ऊना। हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार लगातार व्यवस्था परिवर्तन और प्रदेश की स्वास्थ्य एवं शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के दावे करती रही है, लेकिन जमीनी तस्वीर कई जगह इन दावों से बिल्कुल अलग नजर आती है। अब डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री के गृह जिले ऊना के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान क्षेत्रीय अस्पताल ऊना की स्थिति ने सरकार के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल में विभिन्न श्रेणियों के 33 पद खाली चल रहे हैं। सबसे ज्यादा संकट चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को लेकर है, जहां स्वीकृत 24 पदों में से महज तीन कर्मचारी तैनात हैं और 21 पद लंबे समय से रिक्त हैं।

 

विडंबना यह है कि जिस अस्पताल पर ऊना ही नहीं बल्कि आसपास के क्षेत्रों के हजारों लोगों के इलाज की जिम्मेदारी है, वहां रोजाना 600 से अधिक मरीज ओपीडी में पहुंच रहे हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जब सरकार अपने ही उपमुख्यमंत्री के गृह जिले के प्रमुख अस्पताल में पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध नहीं करवा पा रही है तो प्रदेश के दूरदराज इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति कैसी होगी?

 33 कर्मचारियों का इंतजार कर रहा अस्पताल

सुक्खू सरकार सत्ता में आने के बाद व्यवस्था परिवर्तन को अपनी सरकार की प्रमुख पहचान के तौर पर पेश करती रही है। स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों को मजबूत करने के दावे भी लगातार किए जाते रहे हैं। लेकिन क्षेत्रीय अस्पताल ऊना की स्टाफ रिक्वायरमेंट सूची सामने आने के बाद विपक्ष को सरकार पर हमला बोलने के लिए एक और मुद्दा मिल सकता है।

अस्पताल में चिकित्सकीय, पैरामेडिकल, तकनीकी और सहायक स्टाफ के कुल 33 पदों पर कर्मचारियों की जरूरत बताई गई है। यानी समस्या सिर्फ एक-दो पदों तक सीमित नहीं है, बल्कि अस्पताल की पूरी कार्यप्रणाली से जुड़े अलग-अलग स्तरों पर स्टाफ की कमी बनी हुई है।

 

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डिप्टी सीएम के घर में ही स्वास्थ्य व्यवस्था का यह हाल!

ऊना को हिमाचल सरकार में महत्वपूर्ण राजनीतिक प्रतिनिधित्व हासिल है। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री इसी जिले से आते हैं। ऐसे में उनके गृह जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में इतनी बड़ी संख्या में पद रिक्त होना सरकार के लिए राजनीतिक तौर पर भी असहज करने वाला सवाल है। सरकार यदि अपने ही प्रभाव वाले जिले के प्रमुख स्वास्थ्य संस्थान की जरूरतों को समय पर पूरा नहीं कर पा रही है तो प्रदेश के उन दुर्गम क्षेत्रों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है, जहां स्वास्थ्य सुविधाएं पहले से ही चुनौती बनी हुई हैं।

24 पदों में मात्र तीन कर्मचारी तैनात 21 खाली

अस्पताल की सबसे चिंताजनक स्थिति चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को लेकर है। स्वीकृत 24 पदों में से केवल तीन पद भरे हुए हैं, जबकि 21 पद खाली हैं। यानी जिन 24 कर्मचारियों की जरूरत के हिसाब से व्यवस्था तैयार की गई थी, उसका काम फिलहाल सिर्फ तीन कर्मचारियों के सहारे चल रहा है। मरीजों को स्ट्रेचर और व्हीलचेयर से एक विभाग से दूसरे विभाग तक पहुंचाने से लेकर वार्डों और अस्पताल के अन्य सहायक कार्यों तक इन कर्मचारियों की अहम भूमिका रहती है।

 

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मरीजों को स्ट्रेचर चाहिए या स्टाफ? 

अस्पताल में आने वाले मरीजों के लिए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भले ही पर्दे के पीछे काम करते नजर आते हों, लेकिन स्वास्थ्य व्यवस्था में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। मरीज को इमरजेंसी से वार्ड तक पहुंचाना हो, व्हीलचेयर या स्ट्रेचर उपलब्ध करवाना हो या वार्डों में जरूरी सामग्री पहुंचानी हो—इन सभी कामों का सीधा संबंध अस्पताल की सुचारू व्यवस्था से है।

जब 24 पदों में से 21 खाली हों तो तीन कर्मचारियों पर कितना अतिरिक्त दबाव पड़ता होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। इसका अप्रत्यक्ष असर मरीजों और उनके तीमारदारों पर पड़ना भी स्वाभाविक है।

 

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विशेषज्ञों की भी कमी

क्षेत्रीय अस्पताल ऊना में स्टाफ संकट केवल सहायक कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। आवश्यकता सूची के मुताबिक अस्पताल में एक फॉरेंसिक एक्सपर्ट, एक सर्जन, दो ऑब्स्टेट्रिशियन एंड गायनेकोलॉजिस्ट और दो रेडियोग्राफर की भी जरूरत है। इसके अलावा एक डेंटल मैकेनिक, एक फीमेल हेल्थ वर्कर, एक फीमेल हेल्थ सुपरवाइजर, एक ट्रेंड दाई और दो ऑपरेशन थिएटर असिस्टेंट के पदों पर भी स्टाफ की आवश्यकता बताई गई है। इसका मतलब साफ है कि अस्पताल में स्टाफ की कमी कई स्तरों पर मौजूद है और यह केवल एक विभाग की समस्या नहीं है।

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डिप्टी सीएम के समक्ष रखी मांग फिर भी नहीं भरे पद

अस्पताल में रिक्त पदों का मुद्दा हाल ही में रोगी कल्याण समिति की बैठक में भी उठ चुका है। बैठक के दौरान उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री के समक्ष अस्पताल में खाली पदों को भरने की मांग रखी गई थी। बताया गया कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की कमी दूर करने के लिए मल्टीपर्पज वर्करों के माध्यम से व्यवस्था करने का प्रस्ताव मंत्रिमंडल के समक्ष रखने का आश्वासन दिया गया था। अब देखना यह है कि यह आश्वासन कब धरातल पर उतरता है और अस्पताल को वास्तव में अतिरिक्त स्टाफ कब मिलता है।

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क्या कहते हैं अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक

क्षेत्रीय अस्पताल ऊना के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संजय मनकोटिया के अनुसार चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की कमी सरकार के संज्ञान में है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार जल्द सकारात्मक निर्णय लेकर रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू करेगी। अस्पताल प्रशासन की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि रोजाना बड़ी संख्या में मरीज अस्पताल पहुंचते हैं और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए रिक्त पदों को भरना जरूरी हो गया है।

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