#अपराध
March 19, 2026
हिमाचल : पुलिस वाले ही निकले नशा तस्कर...LSD मामले में चार निलंबित, जांच में हुए कई बड़े खुलासे
पुलिस जांच में हुआ चौंकाने वाले खुलासे कई राज्यों में फैला रखा था नशे का जाल
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शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में सामने आए करीब एक करोड़ रुपये के LSD तस्करी मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। शुरुआती गिरफ्तारी के बाद चल रही जांच में ऐसे संकेत मिले हैं- जिनसे कानून व्यवस्था से जुड़े तंत्र पर ही सवाल खड़े होने लगे हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए CID ने स्पेशल टास्क फोर्स STF के चार पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया है। जिससे अब यह प्रकरण और अधिक संवेदनशील बन गया है।
सूत्रों के मुताबिक, निलंबित किए गए कर्मचारियों में दो हेड कांस्टेबल और दो कांस्टेबल शामिल हैं, जो कुल्लू में तैनात थे। जांच एजेंसियां फिलहाल खुलकर यह नहीं बता रही हैं कि इनकी भूमिका सीधे तौर पर संलिप्तता की है या फिर यह लापरवाही का मामला है। मगर शुरुआती जांच में इनके कनेक्शन संदिग्ध पाए गए हैं।
इसी कारण एहतियातन यह कार्रवाई की गई है, ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जा सके। पूरे मामले की कड़ियां कुल्लू से जुड़ती नजर आ रही हैं। जांच में सामने आया है कि आरोपी सबसे पहले LSD की खेप लेकर कुल्लू पहुंचे थे, जहां इसे बेचने की योजना थी।
संयोग से जिन पुलिस कर्मियों को निलंबित किया गया है, उनकी तैनाती भी उसी क्षेत्र में थी। इसके बाद आरोपी शिमला की ओर बढ़े और शहर के बीसीएस इलाके में एक कमरे में ठहर गए।
इसी बीच शिमला पुलिस की स्पेशल सेल को गुप्त सूचना मिली, जिसके आधार पर टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उक्त कमरे में दबिश दी। तलाशी के दौरान वहां से संदीप शर्मा और प्रिया शर्मा को गिरफ्तार किया गया।

उनके कब्जे से 562 स्ट्रिप LSD बरामद हुई, जिसका कुल वजन करीब 11.570 ग्राम बताया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस मात्रा की कीमत लाखों से लेकर एक करोड़ रुपये तक आंकी जा रही है।
मामले की जांच आगे बढ़ी तो इसके तार राज्य से बाहर तक जुड़े पाए गए। पुलिस ने हरियाणा के गुरुग्राम से केरल के कालीकट निवासी नविएल हैरिसन को गिरफ्तार किया। जांच एजेंसियों का कहना है कि संदीप शर्मा और नविएल के बीच लंबे समय से संपर्क था और दोनों मिलकर LSD तस्करी के नेटवर्क को चला रहे थे। इस गिरोह के अन्य संभावित सदस्यों और सप्लाई चैन की भी गहन जांच की जा रही है।
फिलहाल, इस केस में शिमला पुलिस और CID अलग-अलग स्तर पर जांच को आगे बढ़ा रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि हर पहलू की बारीकी से जांच की जा रही है, चाहे वह पुलिस विभाग के अंदर की भूमिका हो या अंतरराज्यीय तस्करी का नेटवर्क।
यह मामला इसलिए भी बेहद अहम हो गया है, क्योंकि इसमें पहली बार जांच के दायरे में कानून लागू करने वाली एजेंसी के ही कुछ सदस्य आ गए हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में जांच के और भी चौंकाने वाले खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
प्रदेश में बढ़ती नशा तस्करी के बीच यह घटना एक गंभीर चेतावनी के रूप में देखी जा रही है। सरकार और पुलिस विभाग पर अब यह दबाव है कि न केवल बाहरी नेटवर्क को तोड़ा जाए, बल्कि सिस्टम के भीतर अगर कोई कमजोरी या मिलीभगत है, तो उसे भी सख्ती से खत्म किया जाए।
LSD यानी लाइसरजिक एसिड डाइएथाइलामाइड एक सिंथेटिक साइकेडेलिक ड्रग है, जो सीधे दिमाग और नर्वस सिस्टम पर असर करती है। इसे पहली बार 1938 में स्विट्ज़रलैंड के वैज्ञानिक Albert Hofmann ने विकसित किया था। आमतौर पर LSD को छोटे कागज़ के टुकड़ों (ब्लॉटिंग पेपर), माइक्रोडॉट या तरल बूंद के रूप में लिया जाता है। जो छोटे कागज़ के टुकड़े होते हैं, उन्हें LSD स्ट्रिप या टैब कहा जाता है।
इस ड्रग के सेवन के बाद व्यक्ति को भ्रम (Hallucinations) होने लगते हैं। कई बार चीजें वास्तविकता से अलग दिखाई देने लगती हैं, रंग ज्यादा चमकीले लगते हैं और आवाजों का एहसास भी अलग महसूस होता है। समय का अनुभव भी असामान्य हो सकता है। हालांकि कई बार इसका असर बेहद खतरनाक भी हो सकता है। इसे लेने वाले व्यक्ति को डर, घबराहट, मानसिक अस्थिरता और आत्मघाती विचार तक आ सकते हैं। इसी वजह से इसे बेहद खतरनाक नशीला पदार्थ माना जाता है।