शिमला। हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव के पहले चरण के नतीजे सामने आते ही राजनीतिक दलों के बीच श्रेय लेने की होड़ शुरू हो गई है। भारतीय जनता पार्टी जहां पंचायत चुनावों में 75 प्रतिशत सफलता का दावा कर इसे कांग्रेस सरकार के खिलाफ जनादेश बता रही है, वहीं सुक्खू सरकार के लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने भाजपा के दावों पर तीखा पलटवार किया है। उन्होंने भाजपा के दावों को "ख्याली पुलाव" और "बेबुनियाद बयानबाजी" बताते हुए कहा कि पंचायत चुनावों की वास्तविक प्रकृति को समझे बिना राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जा रही है।
जीतने वालों पर बिंदल का कोई ठप्पा लगा है
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर द्वारा पंचायत चुनावों में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों की बड़ी जीत का दावा किए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए विक्रमादित्य सिंह ने तंज भरे लहजे में कहा, "क्या पंचायत चुनाव जीतने वाले उम्मीदवारों पर राजीव बिंदल का कोई ठप्पा लगा हुआ है, जिससे यह तय किया जा सके कि कौन भाजपा का है और कौन नहीं?"
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पंचायत चुनाव को लेकर आमने-सामने भाजपा और कांग्रेस
पहले चरण के चुनाव परिणामों के बाद भाजपा का दावा है कि प्रदेश की करीब 75 प्रतिशत पंचायतों में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने इसे कांग्रेस सरकार की नीतियों के खिलाफ जनता का संदेश बताते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी भाजपा और उसकी विचारधारा पर लोगों का भरोसा कायम है। जयराम ठाकुर ने विशेष रूप से अपने गृह क्षेत्र सराज का जिक्र करते हुए दावा किया कि 28 पंचायतों में से 25 पंचायतों में भाजपा समर्थित उम्मीदवार विजयी रहे हैं। उन्होंने इसे भाजपा की मजबूत पकड़ और जनता के विश्वास का प्रमाण बताया।
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पंचायत चुनाव दलों के नहीं, व्यक्तित्व और भरोसे के चुनाव"
भाजपा के दावों का जवाब देते हुए विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि पंचायत चुनाव किसी राजनीतिक दल के चुनाव चिन्ह पर नहीं लड़े जाते। इन चुनावों में उम्मीदवार की व्यक्तिगत पहचान, जनता के साथ उसका जुड़ाव, स्थानीय नेतृत्व और क्षेत्र में किए गए कार्य महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि जो उम्मीदवार चुनाव जीतकर आए हैं, उनकी जीत उनके अपने परिश्रम और जनता के विश्वास का परिणाम है। हर जीत को किसी राजनीतिक दल के खाते में डालना वास्तविकता से परे है। मंत्री ने कहा कि भाजपा ऐसे दावे कर राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश कर रही है, जबकि पंचायत चुनावों की तस्वीर इससे कहीं अधिक व्यापक और जमीनी है।
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"अभी दो चरण बाकी, पूरी तस्वीर आनी बाकी"
विक्रमादित्य सिंह ने भाजपा को जल्दबाजी से बचने की सलाह देते हुए कहा कि पंचायत चुनावों के अभी दो चरण बाकी हैं। ऐसे में पहले चरण के आधार पर पूरे प्रदेश की राजनीतिक तस्वीर तय करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि अंतिम परिणाम आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि जनता का रुझान किस दिशा में है। अभी से जीत के बड़े-बड़े दावे करना केवल राजनीतिक प्रचार का हिस्सा दिखाई देता है।
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पंचायत चुनाव को ‘सेमीफाइनल’ बताने पर भी आपत्ति
भाजपा नेताओं द्वारा पंचायत चुनावों को आगामी विधानसभा या लोकसभा चुनावों का सेमीफाइनल बताए जाने पर भी विक्रमादित्य ने कड़ा एतराज जताया। उन्होंने कहा कि पंचायत चुनावों की अपनी अलग गरिमा और प्रकृति होती है। उनके अनुसार पंचायत चुनाव गांवों की समस्याओं, स्थानीय विकास और क्षेत्रीय नेतृत्व के आधार पर लड़े जाते हैं, जबकि विधानसभा और लोकसभा चुनावों के मुद्दे और राजनीतिक परिस्थितियां पूरी तरह अलग होती हैं। इसलिए दोनों की तुलना करना सही नहीं है।
