हमीरपुर: हिमाचल प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के दूसरे चरण के लिए आज वीरवार सुबह 7 बजे से मतदान की प्रक्रिया पूर्ण उत्साह के साथ जारी है। प्रदेश की 1276 पंचायतों में लोकतंत्र के इस पर्व को लेकर मतदाताओं में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है और सुबह से ही मतदान केंद्रों के बाहर लंबी-लंबी कतारें लगी हुई हैं।
सीएम सुक्खू के गृह जिला में चुनाव का बहिष्कार
इस सब के बीच प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के गृह जिला हमीरपुर से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने राज्य निर्वाचन आयोग से लेकर सरकार तक के होश उड़ा दिए हैं। जिला की एक पंचायत के पूरे गांव में सुबह से लेकर अब तक एक भी ग्रामीण वोट डालने नहीं पहुंचा, जिससे चुनावी अमला दिनभर हाथ पर हाथ धरे बैठा रहा।
यह भी पढ़ें : हिमाचल पंचायत चुनाव : नई-नवेली दुल्हन बनी प्रधान, एक महीना पहले ही हुई थी शादी
री पंचायत के गांव में मतदान का पूर्ण बहिष्कार
बताया जा रहा है कि हमीरपुर के विधानसभा क्षेत्र सुजानपुर की ग्राम पंचायत री के अंतर्गत आने वाले गांव कंगरी में बनाया गया मतदान केंद्र आज सुबह से ही पूरी तरह सुनसान पड़ा रहा और चुनाव ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी मतदाताओं का इंतजार करते रहे। बताया जा रहा है कि कंगरी गांव के वार्ड में 288 मतदाता दर्ज हैं, लेकिन दोपहर तक एक भी मतदाता वोट डालने के लिए नहीं पहुंचा।
क्या है लोगों की नाराजगी
ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से वे सड़क, बिजली और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया। लोगों का आरोप है कि कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सामने मांग उठाने के बावजूद केवल आश्वासन ही मिले। ग्रामीणों ने साफ कहा कि जब तक गांव की समस्याओं का समाधान नहीं होगा, तब तक वे मतदान में भाग नहीं लेंगे। लोगों का कहना है कि विकास नहीं तो वोट नहीं। इसी नाराजगी के चलते पूरे गांव ने मतदान से दूरी बना ली।
यह भी पढ़ें- हिमाचल पुलिस ने 17 साल की लड़की को धमकाया, जबरन दर्ज किए बयान- अफसर समेत चार सस्पेंड
पंचायत घर 15 किलोमीटर दूर
ग्रामीणों ने बताया कि उनका गांव री पंचायत के अंतर्गत आता है, लेकिन पंचायत घर तक पहुंचने के लिए करीब 15 किलोमीटर लंबा सफर तय करना पड़ता है। सड़क सुविधा नहीं होने के कारण लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों के अनुसार वाहन से आने-जाने में करीब एक हजार रुपये तक खर्च हो जाते हैं, जबकि पैदल रास्ता घने जंगल से होकर गुजरता है। लोगों का कहना है कि यह रास्ता इतना कठिन और सुनसान है कि दिन के समय भी अकेले जाना सुरक्षित नहीं माना जाता। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार दोनों भाजपा और कांग्रेस सरकार से गुहार लगाई, लेकिन किसी ने उनकी एक नहीं सुनी।
यह भी पढ़ें- तपते हिमाचल को मिलेगी राहत! आज बदलेगा मौसम- तेज बारिश, आंधी-तूफान और ओलावृष्टि का अलर्ट
बिजली और पानी की समस्या से भी परेशान लोग
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि गांव में कई-कई दिनों तक बिजली गुल रहती है। कई बार तीन से चार दिन तक बिजली आपूर्ति ठप रहती है। इसके अलावा पेयजल योजना बनने के बावजूद आज तक गांव के लोगों को उसका लाभ नहीं मिल पाया। लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण के लिए वे अपनी जमीन तक प्रशासन को दे चुके हैं, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। इससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी है।
पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना मामला
एक ओर जहां प्रदेशभर में पंचायत चुनाव को लेकर उत्साह का माहौल बना हुआ है, वहीं हमीरपुर के इस गांव में मतदान के पूर्ण बहिष्कार ने प्रशासन और राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। मुख्यमंत्री के गृह जिला में सामने आए इस मामले ने सरकार की कार्यप्रणाली और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
