शर्मा निवासी गांव एवं डाकघर सराहां, तहसील पच्छाद ने पुलिस को बताया कि उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक शॉपिंग पेज देखा था। इस पेज के माध्यम से सामान खरीदने का निर्णय लेने के बाद उन्होंने पेज संचालक से बातचीत की। बातचीत के दौरान उन्हें सामान भेजने का आश्वासन दिया गया। शुरुआत में मामला सामान्य ऑनलाइन खरीदारी जैसा ही नजर आया, लेकिन कुछ दिनों बाद एक फोन कॉल ने पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया।
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कस्टम विभाग के नाम पर शुरू हुआ डराने और पैसे ऐंठने का खेल
शिकायत के अनुसार कुछ दिनों बाद महिला के पास फोन आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने दावा किया कि उनका सामान कस्टम विभाग ने पकड़ लिया है और उसे छुड़ाने के लिए जुर्माना भरना पड़ेगा। इसके बाद महिला पर पैसे जमा करवाने का दबाव बनाया जाने लगा। आरोप है कि रकम नहीं देने पर मुकदमा दर्ज करवाने और सीबीआई के माध्यम से गिरफ्तार करवाने जैसी धमकियां भी दी गईं।
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इस तरह ऑनलाइन शॉपिंग से शुरू हुआ मामला धीरे-धीरे कथित साइबर ठगी में बदल गया। सामान मिलने के बजाय महिला को लगातार कानूनी कार्रवाई का डर दिखाया जाने लगा और इसी डर का फायदा उठाकर उससे पैसे ऐंठे गए।
कभी पुलिस तो कभी CBI अधिकारी बन किया फोन
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि महिला को अलग-अलग मोबाइल नंबरों से दिन-रात लगातार फोन कॉल किए जाते थे। फोन करने वाले लोग कथित तौर पर स्वयं को पुलिस और सीबीआई विभाग का अधिकारी बताते थे। इतना ही नहीं, शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने अपनी सोशल मीडिया प्रोफाइल पर सीबीआई और पुलिस अधिकारियों की तस्वीरें भी लगा रखी थीं, ताकि उनकी पहचान पर भरोसा किया जा सके और महिला को डराकर उनकी बात मानने के लिए मजबूर किया जा सके।
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फर्जी अधिकारी बनकर धमकाने का यह तरीका साइबर ठगी के उन तरीकों से मिलता-जुलता है, जिनमें अपराधी सरकारी एजेंसियों का नाम लेकर लोगों को गिरफ्तारी, जांच या कानूनी कार्रवाई का डर दिखाते हैं। हालांकि, इस मामले में आरोपियों की वास्तविक पहचान और ठगी के पूरे तरीके की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।
महिला को लगा 5.64 लाख रुपये का चूना
लगातार फोन कॉल, धमकियों और कथित अधिकारियों के दबाव के बीच महिला से कुल 5,64,000 रुपये की धोखाधड़ी किए जाने की शिकायत सामने आई है। ऑनलाइन सामान खरीदने के लिए शुरू हुई प्रक्रिया आखिरकार महिला को लाखों रुपये के कथित आर्थिक नुकसान तक ले गई। मामले में साइबर अपराध की शिकायत दर्ज करवाने के बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू की है।
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यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि सोशल मीडिया पर मौजूद हर शॉपिंग पेज भरोसेमंद नहीं होता। वहीं, कस्टम विभाग, पुलिस या सीबीआई के नाम पर फोन करने वाले किसी भी व्यक्ति की पहचान की पुष्टि किए बिना पैसे देना लोगों के लिए भारी नुकसान का कारण बन सकता है।
साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर की शिकायत
पुलिस के अनुसार, इस मामले में साइबर क्राइम पुलिस थाना, सीआईडी शिमला से ऑनलाइन सीसीटीएनएस एप्लीकेशन के माध्यम से जीरो एफआईआर प्राप्त हुई थी। शिकायतकर्ता ने साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर अपनी शिकायत दर्ज करवाई थी। इसके बाद मामले में पुलिस थाना पच्छाद में केस दर्ज किया गया। एसपी सिरमौर एनएस नेगी ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस थाना पच्छाद में केस दर्ज कर लिया गया है और आगामी जांच जारी है। पुलिस शिकायत में लगाए गए आरोपों के आधार पर मामले की जांच कर रही है।
