मंडी। हिमाचल प्रदेश में साइबर ठगी का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगों ने एक भारतीय सेना के पूर्व सैनिक से करीब 98 लाख रुपये की ठगी हुई है।
सैनिक से 98 लाख की ठगी
पीड़ित बिलासपुर जिले का रहने वाला है और भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हो चुका है। शिकायतकर्ता के अनुसार, उसे अज्ञात नंबरों से लगातार कॉल और वीडियो कॉल आने लगे। कॉल करने वाले खुद को कभी दूरसंचार विभाग, कभी CBI, कभी RBI और कभी न्यायालय का अधिकारी बताते रहे।
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ठगों ने जाल में फंसाया
ठगों ने पीड़ित को बताया कि उसके नाम पर एक फर्जी सिम कार्ड जारी हुआ है, जिसका इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर अपराध में किया गया है। इसी आधार पर उसे इस मामले में संलिप्त बताते हुए कानूनी कार्रवाई की धमकी दी गई।
“डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर मानसिक बंधक
ठगों ने पीड़ित पर मनी लॉन्ड्रिंग का झूठा आरोप लगाकर उसे तथाकथित डिजिटल अरेस्ट में रखा। उसे स्पष्ट निर्देश दिए गए कि वह न तो घर से बाहर निकले और न ही किसी से इस बारे में बात करे। ऐसा करने पर तत्काल गिरफ्तारी और लंबी सजा की धमकी दी गई।
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यूनिमफॉर्म लोगों के साथ फर्जी वीडियो कॉल
इस दौरान ठगों ने यूनिफॉर्म पहने लोगों के साथ फर्जी वीडियो कॉल की, जिनमें सरकारी दफ्तर जैसा माहौल दिखाया गया। यही नहीं, पीड़ित को एक फर्जी अदालत की कार्यवाही भी दिखाई गई, जिससे वह पूरी तरह डर और भ्रम की स्थिति में चला गया।
फर्जी कोर्ट हियरिंग और गिरफ्तारी वारंट
15 दिसंबर से 30 दिसंबर तक पीड़ित को लगातार फोन और वीडियो कॉल के जरिए मानसिक दबाव में रखा गया। इस दौरान उसे कथित गिरफ्तारी वारंट दिखाया गया और कहा गया कि अगर उसने किसी को भी इस मामले की जानकारी दी, तो वह कभी इस केस से बाहर नहीं निकल पाएगा और उसे 5 से 7 साल तक की सजा हो सकती है।
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अलग-अलग खातों में डलवाई रकम
इसके बाद एक फर्जी वीडियो कॉल के माध्यम से तथाकथित कोर्ट हियरिंग करवाई गई, जिसमें एक व्यक्ति ने खुद को न्यायाधीश बताते हुए पीड़ित की संपत्ति और बैंक में जमा धनराशि को “कोर्ट में जमा” करने का आदेश दिया। ठगों के जाल में फंसे पीड़ित ने उनके बताए गए अलग-अलग बैंक खातों में अपनी जीवनभर की कमाई जमा करवा दी।
98 लाख रुपये की ठगी
इस तरह कुल मिलाकर लगभग 98 लाख रुपये की ठगी को अंजाम दिया गया। इतना ही नहीं, ठगों ने पीड़ित से उसके मोबाइल फोन से संबंधित कॉल रिकॉर्ड, मैसेज और अन्य डिजिटल सबूत भी जबरन डिलीट करवा दिए, ताकि उनके खिलाफ कोई साक्ष्य न बच सके।
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साइबर पुलिस में मामला दर्ज, जांच जारी
इस गंभीर मामले को लेकर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन मध्य खंड मंडी में प्राथमिकी दर्ज की गई है। साइबर पुलिस अब बैंक खातों, कॉल डिटेल और डिजिटल ट्रेल के आधार पर ठगों तक पहुंचने के प्रयास कर रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामला बेहद संगठित साइबर गिरोह से जुड़ा हो सकता है।
साइबर पुलिस की जनता से अपील
साइबर पुलिस अधीक्षक रोहित मालपानी ने आम जनता से अपील की है कि इस तरह के फोन कॉल, वीडियो कॉल या व्हाट्सएप संदेशों से बेहद सतर्क रहें। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल के जरिए गिरफ्तारी, जांच या पैसे जमा कराने की मांग नहीं करती।
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जनता से पुलिस की अपील
उन्होंने लोगों से आग्रह किया है कि-
- किसी भी परिस्थिति में बैंक खाता विवरण, ओटीपी या व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें।
- डिजिटल अरेस्ट जैसी किसी भी बात पर विश्वास न करें।
- किसी भी संदिग्ध कॉल या संदेश की तुरंत सूचना नजदीकी पुलिस थाना या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर दें।
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कैसे होती है ठगी?
इस ठगी की शुरुआत आमतौर पर एक डराने वाले फोन कॉल से होती है। ठग कहते हैं कि आपके नाम पर फर्जी सिम या बैंक अकाउंट खुला है, या कोई संदिग्ध पार्सल पकड़ा गया है। फिर आपको बताया जाता है
लोगों की मेहनत की कमाई...
कि आप “डिजिटल अरेस्ट” हो चुके हैं।
इसके बाद यूनिफॉर्म पहने फर्जी अधिकारी, नकली दफ्तर और फर्जी अदालत की सुनवाई दिखाई जाती है। डर और दबाव के चलते पीड़ित उनके बताए खातों में पैसे ट्रांसफर कर देता है। कई दिनों तक उसे फोन पर मानसिक रूप से बंधक बनाकर रखा जाता है। यही पूरा खेल है, जिसमें डर को हथियार बनाकर लोगों की मेहनत की कमाई लूटी जाती है।
