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August 25, 2026

हिमाचल: स्मार्ट बिजली मीटर ने दिया दंपत्ति को बड़ा झटका, बंद घर का आया हजारों में बिल; उड़े होश

दो लोगों के घर का बिजली बिल सात हजार से भी अधिक विभाग को सौंपी शिकायत

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himachal smart meter

ऊना। हिमाचल प्रदेश में सुविधा, सटीक बिलिंग और पारदर्शिता के दावों के साथ लगाए जा रहे स्मार्ट बिजली मीटर अब कई उपभोक्ताओं के लिए परेशानी का कारण बनते नजर आ रहे हैं। कभी 200 से 500 रुपये तक बिजली बिल चुकाने वाले परिवारों के पास अचानक हजारों रुपये के बिल पहुंचने से उपभोक्ताओं के होश उड़ रहे हैं। कई जगहों पर लोग बढ़े हुए बिलों को लेकर विद्युत बोर्ड के कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं।

 

ऐसा ही हैरान करने वाला मामला ऊना जिले से सामने आया है, जहां चलोला गांव में स्मार्ट मीटर लगने के बाद कई उपभोक्ताओं के बिजली बिल में अचानक भारी उछाल आने की शिकायत सामने आई है। ग्रामीणों का दावा है कि जिन घरों में पहले सामान्य खपत के हिसाब से 800 से 900 रुपये तक बिल आता था, वहां अब कई हजार रुपये के बिल पहुंच रहे हैं। कुछ उपभोक्ताओं के बिल तो 10 हजार रुपये से भी ऊपर बताए जा रहे हैं।

घर में कोई नहीं था, फिर भी आया 7,025 रुपये बिल

चलोला गांव निवासी सेवानिवृत्त इंस्पेक्टर मोहिंदर पाल सिंह का मामला स्मार्ट मीटर की बिलिंग को लेकर सबसे बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। उन्होंने विद्युत बोर्ड के सहायक अभियंता को शिकायत देकर बताया कि उनके घर में केवल पति-पत्नी रहते हैं।

 

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मोहिंदर पाल सिंह के अनुसार उनका बिजली बिल सामान्य तौर पर 1,200 से 1,500 रुपये के आसपास रहता था, लेकिन इस बार उन्हें 7,025 रुपये का बिल थमा दिया गया। इससे भी ज्यादा हैरानी की बात यह है कि बिलिंग अवधि के दौरान वह अपनी पत्नी के साथ सोमनाथ और द्वारका की यात्रा पर गए हुए थे। यानी जिस अवधि में घर बंद था और बिजली की खपत बेहद कम होने की उम्मीद थी, उसी दौरान हजारों रुपये का बिल आने से परिवार भी हैरान है।

पूरे गांव में बढ़े बिलों की शिकायत

ग्रामीणों का कहना है कि समस्या किसी एक उपभोक्ता तक सीमित नहीं है। गांव के कई परिवारों को स्मार्ट मीटर लगने के बाद अपेक्षा से कहीं ज्यादा बिल प्राप्त हुए हैं। कैप्टन गुरदयाल चंद, विधि चंद धीमान, पुन्नू राम, होशियार सिंह और ओमपाल सिंह समेत कई उपभोक्ताओं ने भी बढ़े हुए बिजली बिलों की शिकायत की है। ग्रामीणों के मुताबिक कुछ उपभोक्ताओं को 2 हजार रुपये से लेकर 12 हजार रुपये तक के बिल भेजे गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पुराने मीटर लगे होने के दौरान उनके बिल सामान्य आते थे, लेकिन स्मार्ट मीटर लगने के बाद अचानक बिलिंग में इतना बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है।

 

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800-900 रुपये के बिल से हजारों तक पहुंचा आंकड़ा

उपभोक्ताओं का कहना है कि सामान्य तौर पर जिन घरों में बिजली का बिल 800 से 900 रुपये के आसपास आता था, वहां अब कई गुना अधिक राशि दिखाई दे रही है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि वास्तविक बिजली खपत में इतनी बड़ी वृद्धि कैसे हुई।

 

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ग्रामीणों ने विद्युत बोर्ड से मांग की है कि स्मार्ट मीटरों की तकनीकी जांच कराई जाए और मीटर में दर्ज खपत का पुराने रिकॉर्ड से मिलान किया जाए। यदि तकनीकी खामी के कारण बिल बढ़े हैं तो उन्हें संशोधित कर वास्तविक खपत के आधार पर नया बिल जारी किया जाए।

ग्रामीणों ने दी धरने की चेतावनी

बढ़े हुए बिजली बिलों से नाराज ग्रामीणों ने विद्युत बोर्ड को चेतावनी भी दी है। उनका कहना है कि यदि जल्द ही स्मार्ट मीटरों की जांच नहीं की गई और गलत बिलों को ठीक नहीं किया गया तो उपभोक्ता आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे। ग्रामीणों ने कहा कि वे बसाल स्थित एसडीओ कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन करेंगे। उनका कहना है कि आम परिवारों पर हजारों रुपये का अतिरिक्त बिजली बिल डालना किसी भी स्थिति में उचित नहीं है।

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विद्युत बोर्ड ने माना- शिकायतें मिली हैं

मामले को लेकर विद्युत उपमंडल बसाल के सहायक अभियंता उदित शर्मा ने बताया कि ग्रामीणों की ओर से बढ़े हुए बिजली बिलों को लेकर शिकायतें प्राप्त हुई हैं। उन्होंने कहा कि मामले को लेकर बोर्ड के शिमला स्थित मुख्यालय से भी संपर्क किया गया है। अधिकारियों के अनुसार तकनीकी समस्या की जांच की जा रही है और जिन उपभोक्ताओं के बिलों में गड़बड़ी पाई जा रही है, उन्हें ठीक किया जा रहा है।

स्मार्ट मीटरों पर फिर उठे सवाल

स्मार्ट मीटरों का उद्देश्य बिजली की खपत की सटीक निगरानी, पारदर्शी बिलिंग और मीटर रीडिंग से जुड़ी समस्याओं को कम करना है। लेकिन यदि उपभोक्ताओं के दावों के अनुसार कम खपत वाले घरों में अचानक हजारों रुपये के बिल आने लगें, तो स्वाभाविक रूप से मीटर की रीडिंग और बिलिंग प्रणाली पर सवाल खड़े होते हैं। 

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ऊना के चलोला गांव की शिकायत ने स्मार्ट मीटरों को लेकर चल रही बहस को एक बार फिर सामने ला दिया है। अब ग्रामीणों की नजर विद्युत बोर्ड की तकनीकी जांच और संशोधित बिलों पर है। यदि जांच में तकनीकी खामी सामने आती है, तो यह मामला स्मार्ट मीटरों की कार्यप्रणाली और बिलिंग व्यवस्था को लेकर भी महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर सकता है।

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