सिरमौर। कभी-कभी मंजिल बड़े शहरों से नहीं, छोटे से गांव की पगडंडी से निकलकर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचती है। ऐसा ही कुछ हिमाचल प्रदेश के सिरमौर के छोटे से गांव से निकले एक युवक ने कर दिखाया है। जिसने नौकरी से करियर की शुरुआत करने के बाद उन्होंने अपनी दिशा बदली और उच्च शिक्षा व शोध को अपना लक्ष्य बनाया। लगातार प्रयासों का नतीजा रहा कि UGC-NET JRF में उन्होंने 99.37 पर्सेंटाइल हासिल किया।
कोर्ट में क्लर्क के तौर पर शुरू किया था करियर
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मेहनती युवक शाश्वत शर्मा सिरमौर जिले में पच्छाद के एक छोटे से गांव से निकलकर उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। बागपशोग पंचायत के घरघों पलाशों गांव के रहने वाले शाश्वत शर्मा ने UGC-NET JRF परीक्षा में समाजशास्त्र विषय में 99.37 पर्सेंटाइल प्राप्त किया है। उनकी इस उपलब्धि के बाद परिवार के साथ-साथ गुरुजनों और पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है।
यह भी पढ़ें : हिमाचल में फिर गिरी आसमानी बिजली : धमाके से फटा घर में रखा TV, एक की मौ*त
शाश्वत शर्मा ने अपने व्यावसायिक जीवन की शुरुआत नाहन न्यायालय में नियमित क्लर्क के रूप में की। उन्होंने करीब दो वर्षों तक न्यायालय में अपनी सेवाएं दीं। नौकरी के दौरान ही उन्होंने अपने भविष्य को लेकर गंभीरता से विचार किया और महसूस किया कि उनकी रुचि उच्च शिक्षा, शोध और अकादमिक क्षेत्र में है। इसके बाद उन्होंने करियर की दिशा बदलते हुए पढ़ाई और शोध को अपना लक्ष्य बनाया। नौकरी छोड़कर या उसके समानांतर अपने शैक्षणिक लक्ष्य के लिए लगातार मेहनत करना उनके सफर का महत्वपूर्ण पड़ाव रहा।
करियर की दिशा बदलने का लिया फैसला
शाश्वत शर्मा ने UGC-NET JRF की परीक्षा समाजशास्त्र (Sociology) विषय से दी और इसमें 99.37 पर्सेंटाइल हासिल किया। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने शोध एवं अकादमिक क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए एक महत्वपूर्ण मुकाम हासिल किया है। UGC-NET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में इतनी ऊंची पर्सेंटाइल हासिल करने के लिए विषय की गहरी समझ के साथ लगातार अध्ययन और अनुशासित तैयारी की जरूरत होती है। शाश्वत की उपलब्धि उनके लंबे समय तक किए गए अध्ययन और लक्ष्य के प्रति समर्पण को दर्शाती है।
यह भी पढ़ें : हिमाचल पुलिस ने बस में धरा रोहित : पिट्ठू बैग में भरा था ढेर सारा चिट्टा
शाश्वत की कहानी की खास बात यह है कि उन्होंने पहले नौकरी को अपना करियर बनाया और बाद में अपनी प्राथमिकताओं को समझते हुए शिक्षा और शोध की राह चुनी। कई युवाओं के लिए करियर की शुरुआत के बाद दिशा बदलना आसान नहीं होता। ऐसे में शाश्वत ने अपने लक्ष्य को दोबारा तय किया और उसी के अनुरूप तैयारी शुरू की। उनकी सफलता यह बताती है कि किसी व्यक्ति के लिए करियर का पहला पड़ाव ही अंतिम मंजिल नहीं होता। अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और उसके लिए निरंतर प्रयास किया जाए तो अलग दिशा में भी नई शुरुआत की जा सकती है।
परिवार में पहले से है सेवा और अनुशासन का माहौल
शाश्वत शर्मा के परिवार में भी शिक्षा, अनुशासन और सेवा की मजबूत पृष्ठभूमि रही है। उनके बड़े भाई शुभम शर्मा ने वर्ष 2020 में हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा उत्तीर्ण कर सब इंस्पेक्टर का पद हासिल किया था। वर्तमान में पदोन्नति के बाद वह इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत हैं और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल यानी SDRF में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
यह भी पढ़ें : हिमाचल नंबर की बोलेरो पर ‘हवाबाजी’ पड़ी भारी- लिखा था ‘किडनैपिंग कार’, पुलिस ने काटा चालान
वहीं, शाश्वत के पिता मदन स्वरूप शर्मा भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) से सेवानिवृत्त हैं। परिवार में सेवा और अनुशासन की पृष्ठभूमि के बीच शाश्वत ने शिक्षा और शोध को अपनी आगे की दिशा चुना।
माता-पिता और गुरुजनों में खुशी
शाश्वत की सफलता की खबर सामने आने के बाद उनके परिवार में खुशी का माहौल है। माता-पिता, भाई, रिश्तेदारों और गुरुजनों ने उनकी उपलब्धि पर प्रसन्नता जताई है। पच्छाद क्षेत्र के लोगों के लिए भी यह उपलब्धि इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ग्रामीण परिवेश से आने वाले एक युवा ने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षा में समाजशास्त्र जैसे विषय में शानदार प्रदर्शन किया है।
