बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस जांच की पूरी दिशा ही बदल दी। झंडूता थाना क्षेत्र के समलेटू में दो भाइयों के बीच रसोईघर को लेकर हुए विवाद के बाद जिस व्यक्ति की मौत मान ली गई थी, वह पुलिस को आखिरकार जिंदा मिल गया। पुलिस ने मदन लाल को स्वारघाट-मंडी भराड़ी एनएच क्षेत्र में एक ढाबे से बरामद किया है, जहां वह कथित तौर पर अपनी पहचान छिपाकर काम कर रहा था।
रसोईघर के विवाद ने लिया हिंसक रूप
दरअसल, मामले में नया मोड़ आने के बाद पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि घटना के दौरान वास्तव में क्या हुआ था और आरोपित भाई-भाभी ने मदन लाल को मृत समझकर झील किनारे क्यों छोड़ा। इससे पहले दोनों के खिलाफ मदन लाल की हत्या के संदेह में कार्रवाई की जा रही थी और वे जेल में बंद थे। पुलिस के अनुसार, घटना 11 सितंबर की है। चंगरू गांव निवासी बिशन दास और उसकी पत्नी रानी देवी का मदन लाल के साथ रसोईघर को लेकर विवाद हुआ था।
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देखते ही देखते मामला मारपीट तक पहुंच गया। आरोप है कि इसी दौरान रानी देवी ने मदन लाल के सिर पर पत्थर से वार कर दिया। सिर पर चोट लगने से मदन लाल गंभीर रूप से घायल हो गया और उसके शरीर से खून बहने लगा। बताया जा रहा है कि उसे प्राथमिक उपचार भी दिलाया गया था। हालांकि, इलाज के बाद जब मदन लाल वापस घर पहुंचा तो विवाद फिर भड़क गया। पुलिस जांच के मुताबिक, इसके बाद उसके साथ दोबारा मारपीट हुई और वह बेहोश होकर गिर पड़ा।
रिमांड में सामने आए विरोधाभास
पुलिस के अनुसार, मदन लाल को अचेत अवस्था में देखकर बिशन दास और रानी देवी घबरा गए। दोनों को लगा कि उसकी मौत हो चुकी है। इसके बाद कथित तौर पर उन्होंने पुलिस कार्रवाई के डर से उसे वहां से हटाने का फैसला किया। जांच के मुताबिक, दोनों मदन लाल को उठाकर चंगरू के समीप गोविंद सागर झील के किनारे ले गए और वहां छोड़ आए। शुरुआती पूछताछ में भी दोनों ने पुलिस को बताया था कि झगड़े के बाद मदन लाल की मौत हो गई थी और उन्होंने उसके शव को झील में फेंक दिया था।
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इसी जानकारी के आधार पर पुलिस ने झील और आसपास के इलाकों में मदन लाल की तलाश शुरू की थी। मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ पुलिस को दोनों के बयानों में कुछ असंगतियां नजर आईं। पुलिस रिमांड के दौरान पूछताछ में कई ऐसी बातें सामने आईं, जिनसे जांच टीम को संदेह हुआ कि घटनाक्रम बताए गए तरीके से पूरी तरह मेल नहीं खा रहा है। इसके बाद पुलिस ने स्थानीय लोगों से जानकारी जुटाने के साथ-साथ आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगालनी शुरू की। इसी दौरान जांच टीम को एक अहम सुराग मिला।
झील किनारे होश आया तो खुद निकला बाहर
सीसीटीवी फुटेज में 13 सितंबर को मदन लाल के मंडी भराड़ी और स्वारघाट के आसपास मौजूद होने की जानकारी मिली। इससे पुलिस का संदेह और मजबूत हुआ कि मदन लाल की मौत नहीं हुई थी और वह घटना के बाद किसी तरह वहां से निकल गया था। पुलिस द्वारा बरामद किए जाने के बाद मदन लाल ने पूछताछ में घटनाक्रम के बारे में जानकारी दी। उसके अनुसार, 12 सितंबर को झील किनारे उसे होश आया था।
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इसके बाद वह वहां से निकलकर मंडी भराड़ी की दिशा में चला गया। रास्ते में उसने एक मेडिकल स्टोर से पट्टी और दवा खरीदी और अपनी चोट का खुद ही उपचार किया। इसके बाद वह स्वारघाट के पास हाईवे पर स्थित एक ढाबे तक पहुंचा। पुलिस के अनुसार, मदन लाल ने वहां अपनी पहचान जाहिर नहीं की और कथित तौर पर ढाबे पर काम करना शुरू कर दिया। इसी जगह से पुलिस टीम ने उसे खोज निकाला।
हत्या की जांच अब नए सवालों के बीच
मदन लाल के जिंदा मिलने के बाद इस मामले में पुलिस की जांच का पूरा घटनाक्रम बदल गया है। जिस व्यक्ति की कथित हत्या के मामले में पुलिस झील में शव तलाश रही थी, वही व्यक्ति अब सुरक्षित बरामद हो चुका है। अब पुलिस यह जांच कर रही है कि मदन लाल के साथ मारपीट किस स्तर तक हुई, उसे झील किनारे किस स्थिति में छोड़ा गया और घटना के बाद दोनों आरोपितों ने पुलिस को क्या-क्या जानकारी दी।
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पुलिस बरामद मदन लाल के बयान, सीसीटीवी फुटेज, मेडिकल रिकॉर्ड और घटनास्थल से जुड़े अन्य साक्ष्यों को आपस में मिलाकर मामले की कड़ियां जोड़ रही है। पुलिस के अनुसार, अब तक की जांच में यह सामने आया है कि बिशन दास और रानी देवी ने मदन लाल को मृत समझ लिया था और इसी आधार पर उसे झील के पास छोड़ दिया था। हालांकि, मामले की पूरी तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। मामले की पुष्टि एसपी बिलासपुर अभिषेक धीमान ने की है। पुलिस अब आगे की कानूनी प्रक्रिया और मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
