#अपराध
August 10, 2026
हिमाचल में 176 किलो चरस व 10 किलो से अधिक चिट्टा जब्त, मात्र 6 माह के आंकड़े देख सहमी देवभूमि
1132 मामलों में 1831 पुरुष और 75 महिलाएं गिरफ्तार
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में नशे के काले कारोबार ने अब ऐसा रूप ले लिया है, जिसके आंकड़े डराने वाले हैं। कभी शांत और देवभूमि के नाम से पहचाने जाने वाले हिमाचल में नशे की जड़ें अब शहरों से निकलकर गांवों और दूरदराज के इलाकों तक पहुंचती दिखाई दे रही हैं। पुलिस के आंकड़ों ने प्रदेश में नशे के फैलते नेटवर्क की गंभीर तस्वीर सामने रख दी है। साल 2026 के शुरुआती छह महीनों में ही पुलिस ने 176.681 किलो चरस और 10 किलो 708 ग्राम चिट्टा बरामद किया है। यही नहीं, इस अवधि में एनडीपीएस एक्ट के तहत 1132 मामले दर्ज किए गए और 1906 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
जनवरी 2026 से 30 जून 2026 तक हिमाचल प्रदेश में पुलिस की कार्रवाई के दौरान नशीले पदार्थों की बड़ी मात्रा बरामद हुई है। छह महीनों के आंकड़े बताते हैं कि नशे का कारोबार प्रदेश में कितनी तेजी से पैर पसार चुका है। इस अवधि में पुलिस ने चरस, चिट्टा, अफीम, भुक्की, गांजा, स्मैक और प्रतिबंधित नशीली दवाइयों समेत कई तरह के मादक पदार्थ जब्त किए हैं।
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सबसे चौंकाने वाली बरामदगी 176.681 किलो चरस और 10 किलो 708 ग्राम चिट्टे की है। महज छह महीनों में इतनी बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थों का पकड़ा जाना इस बात का संकेत है कि प्रदेश में नशे की सप्लाई चेन कितनी सक्रिय है।
एनडीपीएस के तहत दर्ज 1132 मामलों में पुलिस ने कुल 1831 पुरुषों और 75 महिलाओं को गिरफ्तार किया है। यानी नशे के इस नेटवर्क में केवल पुरुष ही नहीं, बल्कि महिलाएं भी आरोपी के तौर पर सामने आई हैं। ये आंकड़े यह भी बताते हैं कि नशे के कारोबार से जुड़े मामलों का दायरा लगातार गंभीर होता जा रहा है। पुलिस की कार्रवाई में अलग-अलग जिलों से सामने आ रहे मामलों ने प्रदेश में नशे के खिलाफ चुनौती को और बड़ा कर दिया है।
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हिमाचल में चरस के साथ-साथ चिट्टे की तस्करी भी पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। जनवरी से जून तक पुलिस ने 10 किलो 708 ग्राम चिट्टा बरामद किया है। इसके अलावा प्रदेशभर में 1132 ग्राम स्मैक भी पकड़ी गई। चिट्टे और स्मैक जैसे नशीले पदार्थों की बरामदगी को लेकर पुलिस लगातार अभियान चला रही है। इसके बावजूद छह महीनों में सामने आए आंकड़े यह सवाल खड़ा करते हैं कि आखिर प्रदेश में नशे की सप्लाई का नेटवर्क कितनी गहराई तक फैल चुका है।
पुलिस ने छह महीनों के दौरान 23 किलो से अधिक अफीम और 396 किलो से अधिक भुक्की बरामद की है। इसके अलावा पुलिस कार्रवाई में 11,85,897 अफीम के पौधे भी पकड़े गए हैं। अफीम के पौधों की इतनी बड़ी संख्या में बरामदगी नशे की समस्या के एक अन्य गंभीर पहलू की ओर इशारा करती है। पुलिस की कार्रवाई में नशीले पदार्थों के साथ-साथ अवैध रूप से उगाई जा रही अफीम की फसल भी लगातार सामने आ रही है।
छह महीने की कार्रवाई में पुलिस ने 40.48 किलो गांजा और 11.75 ग्राम एलएसडी भी बरामद की है। यानी नशे का कारोबार केवल चरस और चिट्टे तक सीमित नहीं है, बल्कि अलग-अलग तरह के मादक पदार्थों की मौजूदगी भी सामने आ रही है। यह स्थिति हिमाचल में नशे के बदलते स्वरूप को लेकर चिंता बढ़ाने वाली है। पुलिस के सामने चुनौती सिर्फ तस्करों को पकड़ने की नहीं, बल्कि नशे की पूरी सप्लाई चेन को तोड़ने की भी है।
पुलिस ने एनडीपीएस के मामलों में कार्रवाई करते हुए 2,61,339 प्रतिबंधित नशीली दवाइयों की गोलियां और 26,748 प्रतिबंधित कैप्सूल भी बरामद किए हैं। नशीली दवाइयों की इतनी बड़ी संख्या में बरामदगी यह बताती है कि प्रदेश में नशे की आपूर्ति के लिए केवल पारंपरिक मादक पदार्थों का इस्तेमाल नहीं हो रहा, बल्कि प्रतिबंधित दवाइयां भी इस नेटवर्क का हिस्सा बन रही हैं।
छह महीनों के आंकड़ों में मंडी जिला 177 मामलों के साथ सबसे आगे रहा। इसके बाद शिमला में 169, बिलासपुर में 118, कुल्लू में 99 और सिरमौर में 90 एनडीपीएस मामले दर्ज किए गए। अन्य जिलों की बात करें तो सोलन में 79, नूरपुर पुलिस जिला में 67, कांगड़ा में 63, हमीरपुर में 55, बद्दी पुलिस जिला में 54, चंबा में 49, ऊना में 48, देहरा पुलिस जिला में 38, किन्नौर में 24 और लाहौल-स्पीति में एक मामला दर्ज किया गया। स्टेट सीआईडी के थाने में भी एक मामला दर्ज हुआ।