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June 13, 2026

केंद्र ने हिमाचल की दिल खोल कर की मदद, पर सुक्खू सरकार खर्च ही नहीं कर पाई पैसा; नड्डा का आरोप

जेपी नड्डा बोले कांग्रेस सरकार में कमजोर हुई प्रशासनिक व्यवस्था, बड़े फैसले नहीं ले पा रहे सीएम

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JP Nadda Himachal Politics

शिमला। हिमाचल प्रदेश की वादियों में एक बार फिर सियासी पारा पूरी तरह गरमा गया है। भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा अपने हिमाचल दौरे के दौरान प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर हमलावर मोड में नजर आए। शिमला में जेपी नड्डा ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार को हर मोर्चे पर विफल बताते हुए जमकर घेरा।

नड्डा ने दोटूक शब्दों में कहा कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार हिमाचल की तरक्की के लिए दिल खोलकर भरपूर आर्थिक सहायता दे रही है, लेकिन प्रदेश की सुक्खू सरकार उस पैसे को खर्च करने में भी नाकाम साबित हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था इतनी कमजोर और पंगु हो चुकी है कि मुख्यमंत्री अब कड़े और जरूरी फैसले लेने की स्थिति में भी नहीं रह गए हैं।

केंद्र मदद कर रहा, प्रदेश सरकार खर्च नहीं कर पा रही

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि कांग्रेस सरकार लगातार केंद्र पर भेदभाव के आरोप लगाती रही है, जबकि वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत है। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार ने हिमाचल को विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं के तहत हजारों करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाई है।

 

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दिल्ली के रिमोट पर चल रही सुक्खू सरकार

जेपी नड्डा ने आरोप लगाया कि सूबे में स्थायी व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है और पूरी सरकार 'एडहॉक' नीति पर रेंग रही है। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री से लेकर मुख्य सचिव और डीजीपी तक एडिशनल चार्ज ;अतिरिक्त कार्यभारद्ध के सहारे काम संभाल रहे हैं। नड्डा ने तंज कसते हुए कहा कि हिमाचल की सरकार शिमला से नहींए बल्कि दिल्ली से रिमोट कंट्रोल द्वारा संचालित हो रही है। प्रशासनिक ढांचा इतना कमजोर है कि अधिकारी सार्वजनिक रूप से एक.दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप मढ़ रहे हैं और मुख्यमंत्री मूकदर्शक बने हुए हैं।

सुक्खू सरकार पर लगाया पैसे दबाने का आरोप

कांग्रेस द्वारा केंद्र से मदद न मिलने के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए जेपी नड्डा ने आर्थिक सहायता के बड़े आंकड़े सामने रखे। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिल में हिमाचल के लिए विशेष स्थान है, जिसके चलते संसाधनों की कोई कमी नहीं होने दी गई।

  • विशेष सहायता योजना: वित्त वर्ष 2024-25 के तहत हिमाचल को ₹2,381 करोड़ की भारी-भरकम राशि दी गई।
  • आपदा राहत (NDRF): प्रदेश में आई आपदा से निपटने के लिए केंद्र ने ₹2,006 करोड़ जारी किए।
  • बाहरी सहायता प्राप्त प्रोजेक्ट्स: राज्य को ₹2,150 करोड़ की अतिरिक्त मदद पहुंचाई गई।
  • नेशनल हाईवे और रेलवे: प्रदेश में ₹40,000 करोड़ से अधिक की लागत से राष्ट्रीय राजमार्गों का जाल बिछाया जा रहा है, जबकि रेल कनेक्टिविटी के लिए रिकॉर्ड ₹2,911 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही ₹13,168 करोड़ की चार बड़ी रेल परियोजनाओं पर काम चल रहा है।

नड्डा ने तीखा सवाल दागते हुए कहा कि जब केंद्र से इतना पैसा आ रहा है, तो वह जमीन पर क्यों नहीं दिख रहा? सुक्खू सरकार इस पैसे को जनकल्याणकारी कार्यों में खर्च क्यों नहीं कर पा रही है?

 

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प्रशासनिक व्यवस्था कमजोर, फैसले लेने में असमर्थ सरकार

जेपी नड्डा ने प्रदेश सरकार की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हिमाचल में शासन व्यवस्था कमजोर पड़ चुकी है और कई महत्वपूर्ण पदों पर अतिरिक्त प्रभार के सहारे काम चलाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री कार्यालय से लेकर प्रशासनिक तंत्र तक निर्णय लेने की प्रक्रिया प्रभावित हुई है। नड्डा ने कहा कि स्थिति ऐसी बन गई है कि सरकार बड़े फैसले लेने में भी असहज दिखाई देती है और प्रशासनिक मशीनरी पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रही।

विजन की कमी से जूझ रही कांग्रेस सरकार

भाजपा नेता ने कहा कि प्रदेश सरकार के पास विकास को लेकर कोई स्पष्ट रोडमैप दिखाई नहीं देता। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावों के दौरान किए गए कई बड़े वादे आज भी अधूरे पड़े हैं और जनता को उनके लाभ का इंतजार है। नड्डा ने कहा कि कांग्रेस सरकार जनता की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर पाई है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश के कई विकास कार्य धीमी गति से चल रहे हैं और लोगों को बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

 

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स्वास्थ्य क्षेत्र में भी उठाए सवाल

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने स्वास्थ्य क्षेत्र को लेकर भी प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत कई स्वास्थ्य परियोजनाओं का कार्य अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। नड्डा ने दावा किया कि स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध कराया गया, लेकिन कई योजनाएं अभी भी अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जाना चाहिए।

 

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भाजपा-कांग्रेस के बीच बढ़ सकती है राजनीतिक तल्खी

जेपी नड्डा के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में नई बहस शुरू होने के संकेत मिल रहे हैं। एक ओर भाजपा केंद्र सरकार की उपलब्धियों और आर्थिक सहायता को मुद्दा बना रही है, वहीं कांग्रेस सरकार पहले भी केंद्र पर पर्याप्त सहयोग न मिलने के आरोप लगाती रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में विकास, आर्थिक सहायता और प्रशासनिक कार्यशैली जैसे मुद्दों पर भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी टकराव और तेज हो सकता है।

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