शिमला। US-IRAN के बीच बढ़ते तनाव का असर अब सीधे हिमाचल प्रदेश के मेधावी छात्रों पर पड़ता दिख रहा है। वैश्विक सप्लाई चेन में आई बाधाओं और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की कीमतों में उछाल के कारण लैपटॉप और टैबलेट की उपलब्धता प्रभावित हो गई है। जिससे सरकारी योजना के बावजूद छात्र अपने ई-वाउचर का लाभ नहीं उठा पा रहे।

हिमाचल के मेधावियों को झटका

सरकार की मंशा जहां छात्रों को तकनीकी संसाधनों से जोड़ने की थी- वहीं जमीनी हकीकत में यह योजना तकनीकी दिक्कतों और देरी के कारण उलझती नजर आ रही है। मेधावी विद्यार्थियों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई श्रीनिवास रामानुजन स्टूडेंट्स डिजिटल योजना अब खुद सवालों के घेरे में आ गई है।

यह भी पढ़ें : हिमाचल: गगल हवाई अड्डे के शौचालय में मिला संदिग्ध बैग, मचा हड़कंप, बुलाया बम निरोधक दस्ता

नहीं मिल रहे लैपटॉप- टैबलेट

इस योजना की शुरुआत दिसंबर 2025 में मंडी से की गई थी, जब कांग्रेस सरकार ने अपने तीन साल पूरे होने पर इसे एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश किया। इसके तहत मेधावी छात्रों को 16-16 हजार रुपये के ई-वाउचर देकर लैपटॉप या टैबलेट रियायती दर पर उपलब्ध करवाने का लक्ष्य रखा गया था। मगर कई महीनों बाद भी बड़ी संख्या में छात्र इन वाउचर का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं।

छात्रों की बढ़ी परेशानी

छात्रों की सबसे बड़ी परेशानी योजना के ऑनलाइन पोर्टल से जुड़ी है। उनका कहना है कि लॉगइन करते समय ओटीपी ही प्राप्त नहीं हो रहा, जिससे वे आगे की प्रक्रिया पूरी नहीं कर पा रहे। कई छात्रों ने बार-बार प्रयास किया, लेकिन हर बार तकनीकी बाधाएं सामने आ रही हैं।

यह भी पढ़ें : हिमाचल की बेटी महज 22 साल की उम्र में बनीं HAS अधिकारी, पहले प्रयास में रचा इतिहास

ई-वाउचर नहीं हो रहे रिडीम

स्थिति को और जटिल इस बात ने बना दिया है कि वर्ष 2022-23 में पढ़ाई पूरी कर चुके छात्रों को मार्च 2026 में जाकर ई-वाउचर मिले। जबकि उनकी वैधता पहले ही 11 दिसंबर 2025 से शुरू होकर 10 जून 2026 तक सीमित है। ऐसे में छात्रों को डर सता रहा है कि कहीं वाउचर एक्सपायर न हो जाएं।

छात्रों के लिए हो रहा मुश्किल

वैश्विक परिस्थितियों ने भी इस योजना पर असर डाला है। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे लैपटॉप और टैबलेट की कीमतों में इजाफा हुआ है। चयनित कंपनियों ने भी बढ़ी हुई लागत का हवाला देते हुए सीमित विकल्प ही उपलब्ध कराए हैं। ऐसे में 16 हजार रुपये में बेहतर डिवाइस लेना छात्रों के लिए मुश्किल होता जा रहा है।

 

यह भी पढ़ें : देव पराशर ऋषि टिप्पणी पर बवाल खत्म, अधिवक्ता ने झुककर मांगी माफी- किया था अपमान

छात्रों ने बताया किसकी लापरवाही?

छात्रों ने इस पूरे मामले को शिक्षा विभाग की लापरवाही करार दिया है। उनका कहना है कि वाउचर समय पर मिलते तो स्थिति अलग होती। कई छात्रों ने विभाग के चक्कर लगाने के बावजूद समाधान न मिलने की बात भी कही है। जानकारी के अभाव और अस्पष्ट प्रक्रिया ने उनकी परेशानी को और बढ़ा दिया है।

क्या बोले शिक्षा मंत्री?

वहीं, सरकार की ओर से दावा किया गया है कि समस्या को गंभीरता से लिया जा रहा है। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा है कि कुछ छात्रों की शिकायतें सामने आई हैं और अधिकारियों को संबंधित बैंक के साथ मिलकर समाधान निकालने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही कंपनियों से भी बातचीत जारी है ताकि उपकरणों की उपलब्धता और कीमतों को लेकर राहत दी जा सके।

यह भी पढ़ें : हिमाचल : आ गई पंचायत चुनाव की तारीख....इस दिन लगेगी आचार संहिता- तैयारियां तेज

कब होगा समास्याओं का समाधान?

फिलहाल, योजना का उद्देश्य भले ही सकारात्मक हो। मगर क्रियान्वयन में आई खामियों ने इसे छात्रों के लिए चुनौती बना दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार कितनी जल्दी इन समस्याओं का समाधान कर पाती है, ताकि मेधावी विद्यार्थियों को उनका हक समय पर मिल सके।

नोट : ऐसी ही तेज़, सटीक और ज़मीनी खबरों से जुड़े रहने के लिए इस लिंक पर क्लिक कर हमारे फेसबुक पेज को फॉलो करें