शिमला। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और युद्ध का असर अब हिमाचल प्रदेश में भी दिखने लगा है। यहां निर्माण में इस्तेमाल होने वाली ईंटें महंगी हो गई हैं। एक ईंट की कीमत करीब 2 रुपये तक बढ़ गई है, जिससे घर, होटल और अन्य भवन बनाना महंगा पड़ेगा।
हिमाचल में घर बनाना हुआ महंगा
प्रदेश में ईंटों का उत्पादन पहले से ही कम है, इसलिए यहां पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से ईंटें मंगाई जाती हैं। ऐसे में बाहर की परिस्थितियों का सीधा असर अब यहां के दामों पर पड़ रहा है। इसकी मुख्य वजह ईंट भट्ठों में इस्तेमाल होने वाले कोयले की कीमतों में आई भारी उछाल है।
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कोयला महंगा, ईंटों के दाम में बढ़ोतरी
ईंट बनाने में इस्तेमाल होने वाला कोयला अमेरिका, इंडोनेशिया और दक्षिण अफ्रीका से आयात किया जाता है। पहले इसकी कीमत 10 से 13 हजार रुपये प्रति टन के बीच थी, जो अब बढ़कर करीब 30 हजार रुपये प्रति टन तक पहुंच गई है। इस बढ़ोतरी का सीधा असर ईंटों की कीमत पर पड़ा है।
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कुल्लू के सप्लायरों के मुताबिक, प्रति ईंट करीब 2 रुपये तक कीमत बढ़ गई है। इसका मतलब है कि एक ट्रैक्टर ईंटों की कीमत करीब 2 हजार रुपये तक बढ़ गई है। ऐसे में बड़े स्तर पर निर्माण करने वालों को अतिरिक्त आर्थिक बोझ झेलना पड़ रहा है। अनुमान के मुताबिक, एक मकान के निर्माण पर कुल खर्च 30 से 40 हजार रुपये तक बढ़ सकता है।
युद्ध का सीधा असर, उद्योग भी प्रभावित
उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर चल रहे युद्ध के कारण कोयले के दाम में तेजी आई है। कंपनियों ने भी अपने रेट बढ़ा दिए हैं, जिससे ईंट भट्ठा संचालकों की लागत बढ़ गई है और इसका असर आम लोगों तक पहुंच रहा है।
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सीमेंट भी होगा महंगा, अप्रैल से बढ़ सकते हैं दाम
सिर्फ ईंट ही नहीं, बल्कि सीमेंट की कीमतों में भी जल्द बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। नए वित्तीय वर्ष 2026-27 की शुरुआत के साथ अप्रैल के पहले हफ्ते से सीमेंट के दाम प्रति बैग करीब 40 रुपये तक बढ़ने की संभावना है।अभी जहां एक बैग सीमेंट 440 रुपये के आसपास मिल रहा है, वह बढ़कर 480 रुपये तक पहुंच सकता है।
20 से 25 हजार रुपये तक बढ़ सकता है खर्च
अगर ऐसा होता है तो निर्माण लागत और बढ़ जाएगी। एक सामान्य मकान में करीब 500 बैग सीमेंट की जरूरत होती है, ऐसे में सिर्फ सीमेंट पर ही 20 से 25 हजार रुपये तक का अतिरिक्त खर्च बढ़ सकता है।
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आम आदमी पर बढ़ेगा बोझ
ईंट और सीमेंट दोनों के दाम बढ़ने से अब घर बनाना आम आदमी के लिए और ज्यादा महंगा होता जा रहा है। बढ़ती लागत के चलते निर्माण कार्यों की रफ्तार भी प्रभावित हो सकती है, जिसका असर आने वाले समय में रियल एस्टेट और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी देखने को मिल सकता है।
