शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने नशे और चिट्टा कारोबार के खिलाफ अपनी जीरो टॉलरेंस नीति को और सख्ती से लागू करना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में शिक्षा विभाग से जुड़े 10 कर्मचारियों की नौकरी पर संकट के बादल मंडरा गए हैं। नशे से जुड़े मामलों में नाम आने के बाद सरकार ने इन कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त करने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
चिट्टे में पकड़े गए शिक्षा विभाग के 10 कर्मी
सरकार की ओर से जारी आदेशों के बाद शिक्षा सचिव ने सभी जिला उपनिदेशकों को सर्कुलर जारी कर संबंधित मामलों की समीक्षा करने को कहा है। बर्खास्तगी से पहले प्रत्येक मामले का परीक्षण किया जाएगा, जिसके बाद नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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किन कर्मचारियों पर है कार्रवाई की तलवार?
जारी सूची के अनुसार, JBT शिक्षक दयाल सिंह, क्लर्क ओम कृष्ण और वरिष्ठ सहायक त्रिलोक नेगी के खिलाफ गंभीर अपराधों में मामले दर्ज हैं। वहीं क्लर्क अविनाश कपिल, एमटीडब्ल्यू सम्मी कुमार, शिक्षक पंकज सिंह, शिक्षक विजेंद्र सिंह, लैब तकनीशियन अमन कुमार और शिक्षक अंकुश शर्मा पर मादक पदार्थों के सेवन अथवा उससे जुड़े मामलों में केस दर्ज बताए गए हैं।
सरकार का सख्त संदेश
प्रदेश सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी सेवा में रहते हुए नशे या चिट्टा कारोबार से किसी भी प्रकार का संबंध बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हाल ही में आयोजित नेशनल कोऑर्डिनेशन ऑन ड्रग एनफोर्समेंट बैठक में भी हिमाचल में बढ़ते नशे के मामलों पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई थी।
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सरकार ने लिया बड़ा एक्शन
सरकार का मानना है कि यदि सरकारी कर्मचारी ही नशे के मामलों में संलिप्त पाए जाते हैं तो इससे समाज में गलत संदेश जाता है। ऐसे में दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जरूरी है।
संविधान और NDPS एक्ट के तहत होगी कार्रवाई
उच्च शिक्षा विभाग की ओर से जारी पत्र में स्कूल शिक्षा निदेशक, उच्च शिक्षा निदेशक और विश्वविद्यालय प्रशासन को ऐसे मामलों की जांच कर संविधान के अनुच्छेद 311(2)(B) तथा NDPS अधिनियम 1985 के तहत आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने यह भी साफ किया है कि जिन मामलों में पर्याप्त साक्ष्य और कानूनी आधार मौजूद होंगे, वहां सेवा समाप्ति तक की कार्रवाई की जा सकती है।
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नशे के खिलाफ अभियान हुआ तेज
प्रदेश सरकार पहले ही सरकारी नौकरियों में नियुक्ति से पहले डोप टेस्ट अनिवार्य करने की घोषणा कर चुकी है। इसके अलावा नशा तस्करों और नशे के नेटवर्क पर शिकंजा कसने के लिए विभिन्न एजेंसियों को भी सक्रिय किया गया है। अब शिक्षा विभाग के कर्मचारियों पर प्रस्तावित कार्रवाई को इसी अभियान का बड़ा कदम माना जा रहा है।
