बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश का बिलासपुर जिला व्यास ऋषि की जन्मभूमि और कर्मभूमि मानी जाती है। ऋषि व्यास के नाम से ही इस जगह का नाम व्यासपुर रखा गया था। आज बिलासपुर नाम से जाने वाले इस जिले में ऋषि व्यास की गुफा भी है जहां वे तप किया करते थे।

कई सालों तक गुफा में तपस्या

बिलासपुर में व्यास ऋषि की पूजा आज भी की जाती है। वो गुफा जहां ऋषि व्यास ने तपस्या की थी, वो आज भी इस नगर के डियारा सेक्टर में मौजूद है। मान्यता है कि ऋषि व्यास ने कई सालों तक इस गुफा में ध्यान किया है। ये भी कहा जाता है कि व्यास जी ने इसी जगह पर ही महाभारत लिखा। इतना ही नहीं, उन्होंने यहीं पर चारों वेदों की रचना भी की।

 

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आज भी मौजूद है व्यास गुफा

व्यास गुफा बिलासपुर में सतलुज नदी के तट पर है। असल में तो पुराना शहर गोविंद सागर झील में विलीन हो चुका है लेकिन व्यास गुफा आज भी सुरक्षित है। इसे धार्मिक स्थान की मान्यता दी गई है। ये एक ऐतिहासिक स्थान है। ऐसा माना जाता है कि ये स्थान कई महत्वपूर्ण वैदिक घटनाक्रमों का गवाह रहा है।

 

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वेदों के रचियता थे ऋषि व्यास

वेदों के कारण ही व्यास जी को वेदव्यास के नाम से जाना गया। व्यास जी ने चारों वेद अपन चार शिष्यों को पढ़ाए थे। वेद समझने में आसान नहीं थे। ऐसे में वेदव्यास जी ने पुराणों की रचना की। पुराणों में वेद का ज्ञान सरल और कहानियों के रूप में दर्शाया गया। इससे आम लोग भी इन्हें समझ सकें।

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उठती रही है व्यासपुर नाम की मांग

ऋषि व्यास जी के नाम से क्षेत्र का नाम व्यासपुर था लेकिन बाद में इसे बदलकर बिलासपुर कर दिया गया। समय-समय पर मांग उठती रही है कि जिले का नाम वापिस व्यासपुर किया जाए लेकिन ये मांग कई सालों के संघर्ष के बाद भी पूरी नहीं हो पाई है। बिलासपुर की सभी सामाजिक संस्थाएं मांग करती रही हैं कि बिलासपुर के गौरव को बहाल करने के लिए इसका नाम व्यासपुर किया जाए।