कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में सरकारी जमीन के रिकॉर्ड में कथित हेरफेर कर उसे निजी लोगों के नाम चढ़ाने और बाद में दूसरे लोगों को हस्तांतरित करने का मामला सामने आया है। राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो (SV & ACB) धर्मशाला ने इस मामले में 42 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है।
सरकारी जमीन की हेराफेरी
विजिलेंस की जांच में करीब 88 कनाल से अधिक सरकारी जमीन के रिकॉर्ड में गड़बड़ी किए जाने की बात सामने आई है। जांच एजेंसी के अनुसार, सरकारी खाते में दर्ज जमीन को पहले इंतकाल के जरिए निजी काश्तकारों के नाम दर्ज कराया गया।
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निजी नामों पर चढ़ाई 88 कनाल
इसके बाद जमीन की रजिस्ट्री, गिफ्ट डीड और अन्य दस्तावेजों के माध्यम से अलग-अलग लोगों को हस्तांतरित किए जाने की प्रक्रिया सामने आई है। कुछ मामलों में जमीन एक से अधिक बार ट्रांसफर किए जाने की जानकारी भी जांच में सामने आई है।
सरकारी जमीन पहले निजी नामों पर चढ़ाने का आरोप
विजिलेंस जांच में सामने आया है कि सरकारी खाते में दर्ज जमीन को कथित तौर पर निजी लोगों के नाम पर चढ़ाया गया। इसके लिए इंतकाल की प्रक्रिया का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद जमीन को दूसरे लोगों के नाम स्थानांतरित करने के लिए रजिस्ट्री और गिफ्ट डीड सहित अलग-अलग दस्तावेजों का सहारा लिया गया।
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जांच में जुटी टीमें
जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि सरकारी जमीन के रिकॉर्ड में बदलाव किस प्रक्रिया के तहत किया गया और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही। जमीन के रिकॉर्ड में हुए बदलाव और उसके बाद किए गए सभी हस्तांतरण जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
धारा 104 की अनदेखी का आरोप
मामले में आरोप है कि हिमाचल प्रदेश टेनेंसी एंड लैंड रिफॉर्म्स एक्ट की धारा 104 में निर्धारित प्रावधानों की अनदेखी की गई। जांच के अनुसार, सरकारी जमीन को पहले निजी काश्तकारों के नाम इंतकाल के जरिए दर्ज किया गया और इसके बाद इसे अलग-अलग लोगों के नाम ट्रांसफर किया गया।
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अब विजिलेंस इस पूरी प्रक्रिया की वैधानिकता की जांच कर रही है। खास तौर पर यह देखा जा रहा है कि जमीन के सरकारी खाते से निजी नामों में जाने की प्रक्रिया किस आधार पर हुई और उसके बाद किए गए हस्तांतरणों में नियमों का पालन किया गया था या नहीं।
कई इंतकाल भी जांच के घेरे में
घनियारा क्षेत्र में सरकारी जमीन के रिकॉर्ड में हुए बदलाव को लेकर वर्ष **2019 और 2020 में दर्ज किए गए कई इंतकाल** भी विजिलेंस की जांच के दायरे में हैं। जांच एजेंसी इन रिकॉर्डों के आधार पर जमीन के मूल स्वामित्व से लेकर बाद में हुए हस्तांतरण की पूरी कड़ी को खंगाल रही है।
जमीन कब सरकारी खाते में दर्ज थी, किस समय निजी नाम पर चढ़ाई गई और इसके बाद किस-किस व्यक्ति के नाम ट्रांसफर हुई—इन तमाम पहलुओं की जांच की जा रही है।
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तीन महालों की जमीन का रिकॉर्ड सामने आया
विजिलेंस जांच में घनियारा इलाके के तीन महालों का रिकॉर्ड सामने आया है। इनमें चकबन घनियारा में करीब 84 कनाल, मोहली लाहड़ा दी में करीब 3 कनाल और तेहड़ में करीब 17 मरले जमीन शामिल बताई गई है।
इन जमीनों के इंतकाल और उसके बाद हुए विभिन्न हस्तांतरणों की प्रक्रिया अब जांच का हिस्सा है। रिकॉर्ड में दर्ज क्षेत्रफल के अनुसार, इन तीन स्थानों पर सरकारी जमीन के बड़े हिस्से से संबंधित दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
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कई बार हुआ जमीन का ट्रांसफर
विजिलेंस के अनुसार, जांच में जमीन के हस्तांतरण का एक पैटर्न सामने आया है। पहले सरकारी जमीन को निजी नामों पर दर्ज कराने के बाद उसे रजिस्ट्री, गिफ्ट डीड और अन्य दस्तावेजों के जरिए आगे ट्रांसफर किया गया।
कुछ मामलों में जमीन एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति और फिर आगे किसी अन्य व्यक्ति के नाम किए जाने की बात भी सामने आई है। ऐसे में जांच एजेंसी अब जमीन के हर हस्तांतरण की कड़ी को रिकॉर्ड के आधार पर जोड़ रही है।
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42 लोगों के खिलाफ दर्ज हुई FIR
मामले की जांच के आधार पर राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो के धर्मशाला थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। इसमें कुल 42 लोगों को आरोपी बनाया गया है। SP विजिलेंस रमन शर्मा ने एफआईआर दर्ज होने और आरोपियों की संख्या की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि मामला विजिलेंस थाना धर्मशाला में दर्ज है और जांच आगे जारी है।
आरोपी नेक राम को कोर्ट से मिली जमानत
मामले में नामजद आरोपी नेक राम को शनिवार को अदालत से जमानत मिल गई। SP विजिलेंस रमन शर्मा ने भी इसकी पुष्टि की है। नेक राम की ओर से अदालत में पैरवी कर रहे अधिवक्ता अंकुर सोनी ने बताया कि उनके मुवक्किल को कोर्ट से जमानत मिल गई है। उन्होंने कहा कि अदालत के आदेश की प्रति प्राप्त होने के बाद मामले से संबंधित पूरी जानकारी साझा की जाएगी।
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जमीन रिकॉर्ड की पूरी कड़ी खंगाल रही विजिलेंस
अब जांच का मुख्य फोकस सरकारी जमीन को निजी नामों पर चढ़ाने से लेकर उसके आगे किए गए हस्तांतरण तक की पूरी प्रक्रिया पर है। विजिलेंस यह पता लगाने में जुटी है कि रिकॉर्ड में बदलाव कैसे हुआ, इंतकाल किस आधार पर दर्ज किए गए और बाद में रजिस्ट्री व गिफ्ट डीड के जरिए जमीन किस-किस के नाम पहुंची।
किस स्तर पर हुई हेरफेर?
मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें सरकारी खाते में दर्ज जमीन के बड़े हिस्से के निजी नामों पर जाने का आरोप है। आगे की जांच और दस्तावेजों की पड़ताल से ही यह स्पष्ट होगा कि इस पूरी प्रक्रिया में किसकी क्या भूमिका रही और सरकारी जमीन के रिकॉर्ड में कथित हेरफेर किस स्तर पर हुआ।
