शिमला। हिमाचल प्रदेश का खजाना लगातार बढ़ते खर्चों के दबाव में है। कर्मचारियों के वेतन, पेंशन और पुराने कर्ज की अदायगी जैसे भारी वित्तीय बोझ के बीच राज्य सरकार को एक बार फिर उधार का सहारा लेना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि सरकार के सामने नियमित खर्चों को पूरा करना भी बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

700 करोड़ का कर्ज लेने जा रही सुक्खू सरकार

इसी वित्तीय दबाव के बीच राज्य सरकार ने 700 करोड़ रुपये का नया कर्ज लेने की तैयारी शुरू कर दी है। वित्त विभाग की ओर से इसके लिए जरूरी सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। इससे पहले मई महीने में भी सरकार 500 करोड़ रुपये का कर्ज ले चुकी है। राजस्व घाटा अनुदान RDG बंद होने के बाद सरकार की आर्थिक स्थिति पर अतिरिक्त दबाव बढ़ा है।

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हर महीने 2800 करोड़ रुपये की जरूरत

वित्तीय सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार को हर महीने लगभग 2800 करोड़ रुपये की आवश्यकता होती है। इसमें करीब 2000 करोड़ रुपये कर्मचारियों के वेतन, 800 करोड़ रुपये पेंशन, 500 करोड़ रुपये पुराने कर्ज के ब्याज और 300 करोड़ रुपये मूलधन की अदायगी पर खर्च होते हैं। ऐसे में सरकार के सामने कर्ज लेने के अलावा सीमित विकल्प ही बचे हैं।

1.11 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा पहुंचा कर्ज

प्रदेश सरकार पर इस समय कुल कर्ज का बोझ 1 लाख 11 हजार 200 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान राज्य सरकार पहले ही 900 करोड़ रुपये का ऋण लेने के लिए आवेदन कर चुकी है। बढ़ती देनदारियों के बीच आने वाले समय में भी सरकार की कर्ज पर निर्भरता बनी रहने की संभावना जताई जा रही है।

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जून में करना है स्थगित वेतन का भुगतान

सरकार को जून महीने में उन श्रेणियों के कर्मचारियों और अधिकारियों के स्थगित वेतन का भुगतान भी करना है, जिसे 18 अप्रैल 2026 को अस्थायी तौर पर रोका गया था। राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद अब यह राशि जून के वेतन के साथ जारी की जाएगी।

अधिकारियों को निर्देश जारी

इस संबंध में वित्त विभाग पहले ही संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी कर चुका है। प्रदेश की आर्थिक स्थिति को देखते हुए पहले उच्च अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के वेतन के कुछ हिस्से को अस्थायी रूप से स्थगित किया गया था, जिसे अब बहाल करने का निर्णय लिया गया है।

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