शिमला। जिस गांव से एक विधायक की राजनीतिक पहचान बनी हो, अगर उसी गांव की गलियों में उसके खिलाफ नारे गूंजने लगें तो यह सिर्फ एक चुनावी नतीजा नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संदेश माना जाता है। रोहड़ू विधानसभा क्षेत्र के कुटाड़ा गांव में पंचायत चुनाव के परिणाम सामने आने के बाद कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जब ग्रामीणों और युवाओं ने विधायक मोहन लाल ब्राक्टा के खिलाफ खुलकर विरोध प्रदर्शन किया।

परिणाम घोषित होते ही शुरू हुआ विरोध

पंचायत प्रधान पद के नतीजे सामने आते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण और युवा मतगणना केंद्र के बाहर एकत्र हो गए। देखते ही देखते माहौल गर्म हो गया और विधायक विरोधी नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। काफी देर तक प्रदर्शन और नारेबाजी का दौर चलता रहा, जिससे इलाके में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।

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क्या हैं आरोप?

प्रदर्शन कर रहे लोगों का आरोप है कि पंचायत चुनाव में विधायक मोहन लाल ब्राक्टा ने कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार का खुलकर साथ नहीं दिया। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने एक निर्दलीय प्रत्याशी को जिताने में भूमिका निभाई, जिससे कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों में भारी नाराजगी फैल गई।

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कई प्रदर्शनकारियों ने इसे संगठन और जमीनी कार्यकर्ताओं की भावनाओं की अनदेखी बताते हुए कहा कि चुनाव के दौरान पार्टी समर्थित उम्मीदवार को अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। इसी वजह से चुनाव परिणाम के बाद कार्यकर्ताओं का गुस्सा खुलकर सामने आ गया।

कांग्रेस के समर्थन में लगे नारे

विरोध प्रदर्शन के दौरान युवाओं और ग्रामीणों ने कांग्रेस पार्टी के समर्थन में भी नारे लगाए। उनका कहना था कि पार्टी कार्यकर्ताओं के विश्वास को बनाए रखना जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी होती है और यदि कार्यकर्ताओं की भावनाओं को नजरअंदाज किया जाएगा तो असंतोष सामने आना स्वाभाविक है।

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अपने ही गांव में घिरे विधायक

गौरतलब है कि विधायक मोहन लाल ब्राक्टा स्वयं कुटाड़ा गांव के निवासी हैं और यह उनका पैतृक गांव माना जाता है। ऐसे में अपने ही गांव में उनके खिलाफ हुई खुली नारेबाजी ने पूरे रोहड़ू क्षेत्र की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पंचायत चुनाव भले ही स्थानीय स्तर का चुनाव हो, लेकिन इसके परिणाम और उसके बाद सामने आई प्रतिक्रियाएं आने वाले समय में क्षेत्रीय राजनीति पर असर डाल सकती हैं।

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चर्चाओं का केंद्र बना कुटाड़ा

पंचायत चुनाव के नतीजों के बाद कुटाड़ा गांव अब राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बन गया है। पूरे क्षेत्र में देर शाम तक चुनाव परिणामों और विरोध प्रदर्शन को लेकर चर्चाएं होती रहीं। फिलहाल इस घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि पंचायत चुनावों की गूंज अब स्थानीय राजनीति से निकलकर बड़े राजनीतिक समीकरणों तक पहुंच चुकी है।

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