हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश के जिला हमीरपुर के लम्बलू क्षेत्र के अंतर्गत आते बालू गांव से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक घर में इकलौते बेटे के सिर पर सेहरा सजने से ठीक पहले पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया। जिस घर में शहनाइयों की गूंज और शादी के जश्न का माहौल था, वहां पल भर में चीख-पुकार मच गई और सारी खुशियां मातम में बदल गईं।

मेहंदी की रस्म के बीच अचानक बिगड़ी केवल पठानिया की तबीयत

जानकारी के अनुसार बालू गांव निवासी केवल पठानिया के इकलौते बेटे विशाल की शादी 12 अगस्त के आसपास तय थी। शादी को लेकर घर में कई दिनों से तैयारियां चल रही थीं। रिश्तेदार और मेहमान भी घर पहुंच चुके थे और मेहंदी की रस्म की तैयारियां चल रही थीं। परिवार के लोग शादी को लेकर काफी खुश थे।

 

 

इसी बीच बुधवार तड़के करीब 3 बजे केवल पठानिया की अचानक तबीयत बिगड़ गई। बताया जा रहा है कि उन्हें गर्दन और गले में तेज दर्द हुआ। दर्द बढ़ने के बाद परिवार के लोग उन्हें तुरंत मेडिकल कॉलेज हमीरपुर लेकर पहुंचे। यहां डॉक्टरों ने उनका इलाज शुरू किया, लेकिन हालत गंभीर होने के कारण उन्हें डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज टांडा रेफर कर दिया गया।

टांडा अस्पताल में इलाज के दौरान तोड़ा दम

हमीरपुर से टांडा ले जाने के बाद डॉक्टरों ने केवल पठानिया का इलाज शुरू किया। परिवार को उम्मीद थी कि इलाज के बाद उनकी हालत में सुधार आएगा, लेकिन बुधवार शाम इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। उनके निधन की खबर सुनते ही परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई। दूल्हे के पिता 52 वर्षीय केवल पठानिया का अचानक निधन हो गया। इस घटना से परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।

 

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जिस घर में बेटे की शादी को लेकर मेहमानों की आवाजाही लगी हुई थी, वहां अचानक रोने और चीख-पुकार का माहौल हो गया। शादी की तैयारियां देखते ही देखते रुक गईं और परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।

शादी की रस्मों को बेहद सादे तरीके से निभाया

केवल पठानिया की मौत के बाद दोनों परिवारों के सामने एक बेहद मुश्किल स्थिति थी। बेटे की शादी तय थी, लेकिन घर में पिता की मौत हो चुकी थी। ऐसे हालात में दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से शादी की जरूरी रस्मों को बेहद सादे तरीके से पूरा करने का फैसला लिया।

 

 

इसके तहत दुल्हन को उसके कुछ परिजनों के साथ स्थानीय मंदिर में बुलाया गया। वहां पूरे माहौल में गम और खामोशी थी। दूल्हे विशाल पठानिया ने भारी मन से दुल्हन को मंगलसूत्र पहनाया। शादी की रस्म पूरी होने के बाद दुल्हन को वापस उसके मायके भेज दिया गया।

जिस दिन निकलनी थी बेटे की बारात, उसी दिन उठी पिता की अर्थी

केवल पठानिया ने अपने इकलौते बेटे की शादी को लेकर कई सपने संजोए थे। पिता के तौर पर वह चाहते थे कि बेटे की बारात धूमधाम से निकले और शादी में पूरा परिवार खुशी के साथ शामिल हो। परिवार ने भी शादी की तैयारियों में कोई कसर नहीं छोड़ी थी।

 

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लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि जिस दिन घर से बेटे की बारात निकलनी थी, उसी दिन पिता की अर्थी उठेगी। यह घटना परिवार के लिए किसी बड़े सदमे से कम नहीं है। शादी के लिए सजाया गया घर अचानक मातम का घर बन गया।

बारिश के बीच नम आंखों से हुआ अंतिम संस्कार

बुधवार देर रात केवल पठानिया का शव गांव पहुंचा। शव के गांव पहुंचते ही परिवार और रिश्तेदारों की आंखों से आंसू छलक पड़े। शादी के लिए आए मेहमान भी इस दुखद घटना के बाद गम में डूब गए। वीरवार को भारी बारिश के बीच केवल पठानिया का अंतिम संस्कार किया गया।

 

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इस घटना के बाद बालू गांव और आसपास के क्षेत्र में भी शोक का माहौल है। हर कोई परिवार के दुख में शामिल होकर उन्हें ढांढस बंधा रहा है। जिस घर में कुछ दिन पहले बेटे की शादी को लेकर खुशियां मनाई जा रही थीं, वहां अब पिता को खोने का गम पसरा हुआ है।