शिमला। हिमाचल प्रदेश में इन दिनों फर्जीवाड़े के मामले बढ़ते हुए रिपोर्ट किए जा रहे हैं। इन मामलों में सरकारी विभाग, निगम भी अछूते नहीं रह रहे हैं। ताजा मामला प्रदेश की राजधानी शिमला से सामने आया है, जहां शहर में गरीब परिवारों के लिए बनाए गए आवास योजना में शिमला नगर की महिला कर्मचारी ने ही फर्जीवाड़े को अंजाम दिया है।

गलत तरीके से बीपीएल प्रमाणपत्र बनवाया

प्राप्त जानकारी के अनुसार, नगर निगम शिमला की आंतरिक जांच में यह सामने आया कि एक महिला कर्मचारी ने गलत तरीके से बीपीएल प्रमाणपत्र बनवाकर आशियाना-2 ढली परियोजना के तहत मकान हासिल कर लिया।

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नगर निगम की ओर से इस मामले की शिकायत ढली थाना पुलिस को सौंपी गई, जिसके बाद पुलिस ने आरोपी संतोष कुमारी के खिलाफ आईपीसी की धारा 420 के तहत धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है।

नियमों को ताक पर रखकर बना सर्टिफिकेट

निगम का कहना है कि, महिला सरकारी नौकरी में होने के बावजूद बीपीएल परिवार होने का दावा कर मकान पाने में सफल रही। विभाग की जांच में दोषी पाए जाने पर उसे मकान खाली करने का नोटिस भी दिया गया था, लेकिन उसने आदेशों का पालन नहीं किया।

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अब पुलिस यह भी जांच कर रही है कि बीपीएल प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में गड़बड़ी कैसे हुई। आमतौर पर यह प्रमाणपत्र 35 हजार रुपए आय सीमा तय करने के बाद, पटवारी और तहसीलदार के सत्यापन पर ही बनता है। ऐसे में यह देखना होगा कि नियमों को ताक पर रखकर यह प्रमाणपत्र महिला को किस तरह से जारी हुआ।

केंद्र सरकार की आशियाना-2 योजना

गौरतलब है कि, केंद्र सरकार की आशियाना-2 योजना के तहत शिमला के ढली क्षेत्र में 2016 से 2020 के बीच गरीब परिवारों के लिए करीब 90 पक्के मकान बनाए गए थे। इन घरों के लिए उन परिवारों से आवेदन मंगवाए गए थे जिनके पास न अपनी जमीन है और न ही घर। लेकिन समय-समय पर इस योजना में धांधली की शिकायतें मिलती रही हैं कि प्रभावशाली लोग फर्जी दस्तावेजों के सहारे आवास पर कब्जा कर रहे हैं।

नगर निगम ने दी सफाई

नगर निगम ने साफ कर दिया है कि गरीबों का हक छीना नहीं जाएगा और ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस की जांच आगे बढ़ने के साथ यह भी स्पष्ट होगा कि इस गड़बड़ी में और कौन-कौन जिम्मेदार है।

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