शिमला। हिमाचल प्रदेश में नशे के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच राजधानी शिमला से सामने आया LSD तस्करी का बड़ा मामला कई परतें खोलता नजर आ रहा है। अब इस मामले ने नया मोड़ ले लिया है।

LSD मामले में बड़े खुलासे

करीब एक करोड़ रुपये की अंतरराष्ट्रीय कीमत वाली इस खेप की बरामदगी ने न केवल ड्रग नेटवर्क की गहराई उजागर की है। बल्कि पुलिस व्यवस्था, खासकर स्पेशल टास्क फोर्स STF की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

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4 STF कर्मियों पर गिरी गाज

मामले में चार पुलिस कर्मियों को निलंबित कर गिरफ्तार किया गया है। इनमें हेड कांस्टेबल राजेश कुमार, समीर कुमार, HHC नितेश कुमार और कांस्टेबल अशोक कुमार शामिल हैं। ये सभी उस दौरान कुल्लू में तैनात थे, जब ड्रग्स की यह खेप वहां पहुंची थी। जांच एजेंसियों को शक है कि उस समय समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, जिससे तस्कर आगे बढ़ने में सफल रहे।

कुल्लू से शिमला तक कैसे पहुंची खेप?

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी पहले कुल्लू में LSD लेकर पहुंचे थे। वहां इस खेप को बेचने की योजना थी, लेकिन किसी कारणवश यह संभव नहीं हो पाया। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब इतनी बड़ी मात्रा में ड्रग्स वहां पहुंची, तो स्थानीय स्तर पर कोई सख्त कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

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कहां चूक गई पुलिस टीम?

इसी चूक ने अब पुलिस के भीतर संभावित लापरवाही या मिलीभगत की आशंका को जन्म दिया है। इसके बाद आरोपी शिमला पहुंचे और बीसीएस इलाके में ठहरे, जहां से आगे सप्लाई की तैयारी थी।

लड़का-लड़की हुए गिरफ्तार

बता दें कि बीती 10 मार्च को शिमला पुलिस की स्पेशल सेल ने गुप्त सूचना के आधार पर बीसीएस क्षेत्र में दबिश दी। यहां से संदीप शर्मा और प्रिया शर्मा को गिरफ्तार किया गया।

 

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एक करोड़ की LSD बरामद

तलाशी के दौरान उनके पास से 562 स्ट्रिप (करीब 11.570 ग्राम) LSD बरामद हुई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत लगभग एक करोड़ रुपये आंकी गई है, जो इस मामले की गंभीरता को और बढ़ाती है

बड़े नेटवर्क का खुलासा

जांच को आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने गुरुग्राम से केरल निवासी नविल हेरिसन को गिरफ्तार किया, जिसे इस पूरे नेटवर्क का मुख्य सप्लायर बताया जा रहा है। शुरुआती पूछताछ में सामने आया है कि यह नेटवर्क केवल हिमाचल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार गोवा, दिल्ली और अन्य राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं।

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तस्करी का तरीका भी चौंकाने वाला

इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात तस्करी का तरीका रहा। एलएसडी को किताबों के भीतर बेहद चालाकी से छिपाकर शिमला तक पहुंचाया गया। चूंकि LSD आमतौर पर ब्लॉटिंग पेपर के रूप में होती है, इसलिए इसे छिपाना अपेक्षाकृत आसान होता है और इसी का फायदा तस्करों ने उठाया। बताया जा रहा है कि LSD की एक स्ट्रिप की कीमत 10 हजार रुपये से अधिक होती है, जिससे इस धंधे की आर्थिक सच्चाई भी सामने आती है।

जांच के घेरे में दो बड़े सवाल

फिलहाल, पुलिस और CID की जांच दो अहम बिंदुओं पर केंद्रित है-

  • क्या यह पूरा मामला बाहरी राज्यों के नेटवर्क का ही हिस्सा है या इसमें स्थानीय स्तर पर भी सहयोग मिला।
  • क्या निलंबित पुलिस कर्मियों की भूमिका महज लापरवाही तक सीमित है या इसमें किसी प्रकार की मिलीभगत भी शामिल रही है।

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अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल मामले को लापरवाही के दृष्टिकोण से देखा जा रहा है। मगर जांच अभी शुरुआती चरण में है और आगे और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।

क्या है LSD?

LSD एक बेहद शक्तिशाली सिंथेटिक हैलुसिनोजेनिक ड्रग है- जो दिमाग के सेरोटोनिन रिसेप्टर्स को प्रभावित करती है। इसके सेवन से व्यक्ति की सोच, भावनाएं और वास्तविकता की समझ पूरी तरह बदल सकती है। यही कारण है कि इसे अत्यंत खतरनाक और अवैध श्रेणी में रखा गया है।

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