प्रागपुर (कांगड़ा)। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के जसवां-प्रागपुर क्षेत्र के एक युवा लेखक ने अपनी लेखनी के दम पर न सिर्फ अपने क्षेत्र, बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। विकास खंड प्रागपुर की ग्राम पंचायत सेहरी के बलदोह गांव निवासी ईशांत शर्मा की पहली ही पुस्तक ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाते हुए प्रतिष्ठित सम्मान हासिल किया है।

 

ईशांत शर्मा की किताब ‘प्रेम, वासना और जीवन’ को युवाओं के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रेरणादायी पुस्तक की श्रेणी में प्रसिद्धि पुरस्कार के लिए चुना गया। नई दिल्ली में आयोजित भव्य समारोह में ईशांत को यह सम्मान हॉलीवुड के लेखक, निर्देशक एवं संपादक आंद्रे वेलेंकोर्ट के हाथों प्रदान किया गया। एक छोटे से ग्रामीण क्षेत्र से निकलकर राष्ट्रीय मंच पर सम्मान हासिल करने की ईशांत की यह उपलब्धि जसवां-प्रागपुर सहित पूरे हिमाचल के लिए गौरव का विषय बन गई है।

 

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पहली किताब और सीधे राष्ट्रीय पहचान

ईशांत शर्मा की साहित्यिक यात्रा की खास बात यह है कि उनकी यह पहली पुस्तक है। अप्रैल में प्रकाशित हुई ‘प्रेम, वासना और जीवन’ ने प्रकाशन के कुछ ही समय बाद पाठकों और विभिन्न डिजिटल मंचों पर अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी। किताब में प्रेम, मानवीय रिश्तों और जिंदगी से जुड़े विभिन्न पहलुओं को आज के युवाओं की सोच और नजरिए के साथ प्रस्तुत किया गया है। लेखक ने रिश्तों और जीवन की वास्तविकताओं को संवेदनशील अंदाज में सामने रखने का प्रयास किया है। इसी विषयवस्तु और प्रस्तुति के कारण पुस्तक 200 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय डिजिटल मंचों पर चर्चा में आई।

 

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ग्रामीण हिमाचल से दिल्ली के राष्ट्रीय मंच तक

ईशांत की उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने ग्रामीण परिवेश से निकलकर साहित्य के राष्ट्रीय मंच पर अपनी अलग पहचान बनाई है। सीमित संसाधनों के बीच लेखन को अपना माध्यम बनाकर उन्होंने यह साबित किया कि प्रतिभा के लिए बड़े शहर या बड़े संसाधन जरूरी नहीं होते। जसवां-प्रागपुर के बलदोह जैसे ग्रामीण क्षेत्र से निकलकर दिल्ली में राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त करना ईशांत के लिए व्यक्तिगत उपलब्धि के साथ-साथ उनके क्षेत्र के लिए भी गर्व का क्षण है।

 

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युवाओं की सोच को बनाया लेखन का आधार

ईशांत शर्मा की पुस्तक का केंद्र आज का युवा और उसके आसपास की भावनात्मक दुनिया है। प्रेम, आकर्षण, रिश्तों, मानवीय भावनाओं और जीवन की वास्तविकताओं को उन्होंने युवाओं के नजरिए से समझने और प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। पुस्तक को मिला सम्मान इस बात का संकेत माना जा रहा है कि युवा पाठकों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और नए नजरिए से किया गया लेखन राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी जगह बना सकता है।

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जसवां-प्रागपुर के युवाओं के लिए बने प्रेरणा

ईशांत की सफलता के बाद जसवां-प्रागपुर क्षेत्र में भी खुशी का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र से निकलकर एक युवा का राष्ट्रीय साहित्यिक मंच पर पहुंचना आने वाली पीढ़ी के लिए बड़ी प्रेरणा है। ईशांत ने अपनी पहली ही पुस्तक के जरिए जो पहचान बनाई है, उससे क्षेत्र के उन युवाओं को भी प्रोत्साहन मिलेगा जो लेखन, साहित्य और रचनात्मक क्षेत्रों में अपना भविष्य तलाश रहे हैं।

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हिमाचल की प्रतिभा ने फिर दिखाई अपनी ताकत

हिमाचल प्रदेश की पहचान केवल पर्यटन और प्राकृतिक सुंदरता तक सीमित नहीं है। प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों से प्रतिभाएं लगातार राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रही हैं। ईशांत शर्मा की उपलब्धि भी इसी कड़ी में एक और उदाहरण है। जसवां-प्रागपुर के इस युवा लेखक ने अपनी कलम के जरिए राष्ट्रीय मंच पर जो मुकाम हासिल किया है, वह उनके परिवार, गांव, क्षेत्र और पूरे हिमाचल के लिए गर्व की बात है। अब ईशांत की पहली पुस्तक को मिले इस राष्ट्रीय सम्मान के बाद साहित्य के क्षेत्र में उनसे भविष्य में और बेहतर रचनाओं की उम्मीदें भी बढ़ गई हैं।

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