शिमला। हिमाचल प्रदेश के पटवार सर्कल और कानूनगो दफ्तर में कल से ताले लटक सकते हैं। पटवारी और कानूनगो को जिला कैडर से स्टेट कैडर में बदलने के बाद से नाराज हिमाचल संयुक्त ग्रामीण राजस्व अधिकारी एवं कानूनगो महासंघ ने इसका ऐलान कर दिया है।

एडिशनल काम बंद करने का किया ऐलान

महासंघ ने सुक्खू सरकार को चेतावनी दी है कि अगर स्टेट कॉडर बनाने के फैसले से सरकार पीछे नहीं हटती है तो- 25 जुलाई यानी कल से एडिशनल पटवार और कानूनगो सर्कल का काम देखना बंद कर देंगे। यह भी पढ़ें: हिमाचल की बेटी वैशाली बनी लेफ्टिनेंट, ऑल इंडिया रैंक 134 किया हासिल

10 दिन से बंद पड़ी हैं ऑनलाइन सेवाएं

उल्लेखनीय है कि अगर ऐसे हुआ तो प्रदेश के लोगों को इससे परेशानी झेलनी पड़ सकती है। प्रदेश में पहले ही बीते दस दिन से इनकी हड़ताल के कारण ऑनलाइन सेवाएं बंद पड़ी हुई हैं। दरअसल, स्टेट कॉडर बनाए जाने से नाराज पटवारी कानून ने बीते 15 जुलाई से ऑनलाइन काम करने बंद कर दिए हैं। जिस कारण लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। बावजूद इसके अब तक सरकार ने महासंघ को बातचीत करने के लिए नहीं बुलाया है। वहीं, अब इसी बात से नाराज हिमाचल संयुक्त ग्रामीण राजस्व अधिकारी एवं कानूनगो महासंघ ने एडिशनल काम बंद करने का ऐलान किया है। शिमला कानूनगो-पटवारी महासंघ शिमला के अध्यक्ष चमन ठाकुर ने बताया कि कल कानूनगो-पटवारी एडिशनल चार्ज वाले दफ्तरों के संबंधित SDM और तहसीलदार को चाबी सौंप देंगे। यह भी पढ़ें: शादी में कैटरिंग के लिए गए थे पांच यार: गहरी खाई में गिरी कार, 3 ही बच पाए

कौन से काम हुए बंद?

पटवारी-कानूनगो द्वारा बोनोफाइड सर्टिफिकेट, इनकम सर्टिफिकेट, करेक्टर सर्टिफिकेट, कास्ट सर्टिफिकट, एग्रीकल्चर सर्टिफिकेट, अन-इम्पलायमेंट सर्टिफिकेट, लैंड होल्डिंग सर्टिफिकेट जैसे काम बंद कर दिए गए हैं।

क्यों हड़ताल कर रहे पटवारी-कानूनगो?

आपको बता दें कि बीती 12 जुलाई को हुई कैबिनेट मीटिंग में सरकार ने पटवारी-कानूनगो को जिला कॉडर से स्टेट कॉडर बनाने का फैसला लिया था। जिसके बाद पटवारी-कानूनगो सभी ऑफिशियल व्हाट्सऐप ग्रुप भी एग्जिट कर चुके हैं। यह भी पढ़ें: बेटियों को मंदिर ले जा रहे थे माता-पिता, रास्ते में 5 साल की पीहू को मिली… दरअसल, पटवारी और कानूनगो की भर्ती जिला कॉडर के हिसाब से हुई है। अब उन्हें अचानक स्टेट कॉडर बना देने से सीनियोरिटी प्रभावित होगी- जिससे प्रमोशन में देरी होगी। साथ ही स्टेट कॉडर में मर्ज होने से सीनियोरिटी में पीछे जा सकती हैं।

काम में नहीं आएगी एफिशिएंसी

हिमाचल संयुक्त ग्रामीण राजस्व अधिकारी एवं कानूनगो महासंघ के अध्यक्ष सतीश चौधरी ने बताया कि पटवारी-कानूनगों को जिला कॉडर में रखने का अहम कारण यह था कि उन्हें अपने जिला में उन्हें बोल चाल और एरिया के बारे में जानकारी होती है। ऐसे में अगर उनकी किसी दूसरे जिले में ट्रांसफर होती है तो उन्हें वह एरिया समझने में समय लगेगा। जिससे काम में एफिशिएंसी नहीं आएगी।

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