सोलन। बीमारी से जूझ रहे लोग अपनी जिंदगी बचाने के लिए महंगे इलाज और लाखों रुपये खर्च कर दवाइयां व इंजेक्शन लगवाते हैं। उन्हें उम्मीद होती है कि इलाज से उनकी हालत सुधरेगी, लेकिन अगर यही दवाएं नकली निकल जाएं तो मरीजों की जिंदगी खतरे में पड़ सकती है। हिमाचल प्रदेश के काला अंब स्थित एक दवा कंपनी से जुड़ा ऐसा ही गंभीर मामला सामने आया है, जहां दिल की गंभीर बीमारी में इस्तेमाल होने वाला जीवन रक्षक इंजेक्शन जांच में नकली पाया गया है। मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में भी हड़कंप मच गया है।
एडेनोसिन इंजेक्शन निकला नकली
मामला एडेनोसिन इंजेक्शन आईपी 6 मिलीग्राम/2 मिलीलीटर (काडिर्युरेक्स) के एक बैच से जुड़ा है। इस इंजेक्शन का इस्तेमाल अस्पतालों में दिल की तेज और असामान्य धड़कनों को नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। डॉक्टरों के अनुसार, यह एक जीवन रक्षक दवा मानी जाती है और गंभीर स्थिति में मरीज को दी जाती है।
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मुंबई की जांच में खुली पोल
इंजेक्शन के सैंपल जांच के लिए मुंबई की दवा केंद्रीय लैब भेजे गए थे। जांच रिपोर्ट में पता चला कि इंजेक्शन का संबंधित बैच नकली है। इसके बाद इसे नकली दवा घोषित कर दिया गया। रिपोर्ट सामने आने के बाद औषधि विभाग ने इसे गंभीर मामला मानते हुए तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी। विभाग का कहना है कि मरीजों की सुरक्षा के साथ कोई लापरवाही नहीं बरती जाएगी।
कंपनी पर कड़ी कार्रवाई
जांच रिपोर्ट के आधार पर काला अंब स्थित दवा कंपनी के सभी दवा बनाने के लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं। अब कंपनी कोई भी दवा नहीं बना सकेगी और उसके सभी उत्पादों की बिक्री व सप्लाई पर भी रोक लगा दी गई है।
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टीम ने कंपनी का किया था दौरा
मामला सामने आने से पहले दवा विभाग की टीम ने कंपनी का दौरा कर जांच की थी। टीम ने कंपनी में दवाओं के बनने से जुड़ी प्रक्रिया, रिकॉर्ड और अन्य जरूरी चीजों को देखा था जांच के दौरान मिली कमियों और बाद में आई लैब रिपोर्ट के आधार पर कंपनी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई। विभाग अब यह भी पता लगा रहा है कि यह इंजेक्शन कहां-कहां भेजा गया था। अगर जांच में कोई और गड़बड़ी सामने आती है तो कंपनी के खिलाफ आगे भी कार्रवाई की जाएगी।
मरीजों की जान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं
मनीष कपूर ने कहा कि मरीजों की सुरक्षा सबसे जरूरी है और दवाओं की क्वालिटी में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो भी कंपनी नियमों का उल्लंघन करेगी, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि दिल की बीमारी में इस्तेमाल होने वाली दवाएं अगर नकली या खराब क्वालिटी की हों तो मरीजों की जान को खतरा हो सकता है। इसी वजह से इस मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है।
