शिमला। हिमाचल प्रदेश में में अयोग्य विधायकों की पेंशन बंद होने वाली है। इतना ही नहीं अयोग्य विधायकों से उनकी पेंशन और अन्य भत्तों की रिकवरी भी हो सकती है। प्रदेश की सुक्खू सरकार ने विधानसभा (सदस्यों के भत्ते और पेंशन) संशोधन विधेयक 2024 पर राज्यपाल द्वारा लगाई गई आपत्तियों को दूर कर इसे वापस राजभवन की मंजूरी के लिए भेज दिया है। अब राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद अयोग्य विधायकों की पेंशन बंद होगी और उनसे रिकवरी भी हो सकती है।

कांग्रेस विधायकों ने की थी क्रॉस वोटिंग

दरअसल हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार पिछले बजट सत्र में छह कांग्रेस विधायकों की ओर से क्रॉस वोटिंग करने पर इस विधेयक को लाई थी। बजट सत्र में विधेयक को पारित कर इसे मंजूरी के लिए राज्यपाल के पास राजभवन भेजा गया था। लेकिन राज्यपाल ने इसमें कुछ आपत्तियां लगाकर इसे वापस भेज दिया था। अब सुक्खू सरकार ने राज्यपाल द्वारा लगाई गई आपत्तियों को दूर कर इसे वापस मंजूरी के लिए राजभवन भेज दिया है। 

 

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विधेयक मंजूर होने पर इनकी बंद होगी पेंशन

माना जा रहा है कि अगर यह विधेयक मंजूर हो जाता है तो पूर्व विधायक देवेंद्र भुट्टो और चैतन्य शर्मा को पेंशन नहीं मिलेगी। इसके अलावा उन्हें भत्ते भी नहीं दिए जाएंगे। इसी तरह से सुधीर शर्मा, राजेंद्र राणा, आईडी लखनपाल और रवि ठाकुर के कार्यकाल की पेंशन में गणना नहीं की जाएगी। बताया जा रहा है कि इस विधेयक में इन सभी विधायकों से पेंशन और भत्तों की रिकवरी करने का भी प्रावधान है।

 

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राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस में हुआ था बड़ा खेला

बता दें कि बीते वर्ष हिमाचल कांग्रेस में बड़ा भूचाल आया था। बजट सत्र से ठीक पहले राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के छह विधायकों सहित तीन निर्दलीय विधायकों ने भाजपा के प्रत्याशी हर्ष महाजन को वोट किया था। जिसके चलते 40 विधायकों वाली कांग्रेस का राज्यसभा उम्मीदवार यह चुनाव हार गए थे। हर्ष महाजन को वोट करने के बाद कांग्रेस के छह विधायकों ने बजट पारित करने के दौरान पार्टी व्हिप का उल्लंघन किया। जिसके चलते उन पर दल बदल कानून के तहत कार्रवाई हुई। 

 

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इन सभी छह कांग्रेस विधायकों ने अपने पद से इस्तीफा देकर भाजपा ज्वाइन कर ली थी और भाजपा की टिकट पर उपचुनाव लड़ा था। जिसमें सुधीर शर्मा और इंद्र दत्त लखनपाल चुनाव जीत कर दोबारा विधायक बन गए, लेकिन देवेंद्र भुट्टो, चैतन्य शर्मा, रवि ठाकुर और राजेंद्र राणा चुनाव हार गए। दलबदल कानून के तहत अयोग्य घोषित होने वाले इन्हीं विधायकों की इस अवधि की पेंशन और भत्ते रोकने के लिए सुक्खू सरकार यह विधेयक लेकर आई थी। जिसे अब दोबारा राजभवन भेजा गया है।

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