कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले से बाप-बेटी के रिश्ते को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां 10 साल की जुड़वां बहनों के साथ कथित दुष्कर्म के मामले में उनके सगे पिता को गिरफ्तार किया गया है।

जुड़वा बहनों के साथ पिता ने किया दुष्कर्म

मामले में हैरान कर देने वाली बात ये है कि बच्चियों की मां ने मामले को दबाने की कोशिश की। इतना ही नहीं पुलिस पर भी आरोप है कि पुलिस ने मामले में कड़ी कार्रवाई नहीं की और मामले को कई दिन दबाए रखा। मगर एक NGO ने इस मामले को उठाया और सच्चाई सबके सामने लाई।

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दोनों बहनों का क्या है हाल?

वर्तमान में दोनों बच्चियों की मौजूदा स्थिति अलग-अलग है। एक बच्ची की तबीयत बिगड़ने के कारण उसे धर्मशाला के जोनल अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। दूसरी को सकोह स्थित महिला एवं बाल विकास विभाग के ओपन शेल्टर में रखा गया है।

मां के साथ रहना चाहती हैं बच्चियां

जानकारी के अनुसार, कथित यौन शोषण के मामले के सामने आने के बाद दोनों बच्चियों को सुरक्षा और देखभाल के लिहाज से अलग-अलग स्थानों पर रखा गया है। एक बच्ची अस्पताल में उपचाराधीन है। दूसरी बच्ची ओपन शेल्टर में रह रही है। इस बीच दोनों की इच्छा अपनी मां के पास लौटने की है।

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कैसे शुरू हुई कार्रवाई?

बताया जा रहा है कि मामले की जानकारी मिलने के बाद शिमला की उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. अजय श्रीवास्तव ने कांगड़ा के पुलिस अधीक्षक से संपर्क किया। संस्था ने पुलिस की शुरुआती कार्रवाई और मामले में लगाई गई धाराओं पर सवाल उठाए।

उमंग फाउंडेशन को पता चली सच्चाई

जानकारी के मुताबिक, 3 अक्टूबर को कथित घटना के बाद मामला चाइल्ड लाइन के माध्यम से पुलिस तक पहुंचा और 7 अक्टूबर को धर्मशाला महिला थाना में केस दर्ज हुआ। 3 अक्टूबर को एक वीडियों की सच्चाई उमंग फाउंडेशन को पता चली।

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आरोपी को किया गिरफ्तार

प्रो. श्रीवास्तव ने 9 अक्टूबर को राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष अनीता ठाकुर से संपर्क कर मामले में हस्तक्षेप की मांग की। इसके बाद 14 अक्टूबर को आयोग की अध्यक्ष ने पुलिस अधीक्षक से बात की। उसी दिन उमंग फाउंडेशन ने राज्य पुलिस महानिदेशक से भी संपर्क किया। संस्था के अनुसार, वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद कार्रवाई आगे बढ़ी और आरोपी (प्रवासी मजदूर) को गिरफ्तार किया गया।

अब बच्चियों की सुरक्षा सबसे अहम

इस मामले में परिवार और समुदाय के कुछ लोगों के साथ-साथ पुलिस पर भी शिकायत दबाने तथा बच्चियों को बयान से पीछे हटने के लिए कथित तौर पर दबाव डालने के आरोप हैं। इन आरोपों की जांच होना जरूरी है। आरोपी की गिरफ्तारी के बाद अब दोनों बच्चियों को उचित उपचार, मानसिक सहयोग और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध करवाना प्राथमिकता है।

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