#अपराध
July 31, 2026
हिमाचल: फर्जी प्रमाणपत्र से हथिया ली सरकारी नौकरी! विजिलेंस के राडार पर 4 शिक्षक; गिर सकती है गाज
विजिलेंस ने शुरू की जांच, फर्जी EWS प्रमाणपत्र से नौकरी हथियाने का आरोप
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मंडी। हिमाचल प्रदेश में सरकारी नौकरी हासिल करने के लिए कुछ लोग नियमों को ताक पर रखकर गलत रास्ता अपनाने से भी पीछे नहीं हट रहे हैं। ऐसा ही एक सनसनीखेज मामला मंडी जिले से सामने आया है, जहां चार शिक्षकों पर फर्जी प्रमाणपत्र के जरिए सरकारी नौकरी हासिल करने का आरोप लगा है। विजिलेंस ने मामले की जांच तेज कर दी है। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो चारों शिक्षकों की नौकरी पर तलवार लटक सकती है। इतना ही नहीं, अब तक सरकारी खजाने से मिली लाखों रुपये की सैलरी की रिकवरी और आपराधिक कार्रवाई का भी सामना करना पड़ सकता है।
यह मामला वर्ष 2022 की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है, जिसके तहत चयनित चार अभ्यर्थियों को वर्ष 2024 में टीजीटी मेडिकल शिक्षक के पद पर नियुक्ति मिली थी। शिकायत मिलने के बाद अब इस भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठ गए हैं। आरोप है कि जिन अभ्यर्थियों ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग का लाभ लेकर नौकरी हासिल की, वे वास्तव में इस श्रेणी की पात्रता ही पूरी नहीं करते थे।
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मामले की गंभीरता को देखते हुए विजिलेंस की टीम ने चारों आरोपित शिक्षकों को मंडी कार्यालय बुलाकर लंबी पूछताछ की। जांच के दौरान उनके आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS)
प्रमाणपत्रों से जुड़े दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड अपने कब्जे में लिए गए हैं। अब इन दस्तावेजों का बारीकी से परीक्षण किया जा रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि प्रमाणपत्र सही आधार पर बनाए गए थे या गलत जानकारी देकर हासिल किए गए।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि संपन्न परिवारों से जुड़े होने के बावजूद इन अभ्यर्थियों ने गलत तथ्यों के आधार पर EWS प्रमाणपत्र बनवाए और उसी के सहारे सरकारी नौकरी प्राप्त कर ली। यदि जांच में यह आरोप सही साबित होते हैं तो माना जाएगा कि इनकी नियुक्ति के कारण वास्तविक पात्र और जरूरतमंद अभ्यर्थियों का अधिकार छिन गया।
जांच में फर्जीवाड़ा साबित होने की स्थिति में चारों शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा सकती है। इसके साथ ही उनकी सरकारी नौकरी समाप्त होने की संभावना भी है। सूत्रों के अनुसार, यदि नियुक्ति फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हासिल की गई पाई जाती है तो अब तक प्राप्त वेतन और अन्य सरकारी लाभों की रिकवरी की कार्रवाई भी की जा सकती है। ऐसे मामलों में संबंधित कर्मचारियों को आपराधिक मुकदमे का भी सामना करना पड़ सकता है।
विजिलेंस केवल शिक्षा विभाग तक ही सीमित नहीं है। पुलिस सहित विभिन्न सरकारी विभागों में EWS और अन्य आरक्षित श्रेणियों के तहत हुई नियुक्तियों के दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी सरकारी नौकरी में फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर नियुक्ति न हुई हो।
इसी तरह के एक अन्य मामले में फर्जी EWS प्रमाणपत्र के आधार पर आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी की नौकरी हासिल करने वाले चार डॉक्टर भी विजिलेंस की कार्रवाई के दायरे में हैं। इस मामले में एक डॉक्टर की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी है, जबकि अन्य तीन के खिलाफ जांच अंतिम चरण में है। विजिलेंस उनके विरुद्ध जल्द चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी कर रही है।