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July 23, 2026
विक्रमादित्य सिंह के विभाग की सुस्ती पर हाईकोर्ट सख्त, पुल निर्माण देरी पर सुक्खू सरकार से मांगा जवाब
हाईकोर्ट ने सुक्खू सरकार से पुल निर्माण में हो रही देरी का पूछा कारण
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शिमला। हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार के तेज तर्रार मंत्री विक्रमादित्य सिंह का लोक निर्माण विभाग एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गया है। इस बार विभाग की सुस्त कार्यप्रणाली ने हिमाचल हाईकोर्ट को भी संज्ञान लेने पर मजबूर कर दिया है। हिमाचल हाईकोर्ट ने रोहड़ू और चिड़गांव में वर्षों से अधर में लटके पुलों के निर्माण में विभाग की सुस्ती पर कड़ा संज्ञान लिया है।
हिमाचल हाईकोर्ट ने लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली पर सख्त रूख अपनाया है। हाईकोर्ट ने पुलों के निर्माण में हो रही असामान्य देरी को गंभीरता से लेते हुए स्वतः संज्ञान में जनहित याचिका दर्ज की और मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू सरकार को नोटिस जारी कर विस्तृत जवाब तलब किया है। मामला लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह के विभाग से जुड़ा होने के कारण इसे सरकार के लिए भी अहम माना जा रहा है।
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मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन सी नेगी की खंडपीठ ने प्रशासनिक शिकायत के आधार पर मामले की सुनवाई शुरू करते हुए राज्य सरकार से पूछा है कि आखिर महत्वपूर्ण पुल परियोजनाओं में वर्षों की देरी क्यों हो रही है। अदालत ने सरकार को परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति, देरी की वजह और इन्हें पूरा करने की तय समय-सीमा सहित विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
रोहड़ू और चिड़गांव क्षेत्र में पुल निर्माण की धीमी रफ्तार ने अब न्यायपालिका का ध्यान भी अपनी ओर खींच लिया है। लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर उठे सवालों के बीच हाईकोर्ट की यह कार्रवाई विभाग के लिए बड़ी चुनौती मानी जा रही है। लंबे समय से निर्माण कार्य पूरा न होने के कारण स्थानीय लोगों को रोजमर्रा की आवाजाही में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
मामला लोक निर्माण विभाग के चिड़गांव उपमंडल और रोहड़ू मंडल के अंतर्गत सीमा क्षेत्र में आरसीडी रोड पर पब्बर नदी के ऊपर बनाए जा रहे पुल से जुड़ा है। इसके अलावा आसपास निर्माणाधीन अन्य पुल भी वर्षों से पूरे नहीं हो सके हैं। परियोजनाओं की धीमी प्रगति ने क्षेत्र के विकास पर भी असर डाला है।
अदालत तक पहुंची शिकायत में बताया गया कि पुल निर्माण में लगातार हो रही देरी से लोगों को रोजाना लंबा सफर तय करना पड़ रहा है। बरसात और आपातकालीन परिस्थितियों में यह समस्या और गंभीर हो जाती है। इसी जनहित को देखते हुए हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर मामले की सुनवाई शुरू की।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि अगली सुनवाई से पहले विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की जाए। अब इस मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त 2026 को होगी। अदालत की सख्ती के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि लंबे समय से अटकी पुल परियोजनाओं में तेजी आ सकती है और प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को राहत मिलने का रास्ता खुलेगा।