शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान बुधवार का दिन उस समय खास बन गया। जब देहरा से विधायक और CM सुखविंदर सिंह सुक्खू की धर्मपत्नी कमलेश ठाकुर ने पहली बार सदन में अपनी बात रखी। अपने पहले ही भाषण में उन्होंने राज्य सरकार के बजट की जमकर सराहना की। जबकि, केंद्र सरकार की नीतियों और विपक्ष की आलोचना पर भी संतुलित लेकिन तीखा रुख अपनाया।

सदन में पहली बार बोलीं मिसेज CM

कमलेश ठाकुर ने अपने संबोधन की शुरुआत धार्मिक संदर्भ से करते हुए कहा कि नवरात्र के पावन अवसर पर उन्होंने सदन की कार्यवाही में भाग लेने का मन बनाया। उन्होंने कहा कि प्रस्तुत बजट चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में तैयार किया गया है। इसके बावजूद इसमें समाज के हर वर्ग महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों, किसानों और बेरोजगार युवाओं का विशेष ध्यान रखा गया है।

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बजट को जमकर सराहा

कमलेश ठाकुर ने कहा कि वर्ष 2022 से राज्य सरकार लगातार महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने एकल महिलाओं (एकल नारी) के लिए और अधिक योजनाएं लाने की जरूरत भी जताई।

300 यूनिट बिजली फ्री

उन्होंने 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि इससे घरेलू महिलाओं को राहत मिलेगी। साथ ही पशुपालकों, किसानों और स्वरोजगार से जुड़ी महिलाओं को भी बड़ा लाभ होगा। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि छोटे-छोटे काम जैसे ब्यूटी पार्लर या अन्य घरेलू व्यवसाय चलाने वाली महिलाओं के लिए यह निर्णय बेहद सहायक साबित होगा।

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LPG, MNREGA और RDG पर केंद्र को घेरा

अपने भाषण के दौरान कमलेश ठाकुर ने केंद्र सरकार की कुछ योजनाओं को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने LPG, MNREGA और RDG को “तीन बहनों” की संज्ञा देते हुए कहा कि वर्तमान समय में ये योजनाएं संघर्ष कर रही हैं।

गरीब परिवार हो रहे परेशान...

उन्होंने कहा कि उज्ज्वला योजना में गैस सिलेंडर से जुड़ी शर्तों के कारण गरीब परिवारों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि कई जगहों पर लोग फिर से चूल्हे पर खाना बनाने को मजबूर हो गए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे में राज्य सरकार की ओर से 300 यूनिट मुफ्त बिजली जैसी योजनाएं लोगों को राहत देने का काम करेंगी।

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शिक्षा व्यवस्था पर भी रखी स्पष्ट राय

शिक्षा के मुद्दे पर बोलते हुए कमलेश ठाकुर ने कहा कि प्रदेश सरकार ने इस क्षेत्र में कई सकारात्मक कदम उठाए हैं और बजट में भी शिक्षा को प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने कहा कि गरीब परिवारों के बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं। आज CBSE को लेकर जो विरोध हो रहा है, उसे संतुलित नजरिए से देखने की जरूरत है।

ट्रांसफर और स्थानीय मुद्दों का भी किया जिक्र

अपने संबोधन के दौरान उन्होंने स्थानीय मुद्दों को भी उठाया। उन्होंने स्वीकार किया कि अपने विधानसभा क्षेत्र देहरा में शिक्षकों की कमी को देखते हुए उन्होंने भी ट्रांसफर के लिए कई नोट लगाए थे, लेकिन कई बार प्रशासनिक परिस्थितियों के चलते फैसले बदल जाते हैं। उन्होंने देहरा कॉलेज में छात्रों की घटती संख्या का मुद्दा भी उठाया और कहा कि इस तरह की समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है।

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किसानों-अनाथ बच्चों के लिए योजनाएं

कमलेश ठाकुर ने कहा कि बजट में किसानों की फसलों को बचाने के लिए प्रभावी योजनाएं लाई गई हैं। साथ ही अनाथ बच्चों के लिए भी सरकार ने विशेष पहल की है, जो सराहनीय है।

उन्होंने बजट दस्तावेज को “गीता” के उदाहरण से समझाते हुए कहा कि इसे केवल एक किताब के रूप में नहीं, बल्कि इसके सार को समझने की जरूरत है।

विपक्ष पर साधा संतुलित निशाना

अपने पूरे भाषण में उन्होंने विपक्ष पर भी हल्के-फुल्के अंदाज में निशाना साधा, लेकिन भाषा की मर्यादा बनाए रखी। उन्होंने कहा कि किसी भी नीति को लागू करने में समय और सहयोग दोनों की जरूरत होती है।

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पहली स्पीच पर मिली सराहना

करीब 18 मिनट 33 सेकंड के अपने संबोधन के बाद विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने उनकी पहली स्पीच की सराहना की और उन्हें बधाई दी। वहीं, भाजपा विधायक अनिल शर्मा ने भी उन्हें शुभकामनाएं देते हुए कहा कि राजनीति में कई बार परिस्थितियां व्यक्ति को आगे लाती हैं और ऐसे में परिवार को लेकर कई तरह की बातें भी सामने आती हैं।

कमलेश ने रखी बेबाक राय

कमलेश का यह पहला संबोधन आत्मविश्वास, संतुलन और जमीनी मुद्दों से जुड़ा नजर आया। उन्होंने जहां सरकार की नीतियों का समर्थन किया, वहीं जनता से जुड़े मुद्दों को भी खुलकर सामने रखा। उनकी यह पहली स्पीच न केवल सदन में चर्चा का विषय बनी- बल्कि यह संकेत भी दे गई कि आने वाले समय में वह प्रदेश की राजनीति में सक्रिय और प्रभावशाली भूमिका निभा सकती हैं।

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