बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा घोषित 10वीं कक्षा के परीक्षा परिणाम ने इस बार एक पुरानी सोच को पूरी तरह बदल दिया है। अक्सर यह माना जाता था कि बोर्ड परीक्षाओं में केवल निजी स्कूलों के छात्र ही टॉप कर सकते हैं, लेकिन इस बार हिमाचल के सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों ने इस मिथक को तोड़कर नई मिसाल पेश की है। प्रदेशभर में घोषित मेरिट सूची में सरकारी स्कूलों के कई छात्रों ने शानदार प्रदर्शन किया है। सबसे खास बात यह रही कि हिमाचल की सेकेंड टॉपर बनी बेटी भी एक सरकारी स्कूल की छात्रा है।
सरकारी स्कूल की पूर्णिमा बनी प्रदेश की शान
बिलासपुर की राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बिलासपुर की छात्रा पूर्णिमा शर्मा ने 700 में से 698 अंक हासिल कर प्रदेशभर में दूसरा स्थान प्राप्त किया। उन्होंने 99.71 प्रतिशत अंक लेकर यह साबित कर दिया कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती। पूर्णिमा की सफलता इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि उन्होंने सरकारी स्कूल में पढ़ाई करते हुए यह मुकाम हासिल किया है।
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छह विषयों में पूरे 100 अंक
पूर्णिमा का रिजल्ट देखकर हर कोई हैरान रह गया। उन्होंने छह विषयों में 100 में से 100 अंक प्राप्त किए हैं। केवल हिंदी विषय में उनके दो अंक कटे, वरना वह पूरे 700 अंक हासिल कर सकती थीं। उनकी इस उपलब्धि ने पूरे स्कूल और जिले में खुशी का माहौल बना दिया है।
पिता वन विभाग में] मां गृहिणी
पूर्णिमा के पिता जोगिंद्र पाल हिमाचल प्रदेश वन विभाग में सेक्टर ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं, जबकि उनकी मां गृहिणी हैं। परिवार ने हमेशा बेटी को पढ़ाई के लिए प्रेरित किया और उसकी मेहनत पर भरोसा रखा। पूर्णिमा पहले घुमारवीं में पढ़ाई करती थीं, लेकिन नौवीं कक्षा से उन्होंने बिलासपुर के गर्ल्स स्कूल में प्रवेश लिया। यहां आने के बाद उन्होंने पढ़ाई पर और अधिक ध्यान केंद्रित किया।
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रिजल्ट सुनते ही स्कूल में जश्न
जैसे ही बोर्ड परिणाम घोषित हुआ और स्कूल प्रबंधन को पूर्णिमा के प्रदेश में दूसरा स्थान हासिल करने की जानकारी मिली] छुट्टी के दिन भी स्कूल में जश्न का माहौल बन गया। स्कूल प्रशासन ने तुरंत शिक्षकों] छात्रा और उसके परिवार को विद्यालय बुलाया। शिक्षकों ने मिठाइयां बांटकर खुशी मनाई और पूर्णिमा को सम्मानित किया।
पढ़ाई के साथ हर गतिविधि में आगे
स्कूल की प्रधानाचार्य प्रिया पोसवाल ने बताया कि पूर्णिमा शुरू से ही बेहद अनुशासित और मेहनती छात्रा रही हैं। उन्होंने कहा कि पूर्णिमा केवल पढ़ाई में ही नहीं बल्कि खेलकूद और अन्य सह-पाठयक्रम गतिविधियों में भी हमेशा सक्रिय रहती थीं। यही संतुलन उनकी सफलता की सबसे बड़ी ताकत बना।
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सरकारी स्कूलों ने बदली सोच
इस बार हिमाचल बोर्ड के परिणामों ने यह साफ कर दिया है कि सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी भी किसी से कम नहीं हैं। संसाधनों की कमी के बावजूद सरकारी स्कूलों के छात्रों ने मेहनत और लगन के दम पर प्रदेश की मेरिट सूची में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करवाई है। पूर्णिमा शर्मा की सफलता अब उन हजारों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बन गई है, जो सरकारी स्कूलों में पढ़ते हुए बड़े सपने देखते हैं।
