शिमला/बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश से एक ऐसा मामला सामने आया हैए जिसने न सिर्फ रिश्तों को तार.तार कर दियाए बल्कि इंसानियत को भी झकझोर कर रख दिया। बिलासपुर जिले में एक नाबालिग लड़की ने एक युवक पर घर में घुसकर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था। आरोप था कि घटना के बाद वह गर्भवती हुई और उसने एक बच्चे को जन्म दिया।
हालांकि, जब इस मामले में वैज्ञानिक जांच हुई और डीएनए सैंपल की रिपोर्ट सामने आई, तो एक ऐसा खौफनाक सच बेनकाब हुआ जिसे सुनकर हर कोई दंग रह गया। नवजात बच्चे का डीएनए पीड़िता के अपने सगे भाई से 100 प्रतिशत मैच हो गया, जिसके बाद हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने आरोपी युवक के खिलाफ दर्ज एफआईआर को पूरी तरह से रद्द कर दिया है।
घर में घुस कर दुष्कर्म के आरोप से शुरू हुआ मामला
मामला वर्ष 2023 का है, जब बिलासपुर जिले के महिला पुलिस थाने में नाबालिग के बयान के आधार पर एक युवक के खिलाफ दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। शिकायत में कहा गया था कि युवक घर में घुसा, उसके साथ दुष्कर्म किया और जान से मारने की धमकी दी। बाद में युवती गर्भवती हुई और उसने एक बच्चे को जन्म दिया।
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वैज्ञानिक जांच ने बदल दी पूरी तस्वीर
जांच के दौरान पुलिस ने पीड़िता, नवजात और आरोपी युवक के डीएनए नमूने फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी भेजे। रिपोर्ट आने पर पता चला कि बच्चे का डीएनए आरोपी युवक से मेल ही नहीं खाता। आरोपी का डीएनए मैच न होने पर जब पुलिस ने संदेह के आधार पर अन्य संदिग्धों के सैंपल जांच के लिए भेजे, तो फॉरेंसिक रिपोर्ट ने चौंकाने वाली पुष्टि की।
रिपोर्ट ने किया चौंकाने वाला खुलासा
डीएनए जांच में सबसे बड़ा खुलासा तब हुआ, जब नवजात का जैविक संबंध पीड़िता के सगे भाई से स्थापित हुआ। फॉरेंसिक रिपोर्ट के अनुसार बच्चे का डीएनए पीड़िता के भाई से मेल खाता पाया गया। इस खुलासे के बाद मामला पूरी तरह नए मोड़ पर पहुंच गया और जांच की दिशा बदल गई।
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बयान के बाद बदल गया पूरा घटनाक्रम
डीएनए रिपोर्ट सामने आने के बाद पुलिस की सख्ती के बाद पीड़िता ने भी सच उगल दिया और स्वीकार किया कि उसके सगे भाई ने ही उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए थे। इसके बाद जांच एजेंसियों ने वैज्ञानिक साक्ष्यों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की।
हाईकोर्ट ने आरोपी युवक को दी राहत
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायाधीश राकेश कैंथला की अदालत ने कहा कि वैज्ञानिक साक्ष्य, विशेष रूप से डीएनए रिपोर्ट, आरोपी युवक के खिलाफ लगाए गए आरोपों का समर्थन नहीं करते। अदालत ने माना कि जब वैज्ञानिक जांच से आरोप निराधार साबित हो चुके हैं, तो किसी व्यक्ति को अनावश्यक रूप से आपराधिक मुकदमे का सामना करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने युवक के खिलाफ दर्ज दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट की एफआईआर को रद्द कर दिया।
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वैज्ञानिक साक्ष्यों की अहमियत फिर आई सामने
यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि गंभीर आपराधिक मामलों में वैज्ञानिक जांच और डीएनए परीक्षण कितने महत्वपूर्ण होते हैं। अदालत ने भी अपने निर्णय में वैज्ञानिक साक्ष्यों को निर्णायक मानते हुए आरोपी युवक को राहत प्रदान की। वहीं, मामले के खुलासे ने पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बनते हुए रिश्तों और सामाजिक मूल्यों को लेकर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
