रिकांगपिओ/शिमला। मानसून के पूरी तरह सक्रिय होने से पहले ही हिमाचल प्रदेश के पहाड़ खतरनाक संकेत देने लगे हैं। प्रदेश के जनजातीय जिला किन्नौर और राजधानी शिमला में गुरुवार को पहाड़ दरकने की घटनाओं ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। किन्नौर में पहाड़ी से गिरी विशाल चट्टानों ने जहां एक मजदूर की जान ले ली, वहीं कई मकानों, निजी संपत्तियों और सेब के बगीचों को भारी नुकसान पहुंचाया। दूसरी ओर राजधानी शिमला में भारी भूस्खलन के कारण एक महत्वपूर्ण सड़क मार्ग बंद हो गया और आसपास के भवनों पर भी खतरा मंडराने लगा है। इन घटनाओं ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि यदि बिना अधिक बारिश के ही पहाड़ इस तरह दरकने लगे हैं, तो मानसून के चरम दौर में हालात कितने गंभीर हो सकते हैं।
चट्टानों का कहर, एक की मौत
किन्नौर जिले के कल्पा उपमंडल के रोघी गांव में गुरुवार दोपहर अचानक पहाड़ी से विशाल चट्टानें टूटकर नीचे आ गिरीं। देखते ही देखते पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों के अनुसार कुछ ही मिनटों में कई बड़ी चट्टानें नीचे आ गईं, जिससे आसपास का इलाका दहल उठा।
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इस हादसे की चपेट में आने से एक मजदूर की मौके पर ही मौत हो गई। हादसा इतना भयावह था कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। चट्टानों की चपेट में आने से कई घरों, निजी संपत्तियों और क्षेत्र के प्रसिद्ध सेब बगीचों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। स्थानीय बागवानों का कहना है कि वर्षों की मेहनत से तैयार किए गए बगीचों को एक झटके में भारी क्षति पहुंची है। कई स्थानों पर बगीचों की सुरक्षा दीवारें और सिंचाई व्यवस्था भी प्रभावित हुई है।
मुआवजे और स्थायी सुरक्षा उपायों की मांग
घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंच गईं। अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण कर नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है। स्थानीय लोगों ने मृतक मजदूर के परिवार को उचित मुआवजा देने के साथ-साथ प्रभावित परिवारों और बागवानों को तत्काल राहत प्रदान करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में बार-बार हो रही ऐसी घटनाओं को देखते हुए भूस्खलन संभावित क्षेत्रों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराया जाना चाहिए ताकि भविष्य में इस प्रकार की त्रासदियों को रोका जा सके।
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राजधानी शिमला में भी दरका पहाड़
उधर राजधानी शिमला में भी गुरुवार को भारी भूस्खलन ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दीं। ढली-संजौली बाईपास मार्ग पर पहाड़ी का बड़ा हिस्सा अचानक खिसक गया और भारी मात्रा में मलबा सड़क पर आ गिरा। गनीमत यह रही कि समय रहते संभावित खतरे को भांपकर वाहनों की आवाजाही रोक दी गई थी, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था। भूस्खलन के बाद यह महत्वपूर्ण मार्ग यातायात के लिए बंद हो गया, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
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बहुमंजिला भवन भी खतरे की जद में
स्थानीय लोगों के अनुसार प्रभावित पहाड़ी में कई जगह दरारें दिखाई दे रही हैं और लगातार छोटे-बड़े पत्थर गिर रहे हैं। ऐसे में आसपास स्थित बहुमंजिला भवनों पर भी खतरा मंडराने लगा है। लोगों का कहना है कि इस क्षेत्र में पहले भी कई बार पहाड़ दरकने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। बरसात के मौसम में जमीन में बढ़ती नमी पहाड़ की स्थिरता को कमजोर कर देती है, जिससे भूस्खलन का खतरा और बढ़ जाता है।
मानसून से पहले बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ों में भू-संरचना में लगातार बदलाव, कटाव और मौसम में आ रहे परिवर्तन ऐसी घटनाओं के पीछे प्रमुख कारण हो सकते हैं। किन्नौर और शिमला में एक ही दिन सामने आई घटनाओं ने प्रशासन और आम लोगों दोनों की चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय लोगों ने सरकार और प्रशासन से संवेदनशील क्षेत्रों का तकनीकी निरीक्षण करवाने, सुरक्षा दीवारें मजबूत करने और जोखिम वाले इलाकों की निगरानी बढ़ाने की मांग की है।
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प्रशासन ने जारी की सतर्कता सलाह
प्रशासन ने लोगों से भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूरी बनाए रखने और जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील की है। साथ ही संवेदनशील इलाकों पर लगातार नजर रखी जा रही है। किन्नौर में जहां एक परिवार अपने सदस्य को खोने के गम में डूबा हुआ है, वहीं शिमला में लोग संभावित खतरे को लेकर चिंतित हैं। मानसून के आगमन से पहले ही पहाड़ों का इस तरह दरकना आने वाले दिनों के लिए गंभीर चेतावनी माना जा रहा है।
