सोलन। हिमाचल प्रदेश के जिला सोलन में स्थित बीबीएन में उद्योगों और पर्यावरण को लेकर विवाद कोई नई बात नहीं है, लेकिन दभोटा के माजरा गांव में ग्रामीणों का विरोध अब लंबा खिंचता जा रहा है। करीब तीन महीने से ग्रामीण एक कंपनी के बाहर धरने पर बैठे हैं।
आरोप है कि कंपनी से निकलने वाले कथित कैमिकलयुक्त पानी ने गांव के पेयजल स्रोतों को प्रभावित कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि हैंडपंप और घरों के नलों तक पहुंच रहे पानी की गुणवत्ता को लेकर गंभीर चिंता बनी हुई है।
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‘कंपनी के पानी से गांव में बढ़ी परेशानी’
ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच करवाने और पानी की गुणवत्ता की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है। माजरा गांव में धरने पर बैठी बुजुर्ग महिला अजीत कौर का आरोप है कि कंपनी के आसपास से निकलने वाले पानी के कारण गांव के पेयजल स्रोत प्रभावित हुए हैं।
काफी परेशान हैं ग्रामीण
उनका कहना है कि कई परिवारों को पानी की समस्या झेलनी पड़ रही है और ग्रामीण त्वचा संबंधी परेशानियों समेत अन्य स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर भी चिंतित हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या किसी एक घर तक सीमित नहीं है, बल्कि गांव के कई परिवार इसके प्रभाव की शिकायत कर रहे हैं।
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ग्रामीण बोले- ‘हमारे कई पशुओं की मौत हुई’
धरने पर बैठे देविंद्र सिंह ने कंपनी पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि सॉलिड वेस्ट के ट्रीटमेंट के नाम पर ग्रामीणों को गुमराह किया जा रहा है।
उन्होंने दावा किया कि गांव में कई पशुओं की मौत हो चुकी है और अगर पूरे मामले की सही तरीके से जांच करवाई जाए तो लोगों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की वास्तविक वजह भी सामने आ सकती है।
ग्रामीणों मे लगाए कई आरोप
हालांकि, ग्रामीणों की ओर से लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और पशुओं की मौत को कथित जल प्रदूषण से जोड़ने के लिए वैज्ञानिक और विभागीय जांच की रिपोर्ट का इंतजार है।
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‘सॉलिड वेस्ट के नाम पर लिक्विड वेस्ट पहुंच रहा’
ग्रामीण कविता ने आरोप लगाया कि कंपनी में केवल ठोस कचरे का प्रबंधन नहीं हो रहा, बल्कि अलग-अलग जगहों से तरल कचरा भी यहां पहुंचाया जा रहा है। उनका कहना है कि कंपनी घनी आबादी के बीच होने के कारण ग्रामीणों को लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण कंपनी को आबादी से दूर स्थानांतरित करने की मांग कर रहे हैं।
तीन महीने से धरना, ग्रामीणों का प्रशासन पर भी सवाल
ग्रामीणों के मुताबिक वे पिछले करीब तीन महीने से कंपनी के बाहर शांतिपूर्ण तरीके से धरना दे रहे हैं। उनका आरोप है कि कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सामने शिकायत रखी गई, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।
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मौके पर पहुंचे अधिकारी
ग्रामीणों का कहना है कि कुछ समय पहले अधिकारी मौके पर पहुंचे थे। मगर उनके मुताबिक अधिकारियों ने कंपनी का पक्ष सुनने के बाद वापस लौट गए। ग्रामीणों का आरोप है कि इसके बाद उनकी शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
पानी के सैंपल लिए, रिपोर्ट का इंतजार
मामले को लेकर विभाग की ओर से पानी के सैंपल लिए गए हैं। हालांकि, अभी इनकी जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है। ऐसे में फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि पानी में किसी तरह का रासायनिक प्रदूषण पाया गया है या नहीं। ग्रामीणों का कहना है कि रिपोर्ट जल्द सामने आनी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि पेयजल स्रोतों की स्थिति वास्तव में क्या है और कथित प्रदूषण की वजह क्या है।
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1 सितंबर को नालागढ़ में धरने की तैयारी
ग्रामीणों ने अब आंदोलन को और आगे बढ़ाने का ऐलान किया है। उनका कहना है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो 1 सितंबर को नालागढ़ में धरना दिया जाएगा। ग्रामीणों ने स्थानीय विधायक और प्रशासन से मौके पर पहुंचकर उनकी समस्या सुनने तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो आने वाले चुनावों में इसका राजनीतिक असर देखने को मिल सकता है।
