शिमला: हिमाचल प्रदेश में आउटसोर्स आधार पर सरकारी नौकरी की उम्मीद लगाए बैठे हजारों युवाओं को बड़ा झटका लगा है। प्रदेश के शिक्षा विभाग में अब नई आउटसोर्स भर्तियों पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। वित्त विभाग की पूर्व मंजूरी के बिना किसी भी शिक्षण संस्थान या विभागीय कार्यालय में आउटसोर्स आधार पर नई नियुक्तियां नहीं की जा सकेंगी।

 

सरकार के इस फैसले के बाद शिक्षा विभाग में आउटसोर्स भर्ती के माध्यम से रोजगार की उम्मीद कर रहे युवाओं के लिए स्थिति पहले की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण हो गई है। विभागीय स्तर पर इस आदेश को तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

वित्त विभाग की अनुमति के बिना नहीं होगी भर्ती

प्रदेश सरकार के वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि अब किसी भी नई आउटसोर्स सेवा को नियुक्त करने, तैनात करने या अनुबंध पर रखने से पहले विभाग को वित्त विभाग से लिखित स्वीकृति लेनी होगी। इसके बाद उच्च शिक्षा विभाग ने भी सभी सरकारी डिग्री कॉलेजों और संस्कृत महाविद्यालयों को इस संबंध में दिशा-निर्देश भेज दिए हैं। विभागीय अधिकारियों को आदेशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।

 

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आउटसोर्सिंग नहीं स्थायी रोजगार का विकल्प

सरकार ने अपने निर्देशों में साफ किया है कि आउटसोर्सिंग केवल अस्थायी जरूरतों को पूरा करने का माध्यम है। इसे नियमित सरकारी रोजगार का विकल्प नहीं माना जाएगा। आदेशों में कहा गया है कि जहां नियमित भर्ती प्रक्रिया पूरी होने में समय लगता है, वहां सीमित अवधि के लिए आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवाएं ली जा सकती हैं, लेकिन इसे स्थायी व्यवस्था के रूप में नहीं अपनाया जाएगा।

विभागों में होगी कर्मचारियों की समीक्षा

सरकार को मिली रिपोर्टों में सामने आया है कि कुछ विभागों में स्वीकृत पदों की संख्या से अधिक आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत हैं। ऐसे मामलों की अब समीक्षा की जाएगी और वास्तविक आवश्यकता के आधार पर कर्मचारियों की संख्या तय की जाएगी। सूत्रों के अनुसार सरकार का उद्देश्य विभागों में मानव संसाधन का बेहतर प्रबंधन करना और अनावश्यक वित्तीय बोझ को कम करना है।

 

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नियमित पदों पर आउटसोर्स व्यवस्था नहीं

सरकारी आदेशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिन पदों के लिए भर्ती एवं पदोन्नति नियम पहले से निर्धारित हैं और जहां नियमित कर्मचारियों की नियुक्ति की व्यवस्था मौजूद है, वहां आउटसोर्सिंग का सहारा नहीं लिया जाएगा। इस फैसले को सरकारी भर्ती व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और नियमबद्ध बनाने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।

युवाओं में बढ़ी चिंता

शिक्षा विभाग में आउटसोर्स भर्ती पर रोक लगने के बाद उन युवाओं में चिंता बढ़ गई है जो लंबे समय से आउटसोर्स माध्यम से रोजगार मिलने की उम्मीद लगाए बैठे थे। विशेष रूप से कंप्यूटर ऑपरेटर, कार्यालय सहायक, डाटा एंट्री ऑपरेटर और अन्य सहायक श्रेणियों में नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को इस निर्णय से झटका लगा है। हालांकि सरकार का कहना है कि यह कदम भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।

 

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क्या होगा आगे?

अब शिक्षा विभाग में किसी भी नई आउटसोर्स नियुक्ति के लिए पहले वित्त विभाग से मंजूरी लेनी होगी। ऐसे में आने वाले समय में नई भर्तियों की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक नियंत्रित और सीमित हो सकती है। सरकार के इस फैसले पर युवाओं और कर्मचारी संगठनों की नजर बनी हुई है, क्योंकि इसका सीधा असर रोजगार के अवसरों और विभागीय कार्यप्रणाली दोनों पर पड़ सकता है।

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