शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने पंचायती राज संस्थाओं के चुनावी ढांचे में अहम बदलाव करते हुए पंचायत समिति और जिला परिषद के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया को संशोधित कर दिया है। पंचायती राज विभाग की ओर से जारी नई अधिसूचना के तहत अब नवनिर्वाचित सदस्यों के शपथ ग्रहण और अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के चुनाव के लिए अलग-अलग बैठकें आयोजित की जाएंगी।

सरकार ने किया नियम 85 और 86 में संशोधन

दरअसल, पहले व्यवस्था यह थी कि चुनाव जीतने वाले सदस्यों को शपथ दिलाने और अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया एक ही बैठक में पूरी कर ली जाती थी। लेकिन नए नियम लागू होने के बाद दोनों प्रक्रियाओं को अलग कर दिया गया है।

 

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अब सबसे पहले निर्वाचित सदस्यों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई जाएगी, जबकि अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव के लिए बाद में अलग से बैठक बुलाई जाएगी। सरकार ने नियम 85 और 86 में भी संशोधन किया है। इसके तहत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव के लिए पहले तय समय-सीमा को समाप्त कर दिया गया है।

चुनाव संचालन में भी रहेगी सुविधा

पहले शपथ ग्रहण के बाद सात से दस दिनों के भीतर चुनाव करवाना अनिवार्य था, लेकिन अब यह बाध्यता हटा दी गई है। प्रशासन आवश्यकता के अनुसार अलग से नोटिस जारी कर चुनावी बैठक बुला सकेगा।  इस बदलाव के साथ हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (निर्वाचन) तृतीय संशोधन नियम, 2026 को लागू कर दिया गया है।

 

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सरकार का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और प्रशासनिक रूप से सुगम बनाना है। अलग-अलग बैठकों से निर्वाचित सदस्यों को प्रक्रियाओं को बेहतर ढंग से समझने का अवसर मिलेगा और चुनाव संचालन में भी सुविधा रहेगी।

नेता प्रतिपक्ष ने लगाया आरोप

उधर, नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने दावा किया कि हाल ही में संपन्न पंचायती राज चुनावों में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों को व्यापक जनसमर्थन मिला है। उन्होंने कहा कि, चुनाव परिणामों ने प्रदेश की जनता का रुझान स्पष्ट कर दिया है और यह कांग्रेस सरकार की नीतियों के प्रति असंतोष को दर्शाता है।

 

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साथ ही जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि सरकार स्थानीय निकायों में अपनी स्थिति कमजोर देख बीडीसी और जिला परिषद अध्यक्ष-उपाध्यक्ष चुनावों की प्रक्रिया को टालने की कोशिश कर रही है, ताकि राजनीतिक नुकसान से बचा जा सके।

यह संशोधन आगामी समीकरणों पर डालेगा असर

गौरतलब है कि हाल ही में संपन्न हुए पंचायती राज सामान्य चुनाव 2026 के बाद प्रदेशभर में पंचायत समितियों और जिला परिषदों में अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष पदों के चुनाव होने हैं। ऐसे में सरकार द्वारा किया गया यह संशोधन आगामी चुनावी गतिविधियों और राजनीतिक समीकरणों पर सीधा असर डाल सकता है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद स्थानीय निकायों में नेतृत्व चयन की प्रक्रिया पहले की तुलना में अलग तरीके से संचालित होगी।

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