#अपराध
January 9, 2026
धर्मशाला छात्रा मामले में अपडेट: बड़े डॉक्टर करेंगे केस को स्टडी, नए खुलासों की उम्मीद
फैक्ट फाइंडिंग कमेटियों की जांच भी पूरी
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कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के बहुचर्चित धर्मशाला छात्रा मौत मामला अब पूरे प्रदेश की शैक्षणिक व्यवस्था, कॉलेज कल्चर और छात्राओं की सुरक्षा पर बड़ा सवाल बन चुका है। रैगिंग और उत्पीड़न के आरोपों के बीच उलझे इस केस में अब प्रशासन ने जांच को निर्णायक मोड़ देने की तैयारी कर ली है। छात्रा की मौत के वास्तविक कारणों तक पहुंचने के लिए विशेष मेडिकल बोर्ड का गठन कर दिया गया है, जो उसकी पूरी मेडिकल हिस्ट्री और इलाज प्रक्रिया की वैज्ञानिक जांच करेगा।
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने 5 सदस्यीय विशेष मेडिकल टीम बोर्ड बनाया है, जो आज यानी शुक्रवार से अपना काम शुरू करेगा। इस मामले में बोर्ड छात्रा के स्वास्थ्य से जुड़े हर दस्तावेज, इलाज के टाइमलाइन और मेडिकल इंटरवेंशन की परत-दर-परत जांच करेगा। आने वाले समय में अगर जरूरत पड़ी तो बोर्ड में और विशेषज्ञों को भी जोड़ा जा सकता है।
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फिलहाल इस मेडिकल बोर्ड में डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल टांडा के वरिष्ठ डॉक्टरों को शामिल किया गया है। ये विशेषज्ञ छात्रा की बीमारी, दवाइयों, अस्पतालों में हुए इलाज और उसकी शारीरिक स्थिति से जुड़े सभी पहलुओं का मूल्यांकन करेंगे। प्रशासन के मुताबिक 12 जनवरी तक एम्स बिलासपुर के विशेषज्ञ डॉक्टर भी इस जांच प्रक्रिया से जुड़ जाएंगे, जिससे मेडिकल राय और ज्यादा मजबूत हो सके।
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सूत्रों की माने तो मेडिकल बोर्ड अपनी रिपोर्ट करीब एक हफ्टे के अंदर सौंप सकता है। हालांकि जांच की जटिलता को देखते हुए इसमें अधिक समय भी लग सकता है। पुलिस ने छात्रा के इलाज से जुड़े सभी मेडिकल रिकॉर्ड, अस्पताल की फाइलें और जरूरी दस्तावेज बोर्ड को सौंप दिए हैं, ताकि समय रहते सही जांच हो सके और कोई भी तथ्य न छूट पाए
इस केस में UGC द्वारा गठित पांच सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमेटी अपनी जांच पूरी कर चुकी है और वीरवार को धर्मशाला से लौट गई। वहीं उच्च शिक्षा निदेशालय की फैक्ट फाइंडिंग टीम ने भी देर शाम तक अपनी पड़ताल जारी रखी। गौरतलब है कि छात्रा की मौत के बाद 1 जनवरी को धर्मशाला सरकारी कॉलेज की तीन छात्राओं पर रैगिंग का मामला दर्ज किया गया था। इसके अलावा एक प्रोफेसर पर यौन उत्पीड़न का केस भी दर्ज हो चुका है।
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इस घटना के बाद पूरे हिमाचल में कॉलेज परिसरों में रैगिंग, मानसिक उत्पीड़न और छात्राओं की सुरक्षा को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और वैज्ञानिक तरीके से आगे बढ़ाई जा रही है। डीआईजी नॉर्थन रेंज सौम्या सांबशिवन ने बताया कि मेडिकल बोर्ड को छात्रा के इलाज से जुड़े सभी रिकॉर्ड सौंप दिए गए हैं और जल्द ही एम्स बिलासपुर के विशेषज्ञ भी जांच में शामिल होंगे। मेडिकल बोर्ड और फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के असली कारणों पर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।