बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश में बिलासपुर जिले के सरकारी स्कूलों को लेकर सामने आई सामाजिक ऑडिट रिपोर्ट ने शिक्षा व्यवस्था की कई कमजोर कड़ियों को उजागर कर दिया है। ‘समग्र शिक्षा’ योजना के तहत कराए गए सर्वे में पाया गया कि जांच के दायरे में आए 154 सरकारी स्कूलों में से कोई भी विद्यालय शिक्षा का अधिकार यानी RTE कानून के तहत निर्धारित बुनियादी ढांचागत मानकों पर पूरी तरह खरा नहीं उतर पाया।

शैक्षणिक गुणवत्ता से जुड़ी कई कमियां सामने आईं

दरअसल, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की एक विशेषज्ञ टीम ने बिलासपुर जिले के कुल 809 सरकारी स्कूलों में से लगभग 20 प्रतिशत स्कूलों का विस्तृत सामाजिक ऑडिट किया। यह ऑडिट पांच चरणों में पूरा किया जाना है और पहले चरण की रिपोर्ट हाल ही में आयोजित जनसुनवाई के दौरान प्रस्तुत की गई।

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रिपोर्ट में स्कूलों की आधारभूत सुविधाओं, सुरक्षा व्यवस्था, प्रशासनिक ढांचे और शैक्षणिक गुणवत्ता से जुड़ी कई कमियां सामने आईं। इस खुलासे ने न केवल शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि विद्यार्थियों की सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा कर दी है।

बाहरी लोगों की आवाजाही को रोकना कठिन

सबसे चिंताजनक तथ्य यह रहा कि जिले के आधे से अधिक स्कूलों में चारदीवारी या सुरक्षा घेरा तक मौजूद नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे विशेष रूप से छात्राओं की सुरक्षा प्रभावित होती है। खुले परिसर वाले स्कूलों में बाहरी लोगों की आवाजाही को रोकना कठिन होता है, जिससे सुरक्षा संबंधी जोखिम बढ़ जाते हैं। इसके अलावा कई विद्यालयों में आवश्यक सुविधाओं का अभाव भी दर्ज किया गया।

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रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि किसी भी सर्वेक्षित स्कूल में छात्रों के लिए प्रोफेशनल काउंसलिंग की सुविधा उपलब्ध नहीं है। वर्तमान समय में मानसिक स्वास्थ्य, करियर मार्गदर्शन और भावनात्मक सहयोग की आवश्यकता को देखते हुए इसे बड़ी कमी माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि विद्यार्थियों को केवल किताबों तक सीमित नहीं रखा जा सकता, बल्कि उनके समग्र विकास के लिए परामर्श सेवाएं भी जरूरी हैं।

अधिकारियों ने दिलाया भरोसा

सामाजिक ऑडिट के दौरान यह भी पाया गया कि कई स्कूल अभी भी शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अनुरूप बुनियादी सुविधाएं विकसित नहीं कर पाए हैं। इससे शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यार्थियों के सीखने के माहौल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि शिक्षा विभाग का कहना है कि जिले ने शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने के क्षेत्र में कई उपलब्धियां हासिल की हैं, लेकिन रिपोर्ट में सामने आई कमियों को दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

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जनसुनवाई में मौजूद अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि रिपोर्ट में दर्ज खामियों को गंभीरता से लिया जाएगा और आने वाले समय में स्कूलों के बुनियादी ढांचे, सुरक्षा व्यवस्था तथा अन्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए ठोस प्रयास किए जाएंगे। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सामाजिक ऑडिट में उजागर हुई कमियों को दूर करने के लिए विभाग कितनी तेजी और गंभीरता से कार्रवाई करता है।

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