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August 6, 2025
हिमाचल में क्यों फटते हैं बादल ? पहाड़ो में तबाही की असली वजह एक क्लिक में जानिए
पर्यावरण में बदलाव एक बड़ा कारण
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में जबसे मॉनसून ने दस्तक दी है, तब से बादल फटने की घटनाएं सामने आ रही हैं। आखिर ये बादल फटना क्या होता है। क्या सचमुच कोई बादल फट जाता है या इसके पीछे कोई और वजह है। आइए जानने की कोशिश करते हैं।
बादल फटने की सभी घटनाओं के लिए कोई एक परिभाषा नहीं है। बादल के फटने का मतलब है बहुत कम समय में एक सीमित दायरे में अचानक बहुत भारी बारिश होना। मौसम विज्ञान विभाग कहता है कि अगर किसी क्षेत्र में 20-30 वर्ग किलोमीटर दायरे में एक घंटे में 100 मिलीमीटर बारिश होती है तो उसे बादल का फटना कहा जाता है। आसान शब्दों में समझें तो किसी एक जगह पर एक साथ अचानक बहुत बारिश होना बादल फटना कहा जाता है।
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जब तापमान बढ़ता है तो भारी मात्रा में नमी वाले बादल एक जगह आ जाते हैं। बादल एक जगह इकट्ठा होने पर पानी की बूंदें आपस में मिल जाती हैं। इन बूंदों का भार इतना बढ़ जाता है कि बादल का घनत्व यानी डेंसेंटी बढ़ जाती है। इसी वजह से एक सीमित दायरे में अचानक तेज बारिश होती है। इसे ही बादल फटना कहते हैं। हिमाचल और उत्तराखंड में क्षेत्रीय जल चक्र यानी लोकल वॉटर साइकिल में बदलाव भी बादल फटने का एक कारण है।
एक्सपर्ट कहते हैं कि जलवायु परिवर्तन यानी कलाइमेट चेंज से आने वाले सालों में बादल फटने की घटनाओं में बढ़ोतरी की आशंका है। इसके लिए जंगलों की आग, पेड़ों का अंधाधुध कटान और कचरे को जलाना जैसी चीजें जिम्मेदार हैं। पहाड़ों में बड़ी संख्या में पहुंच रहे टूरिस्ट भी इसके लिए जिम्मेदार हैं। पहाडों में बड़ी संख्या में पर्यटकों का आना और जगलों में अवैध निर्माण भी इसके लिए जम्मेदार है।
जब भी कहीं बादल फटता है तो बहुत बर्बादी होती है। लोगों की जान चली जाती है, संपत्ति का नामोनिशान नहीं रहता। बादल फटता है तो नदी-नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगता है और बाढ़ आ जाती है। पहाड़ों की ढलानों के चलते पानी रुक नहीं पाता और तेजी से नीचे की तरफ बहता है। जब ऐसा होता है तो ये बहाव मिट्टी, पत्थर, कीचड़, मवेशी इंसान सबकुछ साथ बहा ले जाता है।
सबसे पहले तो गौर करें कि मौसम विभाग मौसम से जुड़ी घटनाओं को लेकर समय-समय पर अलर्ट जारी करता है। विभाग समय रहते अलर्ट जारी करता है ताकि संवेदनशील जगहों को समय रहते खाली कर दिया जाए जिससे जानमाल का नुकसान कम हो। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार बादल फटने से ढलानों पर नुकसान होता है, ऐसे में ढलानों पर रहना खतरनाक होता है। जब बारिश हो तो नदी नालों के किनारों पर भी नहीं रहना चाहिए।