शिमला। हिमकेयर में कथित गड़बड़ियों की जांच अब सिर्फ अस्पतालों के बिल और क्लेम तक सीमित नहीं रह गई है। विजिलेंस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे सवाल उन फैसलों तक पहुंच रहे हैं जिनके आधार पर पूरी योजना संचालित होती रही।
हिमकेयर घोटाले में जांच तेज
निजी अस्पतालों की एंट्री से लेकर उपचार दरें तय करने, क्लेम मंजूर होने और करोड़ों रुपये के भुगतान तक आखिर निगरानी किस स्तर पर हुई—अब जांच एजेंसी इन्हीं कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। इसी सिलसिले में तत्कालीन स्वास्थ्य सचिव से पूछताछ की तैयारी ने मामले को प्रशासनिक स्तर पर भी चर्चा में ला दिया है।
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जांच का दायरा अस्पतालों से आगे बढ़ा
राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की एसआईटी अब हिमकेयर से जुड़े उन रिकॉर्ड को खंगाल रही है, जिनसे योजना के संचालन और वित्तीय प्रक्रिया की तस्वीर साफ हो सकती है। अस्पतालों को पैनल में शामिल करने के फैसले, उपचार की दरें, क्लेम के सत्यापन, भुगतान और ऑडिट से जुड़े दस्तावेज जांच का हिस्सा बनाए गए हैं।
MLA के बाद अब स्वास्थ्य सचिव से पूछताछ
जांच अधिकारी यह भी देख रहे हैं कि विभाग के पास पहले से आई शिकायतों और ऑडिट आपत्तियों पर क्या कार्रवाई की गई थी। यानी अब पड़ताल सिर्फ यह जानने तक सीमित नहीं है कि किसी अस्पताल ने गलत क्लेम किया या नहीं, बल्कि यह भी देखा जा रहा है कि उस क्लेम को जांचने और भुगतान तक पहुंचाने वाली व्यवस्था ने कैसे काम किया।
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IGMC के रिकॉर्ड भी खंगाले
जांच के दौरान इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल शिमला से जुड़े रिकॉर्ड भी विजिलेंस की जांच में शामिल किए गए हैं। निजी अस्पतालों की ओर से हिमकेयर के तहत दाखिल किए गए क्लेम और उनके साथ लगाए गए दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही है।
नियमों की हुई अनदेखी...
जांच एजेंसी उपचार से लेकर बिल तैयार होने, क्लेम के सत्यापन और भुगतान जारी होने तक की पूरी प्रक्रिया को जोड़कर देख रही है। इसका मकसद यह पता लगाना है कि कहीं नियमों की अनदेखी कर भुगतान तो नहीं किया गया।
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71 निजी अस्पतालों पर भी नजर
जुलाई में सामने आई जांच रिपोर्ट में 100 करोड़ रुपये से ज्यादा के संदिग्ध भुगतान के संकेत मिलने की बात कही गई थी। साथ ही 71 निजी अस्पतालों के रिकॉर्ड जांच के दायरे में होने की जानकारी सामने आई थी।
रिकॉर्ड की हो रही जांच
इन अस्पतालों के उपचार, बिलिंग, मरीजों से जुड़े दस्तावेज और भुगतान रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। रिपोर्ट में कुछ संस्थानों पर निर्धारित स्वास्थ्य मानकों से जुड़े सवाल और संदिग्ध बिलिंग के तथ्य सामने आने का भी उल्लेख किया गया था।
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तत्कालीन स्वास्थ्य सचिव से पूछे जा सकते हैं ये सवाल
अब जांच का अहम हिस्सा प्रशासनिक फैसलों से जुड़ गया है। तत्कालीन स्वास्थ्य सचिव से यह जानने की कोशिश हो सकती है कि योजना के संचालन के दौरान कौन-कौन से नीतिगत निर्णय लिए गए, निजी अस्पतालों को पैनल में शामिल करने की प्रक्रिया क्या थी और क्लेम व भुगतान की निगरानी किस स्तर पर की जाती थी।
इसके अलावा विभाग को मिली शिकायतों, ऑडिट आपत्तियों और उन पर हुई कार्रवाई का रिकॉर्ड भी पूछताछ में महत्वपूर्ण हो सकता है।
डॉ. जनक राज से पहले हो चुकी पूछताछ
इस मामले में आईजीएमसी के तत्कालीन वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक और वर्तमान भाजपा विधायक डॉ. जनक राज से भी विजिलेंस पूछताछ कर चुकी है। उनसे उनके कार्यकाल के दौरान हिमकेयर के उपचार, क्लेम, निगरानी और भुगतान से जुड़े मामलों पर जानकारी ली गई थी।
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अब जांच अस्पताल स्तर से निकलकर स्वास्थ्य निदेशालय, सचिवालय और योजना के प्रशासनिक संचालन तक पहुंचती दिखाई दे रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में तत्कालीन अधिकारियों से होने वाली पूछताछ इस मामले की अगली दिशा तय कर सकती है।
