कुल्लू। हिमाचल प्रदेश में एक ऐसे देवता साहब है जो शेष नाग के वशंज हैं और संकट में सबसे आगे खड़े रहने वाले नौ नाग भाइयों में गिने जाते हैं। ये न्याय के ऐसे प्रतीक हैं जिन्होंने अपने छोटे भाई को बचाने के लिए खुद जलना स्वीकार किया था।
शरीर गज के समान विशाल
ये देवता साहब हैं राय नाग जी जिन्हें शाशनी नाग और गजाई नाग भी कहा जाता है। कहते हैं इनका शरीर गज के समान विशाल और स्वभाव शांत है, लेकिन भीतर तप, त्याग और तेज की ऐसी कथा छुपी है जो हर भक्त को चौंका देती है।
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माता लम्ब्दुधि को हुआ शक
देवता साहिब की कहानी सरपारा से शुरू होती है। जहाँ जल नाग और माता लम्ब्दुधि के नौ पुत्र हुए। माता लम्ब्दुधि उन्हें छुपाकर अपने घर पर पालती थीं, लेकिन घर से दूध लगातार गायब होने पर उनकी माता को शक हुआ और यह रहस्य खुल गया।
खुद को आग में झोंक दिया
माता लम्ब्दुधि की घबराई माता ने बुखारी पर तवा रखकर सभी 9 पुत्रों को उसमें डाल दिया। उसी क्षण राय नाग ने अपने छोटे भाई जाहरू नाग को बचाने के लिए खुद को आग में झोंक दिया। उनकी छाती पर बना छेद और जाहरू नाग का कान आज भी इस घटना की गवाही देते हैं।
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आज्ञा पालन करने का वचन
बताते हैं कि इसके बाद नौ भाई अलग-अलग दिशाओं में निकल पड़े। राय नाग अपने भाई को लेकर मघेनी जोत पहुँचे और फिर देथवा तक आए, जहाँ उस समय देवता माटी सिंह विराजमान थे। राय नाग ने उन्हें गुरु मानकर हर आज्ञा पालन करने का वचन दिया।
दो बार चार फाटियों का फेरा
माटी सिंह ने प्रसन्न होकर उन्हें चलता-फिरता राज दिया और स्वयं बैठा राज ले लिया। तभी से संकट की घड़ी में सबसे पहले राय नाग से ही राय ली जाती है। आज भी देवता राय नाग साल में दो बार अपने चार फाटियों का फेरा करते हैं।
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दिखते हैं भालू, डायन व आत्माएं
पौष और चैत्र में जब मूल मंदिर में विशेष जागरण होता है, तो ढाई फीट बर्फ में भी बजंत्री और देवलु पूरी रात उनकी स्तुति में लीन रहते हैं। मान्यता है-अगर इस सेवा में कोई ढिलाई करे तो मंदिर के आस-पास शेर, भालू, डायन और आत्माएँ दिखने लगती हैं।
त्याग, पराक्रम, न्याय का स्वरूप
हालांकि देवता राय नाग मंदिर की रक्षा करते हैं और अगर कोई शक्ति का घमंड दिखाए तो स्वयं सर्प रूप में प्रकट होकर उसे शांत कर देते हैं। देवता साहब राय नाग जी त्याग, पराक्रम और न्याय का जीवंत स्वरूप हैं।
